नीरेंद्र नागर-
तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में ऐक्टर विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है। उनकी इस चमत्कारी जीत की ख़बरें हिंदी मीडिया में भी आईं। वैसे ऐक्टर विजय की ख़बरें पहले भी हिंदी मीडिया में छप रही थीं, ख़ासकर जब उनकी एक विशाल रैली में हुई भगदड़ में कई जानें गईं, उसके बाद से हिंदी मीडिया में वह चर्चा का विषय बने हुए थे।
आपने ध्यान दिया होगा कि ऐक्टर विजय के नाम के आगे एक शब्द लगता है Thalapathy. हिंदी में भी उनके नाम के आगे यह शब्द लगाया जाता है लेकिन उसकी स्पेलिंग में एकरूपता नहीं है। हिंदी में इसे मुख्यतः दो तरह से लिखा जा रहा है।
- थलपति – जागरण, आजतक, नवभारत टाइम्स, ABP News
- थलापति – भास्कर, News18, NDTV हिंदी
NDTV की एक ख़बर में मुझे तलपति भी दिखा। सही क्या है?
अगर स्रोत, अर्थ और संस्कृत उच्चारण के हिसाब से तय करें तो सही है दलपति। तमिल में इसका उच्चारण होता है तलपति।
अब आप सोच रहे होंगे कि जब शब्द दलपति है तो तमिल में उसे तलपति क्यों लिखा जाता है। क्या तमिल में ‘द’ की ध्वनि नहीं है?
बिल्कुल है। लेकिन तमिल वर्णमाला में ‘त’ और ‘द’ के लिए एक ही लेटर है – த जिसका उच्चारण ‘त’ भी हो सकता है, ‘द’ भी।
नियम यह है कि த (त/द) अगर शब्द के शुरू में हो तो उच्चारण होता है ‘त’, बीच में हो तो उच्चारण होता है ‘द’ और अंत में हो, तब भी उच्चारण ‘द’ होता है अगर उसके पहले और बाद में स्वर हों।
तलपति की तमिल स्पेलिंग (தளபதி) पर ध्यान दें। इसमें शुरू और अंत में एक ही लेटर (த) है।
ऊपर बताए गए नियमानुसार
- शुरू में आने वाले த का उच्चारण ‘त’ होना चाहिए। हो भी रहा है।
- लेकिन अंत में जो தி है, उसका उच्चारण ऊपर बताए गए नियम के अनुसार ‘द’ होना चाहिए
(क्योंकि यहाँ वह दो स्वरों – अ और इ के बीच में है) लेकिन अपवाद के तौर पर उच्चारण होता है ‘त’। बोला जाएगा ‘पति’।
कारण यह कि कि ‘पति’ शब्द संस्कृत से आया है। इसलिए ‘पति’ के संस्कृत उच्चारण से मेल बिठाने के लिए தளபதி (तलपति) का उच्चारण भी तलपदि के बजाय तलपति किया जाता है।
अब आप पूछ सकते हैं कि जब इसका उच्चारण तलपति है तो उसे रोमन में Thalapathy/Thalapathi क्यों लिखा जाता है यानी ‘त’ के लिए TH क्यों लिखा जाता है।
कारण साफ़ है। अंग्रेज़ी में ‘त’ लिखने के लिए कोई लेटर तो है नहीं। एक T है, जिसका प्रयोग करके हम हिंदी वाले ‘त’ और ‘ट’ दोनों लिखते हैं – Tiwari (तिवारी) भी और Bhatt (भट्ट) भी। लेकिन दक्षिण के राज्यों में ‘त’ के लिए TH का प्रयोग होता है। इसीलिए निर्मला सीतारमण के नाम की रोमन स्पेलिंग में TH है – Sitharaman।
अब अंतिम प्रश्न कि इसे तलपति लिखना सही है या दलपति।
इसका जवाब ऐक्टर विजय के नाम में छुपा हुआ है कि उसे हम कैसे लिखना पसंद करेंगे। उनका पूरा नाम है Chandrasekaran Joseph Vijay.
ध्यान दीजिए, यह Chandrasekaran (चंद्रसेकरन) है, Chandrashekharan नहीं क्योंकि तमिल में पारंपरिक रूप से ‘श’ और ‘ख’ की ध्वनियां नहीं है। ‘फ़’ भी नहीं है, इसलिए Joseph को भी जोसप बोला जाता है।
ऐसे में क्या हम उनका नाम चंद्रसेकरन जोसप विजय लिखना चाहेंगे?
शायद नहीं। हम चंद्रसेकरन को चंद्रशेखऱन लिखेंगे और जोसप को जोसफ़।
अगर ऐसा है तो तलपति को भी दलपति क्यों नहीं लिखना चाहिए जो कि उसका मूल संस्कृत उच्चारण है? चंद्रशेखरन के मामले में संस्कृत उच्चारण लेकिन दलपति के मामले में तमिल उच्चारण! यह तो दोहरी नीति हो गई।
जाते-जाते एक और जानकारी। ऐक्टर विजय की पार्टी TVK का पूरा नाम है – Tamilaga Vettri Kazhagam जिसको हिंदी में लिखा जाएगा तमिलग वेट्रि कड़गम। इसे हिंदी मीडिया में कई जगह वेत्री लिखा जा रहा है लेकिन यह ग़लत है।
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पीयूष सक्सेना
May 5, 2026 at 12:39 pm
आदरणीय नागर जी,
सादर नमस्कार।
अत्यंत ज्ञानवर्धक । विशेषतः तमिल ध्वन्यात्मकता, संस्कृत मूल और रोमन ट्रांसलिटरेशन के बीच आपने जो सेतु बनाया, वह दुर्लभ स्पष्टता के साथ प्रस्तुत हुआ है।
इसी संदर्भ में एक छोटी-सी जिज्ञासा निवेदनपूर्वक रखना चाहता हूँ। आपने ‘Thalapathy’ के स्रोत, उच्चारण-नियम और संभावित रूपों ‘तलपति’ तथा ‘दलपति’ दोनों पर विस्तार से प्रकाश डाला है। साथ ही, चंद्रशेखरन/चंद्रसेकरन जैसे उदाहरण देकर यह भी संकेत किया कि व्यवहार में हम अक्सर संस्कृतनिष्ठ रूप को वरीयता देते हैं।
लेकिन, यदि एकरूपता को मानक माना जाए तो हिंदी लेखन और उच्चारण में हमें अंतिम रूप से किसे स्वीकार करना चाहिए—‘तलपति’ या ‘दलपति’?
व्यावहारिक पत्रकारिता और शुद्ध भाषिक दृष्टि, इन दोनों के संतुलन में आपका स्पष्ट निष्कर्ष क्या होगा?
आपका मार्गदर्शन की अपेक्षा है।
सादर