टीवी मीडिया ने युद्ध की दहलीज पर भी मुनाफा खोज लिया है। बताया जा रहा है कि झूठमूठ का युद्ध गढ़ रहे टीवी चैनलों ने अपने विज्ञापनों का रेट कई गुना बढ़ा दिया है। इसी तरह की कल एक खबर आई जिसमें ऑपरेशन सिंदूर का नाम रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश की गई। मामले ने तूल पकड़ा तो आनन-फानन में रिलायंस की तरफ से आवेदन कैंसिल कराया गया। नीचे पढ़ें…
गौरव शर्मा-
आजतक ने कराची तबाह कर दिया. और…
- जी न्यूज ने इस्लामाबाद पर कब्जा करा दिया
- न्यूज 18 ने युद्ध शुरू करा दिया, फिर कराची- इस्लामाबाद पर चढ़ाई करा दी
- रिपब्लिक टीवी ने असीम मुनीर गिरफ्तार करा दिया, शहबाज शरीफ बंकर में छिपा दिया
- सुदर्शन न्यूज चैनल ने पूरे पाकिस्तान को ही खत्म करा दिया
मनदीप पुनिया-
अजीब बात यह है कि दोनों देश इस बात से इनकार कर रहे हैं कि वे एक-दूसरे के साथ युद्ध में हैं, जबकि उनके नेता और प्रचारक मीडिया जनता को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि युद्ध चल रहा है और वे जीत रहे हैं.
ऐसा लग रहा था कि कल की रात तो क़यामत की रात है. ट्विटर और टीवी चैनलों ने पच्चासों हमले गिनवा दिए थे. पत्रकार अपनी ट्वीटर पोस्टों के नीचे लिख रहे थे – “This is not an act of war, this is war.”
टारगेट की जगह सीधा तबाह लिख रहे थे. शहरों तक ड्रोन पहुँचने को क़ब्ज़ा लिख रहे थे.
कोई किसी मुल्क का आर्मी चीफ गिरफ़्तार करवा रहा था तो कोई राजधानियों पर क़ब्ज़ा। ताजा-ताजा वॉर जर्नलिस्ट बने पुरानी फोटोज़ और वीडियोज़ शेयर कर रहे थे.
कोई फ़ाइटर पायलटों का क़ब्ज़े में बता रहे थे. नागरिकों को यकीन करने में लगा दिया था कि युद्ध शुरू हो चुका है.
मिलिट्री ऑपरेशन को युद्ध लिखने का नया प्रचलन शुरू हो चुका है. कई पत्रकार अपने चैनल की रीच बढ़ाने और व्यूअरशिप बढ़ाकर चंद डॉलर कमाने के लिए यह सब कर रहे.
इस घटिया समय में अपने आपको प्रोग्रेसिव कहने वाले एक्टिविस्ट या पत्रकार जो घटिया हरकते कर रहे हैं, उनको भी याद रखने की जरूरत है. खैर, इन सबका रब ही राखा!
प्रशांत कनौजिया-
जो बात आर्मी, RAW और खुफिया एजेंसी को भी नहीं पता वो नोएडा से बाहर न जाने वाले न्यूज चैनलों को पता है? वाह फेक न्यूज फैलाओ और महंगा विज्ञापन पाओ। जो विज्ञापन परसो तक 3000 में बिकता था आज का रेट 25000-50000 कर दिया गया है।
सेना के जवानों के लिए यह जंग भावना है पर टीवी न्यूज चैनल के लिए व्यापार।

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