डा. आंबेडकर को ठिकाने लगाने की आरएसएस की एक और कोशिश

Kanwal Bharti : डा. आंबेडकर को ठिकाने लगाने की आरएसएस की एक और कोशिश…  दूरदर्शन पर खबर थी, रामानुजाचार्य की जयंती पर, प्रधानमंत्री मोदीजी ने कहा है कि रामानुजाचार्य के दर्शन से डा. आंबेडकर भी प्रभावित थे. यह जुमलेबाज़ मोदी जी का झूठ नहीं है, बल्कि यह वह एजेंडा है, जिसे आरएसएस ने डा. आंबेडकर के लिए तैयार किया है. इस एजेंडे के दो बिंदु हैं, एक- डा, आंबेडकर को मुस्लिम विरोधी बनाना, और दो, डा. आंबेडकर को हिन्दूवादी बनाना. वैसे, उन्हें मुस्लिम-विरोधी बनाना भी हिन्दूवादी बनाना ही है. यह काम वो नब्बे के दशक से ही कर रहे हैं.

मायावती का खेल खत्म ही समझो : कंवल भारती

याद कीजिये मेरी 26 जनवरी की इस पोस्ट को…

”आज बसपा के एक जमीनी नेता से बात हुई, वह बहिन मायावती से बहुत नाराज दिखे. उन्होंने अपनी नाराजगी में दो सवाल तुरंत दाग दिए- 1. जब बहिन जी ने अंसारी बंधुओं को टिकट देने में कोई संकोच नहीं किया तो स्वामी प्रसाद मौर्य को तीन टिकट क्यों नही दिए, जबकि वह बीस साल से उनके साथ था? 2. मुसलमानों को 97 टिकट किस राजनीति के तहत दिए, जबकि यह स्पस्ट है कि वे मुस्लिम वोट ही डिवाइड करेंगे, और उसका लाभ भाजपा को होगा. मैंने कहा, आप कहना क्या चाहते हैं? उन्होंने जवाब दिया, बहिन जी भाजपा के दबाव में हैं. और वह अपने भाई को बचाने के लिए भाजपा की तरफ से खेल रही हैं. उन्होंने यहाँ तक कहा कि भाजपा ने सुरक्षित सीटों पर सबसे ज्यादा जाटव और चमार जाति के लोगों को ही टिकट दिए हैं. बोले, पूछो क्यों? मैंने कहा, क्यों? वह बोले, इसलिए कि बसपा का वोट डिवाइड हो, और वह कमजोर हो. मैंने कहा, फिर? वह बोले, फिर क्या, बसपा खत्म.”

बसपा के पास गुंडे नहीं हैं, पर लुटेरे हैं, जबकि सपा के पास गुंडे और लुटेरे दोनों हैं : कंवल भारती

Kanwal Bharti : क्या उत्तर प्रदेश में २०१७ में बसपा सत्ता में आ सकती है? पूछा कुछ बसपाईयों ने. मैंने कहा, अगर यही हालात रहे, जो आज हैं, और कोई विशेष घटना नहीं घटी, तो बसपा वापिस आ सकती है. वे बोले, कैसे? जरा समझाइये. मैंने कहा, अगर कोई विशेष घटना नहीं हुई, तब.

आज़म खान, रामपुर की पुलिस और दोगला चरित्र

Kanwal Bharti : कल रामपुर पुलिस ने फेसबुक पर आज़म खान के खिलाफ लिखने वाले किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। खबर है कि उसने आज़म और उसके परिवार पर कोई टिप्पणी की थी। किन्तु रामपुर पुलिस दोगली चरित्र की है।

कैंसर हो गया तो ये रुपया ही काम आएगा, कोई सगा संबंधी नहीं, इसलिए खूब भ्रष्टाचार करो, रुपया कमाओ!

