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सियासत

तमिल राजनीति में जोसेफ विजय की पार्टी ने जो कमाल किया है वो इतिहास में याद रखा जाएगा!

विवेक शुक्ला-

आज का दिन तमिलनाडू की राजनीति के इतिहास में याद रखा जाएगा। अभिनेता-राजनेता जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) सरकार बनाने की तरफ बढ़ रही है। डीएमके तीसरे स्थान पर सिमट गई है, जबकि एआईएडीएमके दूसरे पर। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन खुद कोलाथुर सीट पर पिछड़ रहे हैं। यह महज एक नई पार्टी की शुरुआती सफलता नहीं, बल्कि द्रविड़ पार्टियों के लंबे वर्चस्व का अंत माना जा सकता है।

टीवीके की यह शानदार सफलता संयोग नहीं। पार्टी की स्थापना 2024 में हुई थी। विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक ‘थलापति’ कहते हैं, ने राजनीति में कदम रखते ही साफ संदेश दिया-भ्रष्टाचार मुक्त तमिलनाडु, नशा मुक्त राज्य, युवाओं और महिलाओं का सशक्तिकरण। उन्होंने द्रविड़ दलों के पारंपरिक ‘उत्तर vs दक्षिण’ विभाजन से ऊपर उठकर विकास, शिक्षा और रोजगार पर फोकस किया।

टीवीके की इस सफलता का एक और गहरा आयाम है-डीएमके की नीतिगत और वैचारिक विफलता। क्या स्टालिन सरकार ने अपने शासनकाल में हिंदू विरोध और हिंदी विरोध को अपनी पहचान बना लिया था? 2023 में उदयनिधि स्टालिन ने ‘सनातन धर्म’ को मच्छर, डेंगू और कोविड की तरह ‘समाप्त’ करने की बात कही थी। उन्होंने इसे ‘दमनकारी व्यवस्था’ बताया। डीएमके ने इस बयान से दूरी नहीं बनाई, बल्कि इसे सनातन के खिलाफ अपनी पुरानी द्रविड़ आंदोलन की विरासत से जोड़ा।

बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने इसे ‘हिंदू विरोध’ का प्रतीक बना दिया। तमिलनाडु की हिंदू बहुल आबादी, खासकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं ने इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान पर हमला माना।

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