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सुख-दुख

कोर्ट खुद संज्ञान लेकर यादव सिंह और उसकी पत्नी को कठोर दंड दे और नजीर कायम करे

प्रिय यशवंत भाई,  पिछले कई महीनों से लिखने की सोच रहा था लेकिन काम की व्यस्तता के कारण लिख नहीं पाया और कई बार टाइम होने के बाद भी लिखने का मन नहीं किया क्योंकि सरकार, कर्मचारी, अफसर, राजनेता सब इतने ढीठ हो गए हैं कि तुम उनको कितना भी सुनाते रहो, लिखते रहो उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती क्योंकि वो करते वहीं हैं जो उनको करना है क्योंकि उनको पता है कि भारत का कानून इतना लचीला है कि उनका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।

प्रिय यशवंत भाई,  पिछले कई महीनों से लिखने की सोच रहा था लेकिन काम की व्यस्तता के कारण लिख नहीं पाया और कई बार टाइम होने के बाद भी लिखने का मन नहीं किया क्योंकि सरकार, कर्मचारी, अफसर, राजनेता सब इतने ढीठ हो गए हैं कि तुम उनको कितना भी सुनाते रहो, लिखते रहो उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती क्योंकि वो करते वहीं हैं जो उनको करना है क्योंकि उनको पता है कि भारत का कानून इतना लचीला है कि उनका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।

सजा के नाम पर क्या – नौकरी से सस्पेंशन, 2-4 दिन की पुलिस कस्टैडी, फिर अदालत में पेशी, 10 दिन बाद वेल और फिर तारीख पर तारीख चाहे जुर्म कितना ही संगीन हो। अब एक ताजा उदाहरण यूपी के नोएडा प्राधिकरम से जुड़े करप्शन में पकड़े गए चीफ इंजीनियर यादव सिंह को ही लीजिए।

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उनके यहां हजार करोड़ की बेनाम संपत्ति मिली है। अब ये संपत्ति उनके बाप दादा तो छोडकर गए नहीं और सरकारी सेवा में रहते हुए उनको इतनी सैलरी मिली नहीं तो फिर साफ जाहिर है ये दौलत उन्होंने अपने पद का दुरूपयोग करके, सरकारी संपत्ति की खरीद फरोक्त में धोखाधड़ी करके, गरीबों का खून चूसकर ही कमाई होगी तो फिर अदालत किस बात का इंतजार कर रही है। उसको और क्या सबूत चाहिए सजा देने के लिए।

जब सब कुछ सामने है तो अदालत को स्वयं संज्ञान लेकर, खुद कार्यवाही करते हुए इस बेईमान अफसर पर राजद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए और साथ में उसकी पत्नी को भी सजा देना चाहिए क्योंकि उसने भी भ्रष्टाचार में अपने पति का बराबर का साथ दिया। इस मामले में अदालत को स्वयं संज्ञान लेते हुए एक नजीर पेश करनी चाहिए और अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए ताकि आगे से भ्रष्टाचार करने से पहले अफसर दस बार सोचे।

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लेखक रामवीर सिंह नैबाड़ा पिछले छह साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे पंजाब केसरी, मीडिया चक्र न्यूज एजेंसी और ईटीवी राजस्थान और सुनहरा राजस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में सिंगापुर में प्रोक्यूरमेंट आफिसर के पद पर कार्यरत हैं। इनसे संपर्क [email protected] या मोबाइल नंबर +65–83094188 के जरिए किया जा सकता है।

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0 Comments

  1. santosh singh

    December 2, 2014 at 2:07 pm

    yadaw singh ko bina koi sabut ke unki sare sampati ko japt kar ke sabse kathor saja milni chahia.lekin asa hoga nahi kyoki kanoon keval chote log ke lia hai.DSP ko to sabse kade kanun ke taht saja honi chahia.lekin DSP ko bhi kuch nahi hoga.kyoki sarkar ke DSP hai…..SAB KUCH BHAGWAN BHAROSE……AAM JANTA KHAFI PRESAN HAMESA THI AUR RAHEGI….ISKA SAMADHAN AAM LOG KA KANOON.

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