बसपा के पास गुंडे नहीं हैं, पर लुटेरे हैं, जबकि सपा के पास गुंडे और लुटेरे दोनों हैं : कंवल भारती

Kanwal Bharti : क्या उत्तर प्रदेश में २०१७ में बसपा सत्ता में आ सकती है? पूछा कुछ बसपाईयों ने. मैंने कहा, अगर यही हालात रहे, जो आज हैं, और कोई विशेष घटना नहीं घटी, तो बसपा वापिस आ सकती है. वे बोले, कैसे? जरा समझाइये. मैंने कहा, अगर कोई विशेष घटना नहीं हुई, तब.

वे बोले, सर यही तो समझाइये.

मैंने कहा, सारे वाम दल एक जगह आ गए हैं, वाम मोर्चा बन गया है. अगर उसने उप्र में अपनी जबरदस्त दस्तक दे दी, तो सपा-बसपा दोनों का खेल बिगड़ जायेगा. और अगर वाम मोर्चा दस्तक नहीं दे सका, तो मैं यही कहूँगा–लूट तंत्र इज बेटर देन गुंडा तंत्र.

वे बोले, क्या मतलब?

मैंने आगे कहा, बसपा के पास गुंडे नहीं हैं, पर लुटेरे हैं,जबकि सपा के पास गुंडे और लुटेरे दोनों हैं. जनता को गुंडों से परेशानी है, लुटेरों से नहीं, इसलिए बसपा आ सकती है.

वे बोले, सर. आप यह क्या कह रहे हैं? हम लुटेरे हैं?

मैंने कहा, बसपा में मायावती के सिवा क्या कोई नेता है? अगर हो तो बताओ?

रोहित वोमिला के मामले में क्या बसपाई सड़कों पर आये? नहीं आये. क्योंकि मायावती जी का आदेश नहीं था. फिर कौन नेता हुआ?

मैंने कहा, बसपा ने दलाल पैदा किये हैं, और वे गांव गांव में हैं, ब्लाक स्तर का बसपाई भी गाड़ी और शाम का खर्चा निकाल लेटा है.

वे बोले, क्या आपने राज्य सभा में उनका भाषण नहीं सुना. उन्होंने स्मृति ईरानी की बोलती बंद कर दी.

मैंने कहा, मायावती ने दलितों को भ्रमित किया है. आप लोग बिला वजह खुश हो रहे हैं. उन्होंने सिर्फ यह सवाल उठाया था कि जाँच समिति में एक दलित को रखना चाहिए. मैं पूछता हूँ कि अगर स्मृति ईरानी दलित को रख लेंगी, तो क्या वह दलित मायावती के अनुसार काम करेगा? क्या वह भाजपा और आरएसएस का आदमी नहीं होगा?

मैंने कहा कि मायावती को हैदराबाद युनिवर्सिटी के कुलपति की बर्खास्तगी और स्मृति ईरानी के इस्तीफे की मांग करनी चाहिए थी. लेकिन उन्होंने बहुत छोटी और घटिया मांग की, और आप खुशी से उछल रहे हैं. मैं कहता हूँ कि मायावती से राजनीति करनी ही नहीं आती है.

जाने माने दलित साहित्यकार और चिंतक कंवल भारती के फेसबुक वॉल से.

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