सुब्रत राय के सहारियन तिलिस्म में चौंधियाया भारतीय लोकतंत्र!

जब तिहाड़ जेल में देखा सुब्रत राय का असली चेहरा… अपने ही कर्मचारियों से ठग लिये थे सैकड़ों करोड़ रुपये..

सहारा ग्रुप के चर्चे समय-समय पर होते रहे हैं। इस ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत राय जो अपने को संस्था में अभिभावक होने का दावा करते हैं, उनके भी अनगिनत किस्से हैं। यह उनकी सियासत के क्षेत्र में मजबूत पैठ ही है कि जब मोदी सरकार सब कुछ ठीक करने का दावा करते घूम रही है वहीं यह व्यक्ति साढ़े तीन साल से पैरोल पर जेल से बाहर रहकर सत्ता और न्यापालिका को अपनी ताकत का एहसास करा रहा है। न केवल सेबी बल्कि सुप्रीम कोर्ट भी इस व्यक्ति की ताकत के आगे चुप है। सुप्रीम कोर्ट के तमाम दावे के बावजूद सहारा की एक पैसे की संपत्ति नहीं बिकी।

लोग मोदी को बातों का जादूगर कहते हैं लेकिन आप सुब्रत राय का भाषण सुन लें या फिर आपकी उनसे मुलाकात हो जाए तो आप भी उनके जादू से नहीं बच पाएंगे। सुब्रत राय के बारे में मुझे भी ऐसी ही गलतफहमी थी। जब भी सहारा ग्रुप में कुछ गलत होता तो हम लोग चेयरमैन का हवाला देते हुए कहते थे कि शायद उनकी जानकारी में नहीं होगा। उसका बड़ा कारण विभिन्न मीटिंगों में उनका अधिकारियों से ज्यादा कनिष्ठों को तवज्जो देने का दिखावा था। सहारा ग्रुप में जब कुछ लोग उनका यह नाटक करार देते तो अधिकतर लोग इस बात को मानने को तैयार नहीं होते थे। सहारा देश का पहला संस्थान होगा जहां पर किसी भी कार्यक्रम के शुरू होने से पहले भारत माता की पूजा होती है। मतलब सहारा में देशभक्ति का दिखावा सबसे अधिक है। सुब्रत राय देशभक्ति को लेकर संस्थान में इतने तामझाम कर रखे हैं कि अच्छे से अच्छा आदमी गच्चा खा जाता है।

संस्थान में जब भी कभी शोषण की बात आती या फिर निवेशकों के पैसे मारने की बात आती तो लोग यह ही समझते कि शायद चेयरमैन को को गुमराह कर अधिकारी वर्ग ऐसा कर रहे हैं। अब जब विभिन्न शहरों में सहारा में चल रहे आंदोलन में चेयरमैन को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तब भी यह व्यक्ति खुद को संस्था में सर्वोपरि करे हुए है।

सहारा देश का पहला संस्थान होगा जहां पर कर्मचारियों की समस्याएं सुनने के लिए ‘कर्त्तव्य काउंसिल’ का गठन किया गया था। हालांकि इस काउंसिल से कभी किसी कर्मचारी को कोई न्याय नहीं मिला। उल्टे जब कोई कर्मचारी काउंसिल में जाता तो उसका शोषण और बढ़ जाता था। उसकी वजह यह थी कि संबंधित अधिकारी को उसकी शिकायत का पता काउंसिल के माध्यम से ही चल जाता था।

व्यक्तिगत रूप से मैंने चेयरमैन का असली चेहरा तिहाड़ जेल में उस समय देखा जब हम सहारा में कई महीने से वेतन न मिलने पर आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन की अगुआई करने वाले हम 12 साथी उनसे तिहाड़ जेल में जाकर मिले थे। पहले तो उन्होंने धमकी देने के लहजे में कहा – ‘सहारा में एक ही नेता है और वह मैं हूं’। दूसरे जब मैंने उनसे विस्तार से बात की तो वह किसी भी अपनी बात पर न टिकते हुए प्रतीत हुए।

