यादव सिंह को पद से हटाने, आयकर के सहयोग से जांच की मांग

लखनऊ : यादव सिंह की पत्नी की कंपनियों और उनके घर पर पड़े आयकर छापों के मद्देनज़र मैंने आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिख कर श्री सिंह को तत्काल नॉएडा सहित सभी विकास प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर पद से हटाने की मांग की है. मैंने कहा है कि छापों से स्थापित हो गया है कि उनकी पत्नी का एक मुख्य काम बोगस शेयर होल्डिंग के जरिये शेल कंपनी बना कर नॉएडा में प्लाट आवंटित करने और उन्हें बेच कर मुनाफा कमाने का था. जाहिर है कि यह श्री सिंह द्वारा अपने पद के गलत प्रयोग से ही संभव है और सीधे-सीधे हितों का टकराव है.

मैंने इस सम्बन्ध में आयकर विभाग से संपर्क कर अभिलेख प्राप्त करने और उनका उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने स्तर पर देवेश चतुर्वेदी जैसे किसी ईमानदार आईएएस अफसर से जांच कराने की भी मांग की है. साथ ही श्री सिंह द्वारा सामने के ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जा करने और निजी गाड़ियों में नीली बत्ती लगाने के सम्बन्ध में प्रशासनिक जांच की भी बात कही है. मैंने सीबी-सीआईडी की जांच दुबारा खुलवा कर मुख्यमंत्री कार्यालय की मोनिटरिंग में जांच करवाने की भी मांग की है.

सेवा में,
श्री अखिलेश यादव,
मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय- श्री यादव सिंह, चीफ इंजिनियर, नॉएडा के घर आयकर रेड और उससे जुड़े प्रश्न विषयक

महोदय,

      कृपया दिनांक 27/11/2014 को श्री यादव सिंह, चीफ इंजिनियर, नॉएडा विकास प्राधिकरण के घर और उनकी पत्नी सुश्री कुसुमलता की कंपनियों पर आयकर विभाग के पड़े छापे और इस सम्बन्ध में दिनांक 28/11/2014 को विभिन्न समाचारपत्रों में छपे तथ्यों का सन्दर्भ ग्रहण करने की कृपा करें.

इनके अनुसार कल छापे में एक हज़ार करोड़ से अधिक करचोरी का अनुमान है. आयकर महानिदेशक (जांच) सुश्री कृष्णा सैनी के अनुसार यह खेल बोगस शेयर होल्डिंग के जरिये मैकान इन्फ्रास्ट्रक्चर और मीनू कंस्ट्रक्शन सहित करीब 40 शेल कंपनी बना कर किये गए जिन्हें नॉएडा में प्लाट आवंटित किये गए और इन कंपनियों ने उन प्लाट को कंपनी सहित बेच डाला. इस छापे में तेरह बैंक लाकर मिले. कई भू-खंड की खरीद-फरोख्त के अभिलेख मिले जिसमे कुछ में कमीशनखोरी की बात भी सामने आई. एक निदेशक के पास से एक गोपनीय डायरी भी मिलने की खबर है जिसमे इन कमीशनखोरी को विस्तार में लिखा गया है. बताया गया है कि इसमें सभी अफसरों को दिए गए कमीशन का विस्तृत ब्यौरा है.

छापे की खबरों में यह भी लिखा है कि उन्होंने अपने घर के सामने के ग्रीन बेल्ट पर भी अवैध कब्जा कर रखा है जिसमे शौचालय, फूटलाइट, झूले, बेंच आदि लगे हुए हैं. ग्रीन बेल्ट में ही श्री यादव सिंह के घर के लिए एक बड़ा जेनेरेटर और एक ट्रांसफार्मर रखा हुआ है. इस ग्रीन बेल्ट तो श्रीओ यादव सिंह अपनी निजी जमीन के रूप में प्रयोग कर रहे हैं. छापे की तस्वीरों में श्री यादव सिंह की कई लक्ज़री गाड़ियां दिख रही हैं, जिनमे महत्वपूर्ण बात यह है कि सबों पर नीली बत्ती लगी हुई है. स्पष्ट है कि इन निजी गाड़ियों पर नीली बत्तियों का प्रयोग पूर्णतया वर्जित है पर श्री सिंह ऐसा अपने रसूख के बल पर कर रहे हैं.

समाचारों के अनुसार प्रदेश के कई इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में श्री सिंह की हिस्सेदारी बतायी जाती है. श्री यादव सिंह को सुश्री मायावती की सरकार में महत्वपूर्ण पदों में रहने के बाद आपके मुख्यमंत्री बनने पर ना सिर्फ इन पदों से हटाया गया था बल्कि उन्हें निलंबित करते हुए उनके खिलाफ सीबी-सीआईडी जांच भी शुरू कराई गयी थी. उन पर 954 करोड़ के घोटाले का आरोप लगा था और इस बारे में नॉएडा के सेक्टर 39 में गंभीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज हुआ था.