Kanwal Bharti : अभी बरेली से मेरे एक मित्र ने बताया कि उनकी पत्नी को कैन्सर है और दिल्ली में राजीव नाम के एक अस्पताल में वे इलाज करा रहे हैं। अब तक 11 लाख रूपये खर्च हो चुके हैं और इलाज अभी जारी है। मुझे याद आया कि ओमप्रकाश वाल्मीकि के इलाज में कोई 22 लाख रूपये खर्चे में आये थे। फिर भी वे बच नहीं सके थे। मेरे मित्र ने बताया कि 70-70 हजार रूपये के इंजेक्शन लगते हैं, क्योंकि यहां सरकार को लकवा मार गया है। उन्होंने यह भी बताया कि करीबी लोगों ने भी मुंह मोड़ लिया है, ताकि हम उनसे पैसा न मांग लें। अब तक वे 6 लाख रूपये के कर्जदार हो चुके हैं।

डा. आंबेडकर के मिशन से भटकने वाले दलित नेताओं का यही अंजाम होना है

Kanwal Bharti : जीतनराम मांझी ने दलित राजनीति को झकझोर कर रख दिया है. उन्होंने बहुत से अनसुलझे सवालों को भी सुलझा दिया है और लोकतंत्र में दलितों की हैसियत क्या है, इसका भी आईना दिखा दिया है. दलित आखिर जाएँ तो जाएँ कहाँ? किसी भी पार्टी में उनकी इज्जत नहीं है, सिर्फ उनका उपयोग है. यह लोकतंत्र, यह धर्मनिरपेक्षता और यह समाजवाद (जो सिर्फ हवाई है) दलितों के हितों की बलि पर ही तो जिन्दा है.

सलाम मांझी! सलाम कंवल भारती!

दलित-पिछड़ों यानी मूलनिवासी की वकालत को द्विज पचा नहीं पा रहे हैं। सामाजिक मंच पर वंचित हाषिये पर तो हैं ही, अब राजनीतिक और साहित्यिक मंच पर भी खुल कर विरोध में द्विज आ रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के आर्यों के विदेशी होने के बयान से उच्च जाति वर्ग पार्टी और विचार धारा से ऊपर जाकर बौखलाहट और तीखा विरोध के साथ सामने आया तो वहीं लखनउ में कथाक्रम की संगोष्ठी ‘लेखक आलोचक, पाठक सहमति, असहमति के आधार और आयाम’, में लेखक कंवल भारती के यह कहने पर कि ‘साहित्य और इतिहास दलित विरोधी है। ब्राह्मण दृष्टि असहमति स्वीकार नहीं करती।

मोदी की मुलाकातों की तस्वीरों में भारत के एक खौफनाक भविष्य की तस्वीरें देख रहा हूं

Kanwal Bharti : अमेरिका में कारपोरेट और उनके सीईओस के साथ मोदी की मुलाकातों की तस्वीरों में मैं भारत के एक खौफनाक भविष्य की तस्वीरें देख रहा हूँ. उनमें मजदूरों के शोषण और उत्पीड़न के खतरनाक दृश्य देख रहा हूँ. गरीबी और भुखमरी से ग्रस्त लोगों के फांसी पर झूलते शरीर और उनके कंकाल देख रहा हूँ.

फेसबुक पर आज़म खान के खिलाफ पोस्ट लिखने वाले फैसल लाला को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया

Kanwal Bharti : कल आजादी की पूर्व संध्या पर फेसबुक पर आज़म खान के खिलाफ पोस्ट लिखने वाले फैसल लाला को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. उन पर आरोप है कि छ महीने पहले कुछ कांग्रेसियों ने सपाइयों के साथ मारपीट की थी, उनमें फैसल लाला भी शामिल थे.

काश, बेहमई की ठाकुर महिलाओं ने स्त्री के पक्ष में अपनी संतानों को स्त्री की इज्जत करना सिखाया होता!

कंवल भारती


Kanwal Bharti : वर्ष 2000, 3 जून का ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’. बेहमई कांड पर खबर थी–“अपर कास्ट पीपुल वांट टू टेक रिवेंज आन दलिट्स” (उच्च जातियों के लोग दलितों से बदला लेना चाहते हैं). इस खबर में कहा गया था– सवर्ण हिन्दू सिर्फ बदला चाहते हैं, और कुछ नहीं. इस खबर की रिपोर्टिंग हैदर नकवी ने की थी. एक ग्रामीण ने कहा था, ‘फूलन ने 21 को मारा था, अब हम 25 को मरेंगे’. एक ठाकुर महिला ने कहा था– ‘हाँ, बेहमई उबल रहा है. बच्चे बड़े हो गये हैं. वे किसी के बश में नहीं हैं. अगर अब वे बन्दूक से इन्साफ चाहते हैं, तो इसमें गलत क्या है?’