मैंने उनसे पूछा कि ‘सेबी को 500 करोड़ रुपये देने हैं, और आपके जेल से छुड़ाने के नाम पर लिखे पत्र पर साढ़े 1200 करोड़ रुपये संस्था से इकट्ठा होने की बात सामने आ रही है।’ चेयरमैन सुब्रत राय का जवाब था कि उन्हें पैराबैंकिंग के किसी मद में पैसे जमा करने थे तो उन्हें इस तरह का पत्र लिखना पड़ा। मतलब सुब्रत राय ने जेल से छुड़ाने के नाम पर अपने ही कर्मचारियों से सैकड़ों रुपये ठग लिये थे। इतना ही नहीं, कारिगल के नाम पर, 2003 में गुजरात में आए भूकंप के नाम पर, सहारा वेलफेयर के नाम, सहारा परिवार की मैगजीन के नाम पर यह व्यक्ति अपने ही कर्मचारियों को ठगता रहा है। जनता को कितना ठगा होगा, बताने की जरूरत नहीं है।

दरअसल सेबी मामले में हुए विवाद के चलते जब सुब्रत राय तिहाड़ जेल गये तो उन्होंने अपने को जेल से छुड़ाने के नाम पर आर्थिक मदद के लिए एक पत्र संस्था के अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखा था। सहारा में कर्मचारी सुब्रत राय के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। यह पत्र तब लिखा गया था जब सहारा मीडिया में 3-4 महीने से वेतन नहीं मिला था। किसी ने अपना पेट काटकर, किसी ने कर्जा लेकर, किसी ने जेवर बेचकर, जिससे जो बना, संस्था में पैसे जमा कराए। बताया जाता है चेयरमैन के इस पत्र पर संस्था में साढ़े 12 सौ करोड़ रुपये जमा हुए थे।

तिहाड़ जेल में हुई सुब्रत राय से बातचीत में जब हम लोगों ने वेतन न मिलने की बात कही तो उन्होंने सहारा मीडिया के घाटे में चलने की बात कही। उनका कहना था कि वह तो इसे बंद कर देते पर कर्मचारियों की वजह से घाटा झेल रहे हैं।

सहारा मीडिया में घाटे की बात पर जब मैंने कहा कि सहारा मीडिया का जो व्यक्ति 20 साल पहले नेतृत्व कर रहे थे, वही नेतृत्व आज भी है क्यों? यदि मीडिया घाटे में चल रहा है तो यह नेतृत्व क्यों नहीं हटाया गया? इन लोगों के लिए संस्थान वेतन लगातार क्यों बढ़ाता गया है। जो अधिकारी 10-15 हजार रुपये लेते थे वे 3-4 लाख रुपये प्रति माह क्यों ले रहे हैं?

इस पर चेयरमैन ने कहा कि हर वर्ष वेतन वृद्धि होती है। मैंने कहा कि हां किसी के 100 सौ रुपये बढ़ते हैं और किसी के पांच हजार। कुल मिलाकर बहुत लंबी बातें सुब्रत राय से हुई। अंत में उन्होंने कहा कि मेरे पास कुछ भी नहीं है। मेरा सिर काटकर ले जाओ। मतलब जिस व्यक्ति ने अपने को जेल से छुड़ाने के नाम पर अपने ही कर्मचारियों से सैकड़ों करोड़ रुपये ठग लिये थे, उसके पास उन कर्मचारियों को देने के लिए कुछ नहीं था। यह मीटिंग हम लोगों की चेयरमैन से तब हुई थी जब 6-7 महीने का बकाया वेतन सहारा मीडिया के कर्मचारियों का संस्था पर था। उसी समय नोएडा में सहारा कैंपस से डेढ़ सौ करोड़ रुपये इनकम टैक्स विभाग ने जब्त किया था। मतलब कैंपस में पैसा पड़ा था पर कर्मचारियों को नहीं दिया जा रहा था। मेरी समझ में आ गया था कि सहारा में हो रहे हर शोषण, हर गलत काम और वेतन न देने की प्रबंधन की नीति के असली सूत्रधार चेयरमैन सुब्रत राय ही हैं।

लेखक चरण सिंह राजपूत लंबे समय तक सहारा ग्रुप से जुड़े रहे हैं. उनसे संपर्क charansraj12@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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Comments on “सुब्रत राय के सहारियन तिलिस्म में चौंधियाया भारतीय लोकतंत्र!

