उमेश कुमार-
प्रणव सिंह बिना खेले मेले से मेडल ख़रीदकर बने चैंपियन। अहंकार तो इस दुनिया में कभी किसी का नहीं रहा। क्या कह रहा था लोकसभा चुनाव में कि तूने मुझे खानपुर विधानसभा में 300% वोट से हराया?
देख अपनी हालत मुझे तरस आ रहा है तुझ पर, लंधोरा की गली-गली में उठक-बैठक लगाकर भीख मांगने के बाद भी तुझे किसी ने वोट नहीं दिया। तेरा प्रत्याशी जिसके लिए तूने ये तक कहा कि ये प्रत्याशी का नहीं तेरा चुनाव है उसके बावजूद चौथे नंबर पर रहा।
एक कस्बे में तेरी हालत दो कौड़ी की हो गई बात करता है विधानसभा की। मैंने उस दिन भी कहा था कि लोकसभा चुनाव मोदी जी और राहुल गांधी जी का चुनाव था और ऐसे चुनाव में मुझे एक लाख वोट मिले। अब सुन, तुझे बहुत गलतफहमी है ना अपने बारे में?
2027 का चुनाव निर्दलीय लड़ना और मैं भी निर्दलीय लड़ूँगा कौन कितने पानी में है हैसियत पता चल जाएगी। और आख़िरी बात ये जो फ़ेसबुक पर बार-बार लिखता है ना कि अपनी मर्सिडीज की छत पर खड़े होकर हमने ये किया वो किया, एक कहावत है कौवा चला हंस की चाल अपनी भी भूल गया, वही हाल तेरा है।
मेरी रेस करने के चक्कर में 2013 मॉडल की कार ले आया जो दिल्ली में डिरेजिस्टर यानी दिल्ली आरटीओ से डीजल वाहन होने के कारण हटा दी गई है और अब स्क्रैप होनी है और अगर किसी अन्य राज्य में बेचेंगे भी तो 5-7 लाख से ऊपर नहीं मिलेंगे।


अब देख ले जो कार कबाड़ी को जानी है वो तू लेकर घूम रहा है, और हाँ, इंश्योरेंस भी एक्सपायर्ड है इसका। जमीन पर रहना सीख, अहंकार छोड़ गरीबों की मदद कर और सरल बनना सीख, बाकी मेरी होड़ तेरे बस की बात नहीं, जितने का तेरे पास सारा तामझाम है इतने का इंश्योरेंस भरता हूँ अपनी सारी गाड़ियों का हर साल।
आखरी बात, इस बार बरसात के बाद हवेली की पुताई करा लेना। और कुछ सीख भी लेना मुझसे, प्रणव सिंह निकाय चुनाव स्थानीय प्रतिनिधियों के चुनाव होते हैं इनमें विधायकों को बहुत मुंह नहीं मारना चाहिए। मैं पूरे चुनाव में एक भी दिन लंढोरा नहीं गया।



