वरिष्ठ पत्रकार और लेखक विष्णु त्रिपाठी जी का आज सोमवार को निधन हो गया। कानपुर की पत्रकारिता से ताल्लुक रखने वाले तमाम पत्रकारों ने दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। अंतिम संस्कार कल मंगलवार सुबह होने की सूचना है….
शंभुनाथ शुक्ला-
कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी के बाद पत्रकारिता की परंपरा को ज़िंदा करने वाले विष्णु त्रिपाठी (विष्णु जी) नहीं रहे। वे अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। वे कानपुर के सामाजिक जीवन की हर महीन से महीन बात को समझते थे।
मेरा उनसे 50 वर्ष पुराना परिचय था। उनकी मृत्यु की सूचना साथी Shailesh Awasthi ने दी है। उन्होंने लिखा है- “पत्रकारिता को धर्म मानने वाले वरिष्ठ पत्रकार कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष 80 वर्षीय विष्णु त्रिपाठी का सोमवार दोपहर एक निजी अस्पताल के आईसीयू में निधन हो गया। वे पिछले 16 दिनों से मौत से संघर्ष कर रहे थे।
पत्रकारों और लोकहित के लिए आजीवन संघर्षरत रहे विष्णु त्रिपाठी ने कई में संपादकीय दायित्वों का निर्वहन किया। वह पत्रकारिता को जीते थे। वह निडर, निष्पक्ष और निरंतरता के प्रतीक बनकर जिये। ज़ब कभी सिद्धांत आड़े आए, उस अखबार से किनारा कर लिया और काबिलियत ऐसी कि तत्काल पत्रकारिता का दूसरा ठौर हासिल कर लिया। पत्रकारों के हित के लिए जूझे, संघर्ष किया, अभाव में रहे, लेकिन अपना स्वभाव बिल्कुल नहीं बदला। स्वाभिमान और पत्रकारिता धर्म निभाने के आड़े अगर नौकरी पर भी बन आई तो विचलित नहीं हुए।
वह गणेश शंकर विधार्थी के पक्के अनुयायी और पत्रकारिता के योद्धा थे। उन्होंने शुरुआत नॉर्दर्न इंडिया पत्रिका से की थी। इसके बाद विश्वमित्र, जागरण, आज, स्वतंत्र भारत और अमर उजाला में भी काम किया। वह यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष,कानपुर प्रेस क्लब के तीन बार अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य प्रेस मान्यता समिति के तीन बार सदस्य रहे। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ गाइड्स में रहे। कानपुर विश्वविद्यालय पत्रकारिता संकाय की पाठ्यक्रम समिति के सदस्य रहे। वे भारतीय विद्या भवन के कानपुर केंद्र के कार्यकारी निदेशक रहे और उन्होंने पत्रकारिता शिक्षण का कार्य भी किया।
उन्होंने किस्सा कचहरी, बहती गंगा, बाल कृष्ण शर्मा नवीन, मध्य उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता का इतिहास पुस्तक का लेखन किया और पत्रकारिता प्रदीप प्रताप पुस्तक का संपादन व गणेश शंकर विद्यार्थी ग्रंथ के संपादन में निर्देशक की भूमिका निभाई।विष्णु त्रिपाठी ने गणेश शंकर विद्यार्थी के अखबार प्रताप के 100 वर्ष होने पर साल 2013 में प्रताप शताब्दी समारोह समिति का गठन किया और पूरे वर्ष कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई। जिसमें पूरे देश भर से वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों ने शिरकत की और पूरे भारत में इन कार्यक्रमों की चर्चा रही। उन्हें हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में महारथ हासिल थी।
दुर्गेंद्र चौहान-
पत्रकारिता को धर्म मानने वाले वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, सम्पादक विष्णु त्रिपाठी का सोमवार दोपहर एक निजी अस्पताल के आईसीयू में निधन हो गया। वे पिछले 16 दिनों से मौत से संघर्ष कर रहे थे।
पत्रकारों और लोकहित के लिए आजीवन संघर्षरत रहे विष्णु त्रिपाठी ने कई समाचारपत्रों में संपादकीय दायित्वों का निर्वहन किया। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने नॉर्दर्न इंडिया पत्रिका से की थी। इसके बाद उन्होंने दैनिक विश्वमित्र और फिर दैनिक जागरण में बतौर साहित्य सम्पादक काम किया। आज, स्वतंत्र भारत और अमर उजाला में भी संपादकीय दायित्व संभाले।
विष्णु त्रिपाठी यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष,कानपुर प्रेस क्लब के तीन बार अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य प्रेस मान्यता समिति के तीन बार सदस्य रहे। इसके साथ ही वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ गाइड्स में रहे। कानपुर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता संकाय की पाठ्यक्रम समिति के सदस्य रहे। वे भारतीय विद्या भवन के कानपुर केंद्र के कार्यकारी निदेशक रहे और उन्होंने पत्रकारिता शिक्षण का कार्य भी किया।