  • दिनेश शर्मा, सागानेर, जयपुर, राजस्थान । मो०न०-9314520334 says:

    सहारा ईडिया कमपनी के नाम से चल रहै सभी सहारा आफिसो पर बलेक-मेल कर आम जनता का रूपया री-ईनवेसट किया जा रहा है। अन्य सकियो में। हमारी फेमली का काफी समय 2012 से रूपया कमपनी के पास है। हम पर भी आज भी कमपनी आफिस दवारा री-ईनवेसट के लिए दबाव बनाया जा रहा है। एक साल होने वाला है कहा जा रहा कि कमपनी दवारा रूपया देने के लिए मना किया है

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  • Hamare Purane sarkaro ne bhi kitne Ghotale kiye hai…..wo bhi khoj lo….inhone ek Galti ki….sare piche pad gye…..hajaro logo ka ghar to is company ne Sawara hai to wo to kabhi nahi likha…..har saal 101 gareebo ki Shadi krwate hai……gareebo ki help karte hai….. Kitne villages ka kharch utha rkha h….ye bhi kabhi likh do…… Positive kuch mat btana….. Sare k sare negative Dekho bas

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  • देव जी says:

    सहारा इंडिया ने Qshop का पैसा हड़पा इसका काफी जमीन है सरकार इसका जमीन हद्दपा ,नीवेस्को का पैसा नहीं देने का फेरा में है सरकार बड़ी बड़ी बाते करता है। इसका मतलब सरकार सुब्रत से पैसा खा रहा है।कानून में पैरोल कितने दिनों का होता है,उधर सेबी सहारा का पैसा लेकर कहा लौटा रहा है वह भी बाकी पैसा हड़पने का फर है जब सरकार और सरकार के संस्था भी हड़पने का चक्र में है तो सुब्रत को क्या कहे।

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  • देव सिंह says:

    गरीबों के मसीहा कहलाने वाले मोदी जी जब निवेशकों का पैसा नहीं दिला सकते तो क्या कर सकते,मोदी को घर से पैसा थोड़े देना है कंपनी का जमीन है यदि कंपनी चोर होती तो जमीन में पैसा नहीं लगता कंपनी हर साल ऑडिट होता था क्या ऑडिट करने वाले घूसखोर थे,सरकार ने गरीबों का पैसा हरापा कंपनी ने ६ महीना में पैसा नहीं लौटाया तो कंपनी बंद और सेबी ५ साल में भी नहीं कुछ कर सका तो कोर्ट सेनी को क्या कर लेगी अर्थात चोर चोर मौसेरे भाई ,

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  • Vy sab ko pranam. Sebi aaj tak jitni vi company ka property seize kiya kya woo paisa kisi ko lautaya. Akhir wo paisa kahan hai. Kya yeh govt. Ka paisa hai?? Nehain ye logo ka paisa hai. Woo paisa kaha gaya…? Explanation dijiye.. Jab sahara kuch kar t hai to itna kyun khatak ta hai…. Mera kehena yehi hai ki aap log sahara ko kaam karne ka ek road map dijiye sirf 2 saal tak agar yeh government ka sunta nehain ya kuch galat karta hai to turant iska property seize kiya jae aur logo ko return kiya jae. Sayad aap ko malum nehain ketne field au office wale besahara ho jayenge. Agar ho te hain kya sebi ya govt inka kuch dushre sector pe post karega..? Usmain field ya office staff ka kya kasoor……

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