नई दिल्ली। दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में हड़ताल कर रहे फैक्ट्री मजदूरों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई और प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। संगठन के अनुसार, कई पत्रकारों पर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें दैनिक भास्कर के रिपोर्टर साकेत आनंद को भी चोट लगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तोड़फोड़ और आगजनी के आरोप में करीब 350 मजदूरों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 100 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। कुछ CITU नेताओं को नजरबंद किए जाने और पत्रकारों को उनसे मिलने नहीं देने की भी बात सामने आई है।
DUJ का कहना है कि करीब 45 हजार मजदूर पिछले कई दिनों से बेहतर वेतन की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं, लेकिन प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन ने लंबे समय तक उनकी मांगों को नजरअंदाज किया। 13 अप्रैल को जब मजदूरों ने सड़कों को जाम कर दिया और दिल्ली-नोएडा के बीच भारी ट्रैफिक जाम लग गया, तब जाकर इस मुद्दे ने मीडिया का ध्यान खींचा। इस दौरान कुछ वाहनों में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं।
संगठन ने यह भी कहा कि गौतम बुद्ध नगर के कई हिस्सों में मजदूरों के बीच स्वतःस्फूर्त आंदोलन का माहौल बन रहा है, जिसकी एक बड़ी वजह महंगाई, खासकर रसोई गैस की बढ़ती कीमतें हैं। इसी मुद्दे पर CITU दिल्ली-एनसीआर कमेटी और किसान सभा के नेताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि गिरफ्तार नेताओं को रिहा नहीं किया गया और मजदूरों को बातचीत में शामिल नहीं किया गया, तो व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
इस बीच, योगी आदित्यनाथ सरकार ने देर से 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि की घोषणा की है, जिसके तहत नोएडा-गाजियाबाद में अकुशल मजदूरों का न्यूनतम वेतन 13,690 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। हालांकि मजदूर हरियाणा के समान वेतनमान की मांग कर रहे हैं और कम से कम 20,000 रुपये मासिक वेतन, महीने में चार सवैतनिक छुट्टियां, ओवरटाइम का उचित भुगतान और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में कई मजदूरों को करीब 10,000 रुपये वेतन मिलता है, जो बढ़ती महंगाई के बीच पर्याप्त नहीं है। 12-12 घंटे काम और जबरन ओवरटाइम जैसी स्थितियां उनके शोषण को और बढ़ा रही हैं।
DUJ ने मांग की है कि पत्रकारों पर हमला करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और सरकार घोषित वेतन वृद्धि को सही तरीके से लागू करे। संगठन ने यह भी कहा कि नोएडा की अधिकांश फैक्ट्रियों में यूनियन नहीं हैं और यूनियन बनाने को हतोत्साहित किया जाता है, जिससे मजदूरों और प्रबंधन के बीच बातचीत मुश्किल हो जाती है।
DUJ ने प्रशासन द्वारा प्रदर्शन के लिए ‘राष्ट्रविरोधी तत्वों’ को जिम्मेदार ठहराने पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली मुद्दों—कम वेतन, खराब कामकाजी हालात और महंगाई—को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने जोर देकर कहा कि मजदूरों के अधिकारों और उचित वेतन के लिए मजबूत यूनियन व्यवस्था जरूरी है, ताकि विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से हो सके।
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