उन्होंने किस्सा कचहरी, बहती गंगा, बाल कृष्ण शर्मा नवीन, मध्य उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता का इतिहास पुस्तक का लेखन किया और पत्रकारिता प्रदीप प्रताप पुस्तक का संपादन व गणेश शंकर विद्यार्थी ग्रंथ के संपादन में निर्देशक की भूमिका निभाई।
विष्णु त्रिपाठी ने गणेश शंकर विद्यार्थी के अखबार प्रताप के 100 वर्ष होने पर साल 2013 में प्रताप शताब्दी समारोह समिति का गठन किया और पूरे वर्ष कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई। जिसमें पूरे देश भर से वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों ने शिरकत की और पूरे भारत में इन कार्यक्रमों की चर्चा रही।
वर्तमान में विष्णु त्रिपाठी समाचारपत्रों और पत्रिकाओं के देश में इकलौते संग्रहालय भोपाल स्थित माधवराव सप्रे संग्रहालय के सलाहकार थे। विष्णु त्रिपाठी को हिन्दी, ऊर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में महारत हासिल थी।
महेश शर्मा-
गणेश शंकर विद्यार्थी पर बहुत काम कर गए विष्णु दादा
हिंदी पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी का जाना बहुत दु:खद रहा। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे शांतनु त्रिपाठी ने की। हालांकि वह लीडिंग अखबारों में रहते हुए सत्ताधीशों और नौकरशाहों को अपने कलम कुल्हाडों से वाकिफ़ कराते रहे, जो नौसिखुओं पत्रकारों के लिए बहुत उपयोगी हुआ करता था।
विष्णु दादा जिस प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद होते थे, मैं वहां बिना एसाइनमेन्ट के भी सिर्फ इसलिए चला जाता था कि विष्णु दादा क्या सवाल पूछते हैं? यकीन मानिए तीखे तेवर की पत्रकारिता उन्हीं से सीखी।
हां एक बात वह जोर देकर कहते थे, ‘बेटा होमवर्क करके जाया करो। सबसे भारी पड़ोगे। प्रेसक्लब के वह तीन या चार बार अध्यक्ष रहे। उनका गणेश शंकर विद्यार्थी जी की पत्रकारिता और उनके अखबार प्रताप पर उलेखनीय कार्य रहा।
विद्यार्थी जी प्रताप अखबार के शताब्दी वर्ष (2012) पर पूरे साल भर तक कुछ न कुछ आयोजन उनकी देखरेख में होते रहे। एक पुस्तक भी प्रकाशित की उन्होंने। इसके बाद अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी पर ग्रन्थ के दो वॉल्यूम छपवाए। यह कार्य वरिष्ठ पत्रकार एडवोकेट तिलक जी के निर्देशन में हुआ। कार्यकारी संपादक थे रामकिशोर वाजपेयी।
उनके लेखों का संकलन बहती गंगा, कछहरी, बालकृष्ण शर्मा नवीन की जीवनी पर पुस्तक छपी।
वरिष्ठ पत्रकार-लेखक-संपादक और मेरे पिता श्री विष्णु त्रिपाठी जी का निधन हो गया है। – शांतनु त्रिपाठी, पत्रकार
अखिलेश शुक्ला-
यह जानकर अत्यन्त संवेदना हुई है कि वरिष्ठ पत्रकार, सम्पादक, लेखक, पत्रकारिता जगत के मूर्धन्य हमारे परम मित्र श्री विष्णु त्रिपाठी का आज देहावसान हो गया है। उनका सम्पूर्ण जीवन सभी के लिए भलाई व परोपकार से परिपूर्ण रहा है। उनके निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है जिसकी प्रतिपूर्ति निकट भविष्य में असम्भव प्रतीत होती है। हमारी संवेदनाएं सदैव उनके परिवार के साथ हैं।
हम दिवंगत आत्मा को शान्ति व शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय आघात को सहन करने की शक्ति, सामर्थ्य, धैर्य व साहस प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। श्री त्रिपाठी के निधन से हम अत्यन्त स्तब्ध व दुखी हैं। उनके जीवन के अनेक संस्मरण स्मृतियों में हमेशा रहेंगे।
सादर श्रद्धांजलि… ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॐ
सुहैल खान-
पत्रकारिता के एक स्वर्णिम युग का अंत… वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और महान समाजसेवी शख्सियत आदरणीय विष्णु त्रिपाठी सर का आज निधन हो गया। उनके पत्रकार पुत्र शांतनु त्रिपाठी और उनके सभी घरवालों के इस असहनीय दुख में हम सभी शामिल हैं। हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी के प्रकांड विद्वान आदरणीय त्रिपाठी जी के शिष्यों में देश के कई बड़े पत्रकार और संपादक हैं। उनका संघर्ष और आमजन से उनका जुड़ाव और व्यवहार कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। विनम्र श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह 10 बजे उनके पत्रकार पुरम स्थित निजी आवास से भैरव घाट के लिए प्रस्थान करेगी।
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