लेकिन भगवान जाने इस ढाई साल में ऐसा क्या हो गया कि उनके खिलाफ सभी आरोप गलत पा लिए गए, वे बहाल भी हो गए और उन्हें आपने ही नॉएडा, ग्रेटर नॉएडा और यमुना एक्सप्रेस वे का चीफ इंजिनियर बना दिया. आप मुख्यमंत्री हैं और अपने अधिकार क्षेत्र में कुछ भी कर सकते हैं. आम जनता इन सारी बातों को चुपचाप देखने के अल्वा और कुछ नहीं कर पाती पर विश्वास मानें इस तरह का एक-एक काम जनता की यादों में रह जरुर जाता है. कष्ट तब होता है जब यह सोचती हूँ कि यह सब काम आपके जैसे युवा मुख्यमंत्री के हाथों सम्पादित होता है जिससे प्रदेश को बहुत संभावनाएं हैं पर जिसे सब अच्छे लोगों को छोड़ कर यादव सिंह जैसे व्यक्ति ही इस प्रकार के अत्यंत जिम्मेदार पदों के लिए मिल पा रहे हैं.

आप इस बात से सहमत होंगे कि जिस व्यक्ति तथा/अथवा उसकी पत्नी सहित परिवार के अन्य लोगों द्वारा शेल कंपनी (फर्जी कंपनी- केवल नाम के लिए कंपनी) बना कर उसी नॉएडा विकास प्राधिकरण से कई दर्जन महंगे प्लाट लिए गए हों और उसे छद्म तरीके अख्तियार कर गलत ढंग से बेच कर करोड़ों का मुनाफा कमाया गया हो, उसे ही नॉएडा, ग्रेटर नॉएडा, यमुना एक्सप्रेस वे जैसे प्राधिकरण का चीफ इंजिनियर बनाना दूध की रखवाली के लिए बिल्ली को बैठाने जैसा है क्योंकि जाहिर है कि चूँकि श्री सिंह और उनके परिवार वाले यदि श्री सिंह की तैनाती की जगह से ही प्लाट का धंधा करते हैं तो वे प्रदेश के हितों का नहीं, अपने स्वयं के निजी हितों का ही धयान रखते दिखेंगे. ऐसे में श्री सिंह की उस पद पर एक मिनट की भी तैनाती पूरी तरह से जनहित और राज्यहित के विपरीत है, जो बात आयकर छापे में पूरी तरह स्थापित हो गया है.

आप यह भी सहमत होंगे कि सीबी-सीआईडी जांच की पोल इस आयकर छापे के बाद खुद ही खुल गयी है और अब इस बात की पूरी जरुरत हो गयी है कि सीबी-सीआईडी जांच भी पूरी गंभीरता से नए सिरे से कराई जाए. साथ ही जो अफसर ग्रीन बेल्ट की जमीन उसका रक्षक होने के बाद भी अपने कब्जे के लिए प्रयोग करे, नियमों के विरोध में निजी गाड़ियों में नीली बत्ती लगाए, वह ऐसे भी किसी महत्वपूर्ण पद पर नहीं तैनात किया जा सकता है.

उपरोक्त के दृष्टिगत आपसे निम्न निवेदन हैं-

1. श्री यादव सिंह को तत्काल उन्हें दिए गए सभी महत्वपूर्ण पदों से हटाने की कृपा करें

2.  आयकर विभाग से संपर्क कर श्री सिंह के विषय में सभी आवश्यक अभिलेख प्राप्त कर राज्य सरकार द्वारा भी अपने स्तर से इन प्रकरणों की जांच के आदेश देने की कृपा करें और यह जांच श्री देवेश चतुर्वेदी जैसे किसी ईमानदार आईएएस अफसर से कराने के आदेश देने की कृपा करें

3. सीबी-सीआईडी जांच को नए सिरे से खुलवाने के आदेश देने की कृपा करें और यह भी आदेशित करें कि भविष्य में इसकी मोनिटरिंग स्वयं आपके कार्यालय द्वारा की जायेगी

4. श्री यादव सिंह को ग्रीन बेल्ट कब्जाने, निजी गाड़ियों में अवैध नीली बत्ती लगाने के सम्बन्ध में उन पर प्रशासनिक कार्यवाही करने की कृपा करें

(डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
094155-34525

प्रतिलिपि- मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु



 

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