इस अकादमी में कुछ आदमी लूट-भ्रष्टाचार की नित नई ‘ललित कलाएं’ मंचित करते हैं!

इस बर्बादी पर मोदी और मीडिया मौन क्यों….

भारत सरकार का ललित कला अकादेमी एक सफ़ेद हाथी हो गया है. यहाँ कला प्रदर्शन के नाम पर रेवड़िया बांटने का खेल खुल कर चल रहा है. पूर्व में भी यह खेल खुल कर चला था. इसके कारण सीबीआई की जांच आज भी चल रही है. नए अध्यक्ष श्री उत्तम पाचरणे ने क्षेत्रवाद का कीर्तिमान स्थापित करते हुए रेवड़िया बांटनी शुरू कर दी है. सभी कार्यक्रमों में मुंबई के कलाकारों को हवाई जहाज से बुलाया जाता है. फाइव स्टार होटल में रहना खाना दिया जाता है. शानदार गाड़ियों से दिल्ली दर्शन कराया जाता है.

विदित रहे की ललित कला का अपना अतिथिगृह भी है परन्तु वह ख़ाली ही रहता है. महाराष्ट्र के कलाकारों को शानदार एवं महंगे होटलों में खूब सरकारी पैसा लुटा कर ठहराया जाता है. कलाकारों के चयन की कोई प्रक्रिया नहीं है. सभी अध्यक्ष महोदय के कृपा पात्र हैं और बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं. इस सबके लिए अध्यक्ष महोदय ने अपने चाटुकार एवं दागी कर्मचारियों को खुली छूट दी है जो पहले भी ऐसी हरकतें करते पकड़े गए हैं. यही कारण है कि वो सब सीबीआई की जांच झेल रहें हैं.

इस वक्त अकादमी में भारत सरकार के धन को उड़ाने की प्रक्रिया चरम सीमा पर है. कलाकारों को दिया जाने वाला मानदेय लूट का एक बड़ा हिस्सा है, जो कुछ लोगों को ही मिलता है. बाकी कलाकर चक्कर काटते रह जाते हैं. यह मानदेय भारत सरकार के वित्त नियमों एवं अकादेमी के अपने पूर्ववत तय नियमों का खुला उल्लंघन है. स्वयं अध्यक्ष महोदय ही भारत भ्रमण पर रहते हैं और उनकी यात्रा का बिल लाखों में हो गया है. बताया जाता है कि अध्यक्ष महोदय का दावा है कि संस्कृति मंत्री द्वारा उनको पूर्ण छूट दी गयी है और चुनाव जीतने के लिए कलाकारों का समर्थन खुल कर होना चाहिए.

ज्ञात रहे कि ललित कला अकादेमी को चलाने हेतु जनरल कौंसिल और बोर्ड होता है जो सभी फैसले लेता है. अध्यक्ष को स्वतः कुछ भी करने को अधिकार नहीं देता. परन्तु इस प्रक्रिया को जान बूझ कर नहीं अपनाया गया है. अध्यक्ष महोदय ही सर्वे सर्वा बन कर रेवड़ी बाँट रहे हैं और धड़ाधड़ मुकदमेबाज कर्मचारियों को अपने इर्द-गिर्द रख कर काम कर करा रहे हैं. वह दिन दूर नहीं जब यहां एक महाघोटाला उजागर होगा. सरकारी पैसे के सुनियोजित लूट का पर्दाफाश होगा. अभी नए अध्यक्ष द्वारा 12 करोड़ इसी साल में खर्च हेतु माँगा गया है. जाहिर है, इसे लूटपाट कर स्वाहा करने की पूरी तैयारी चल रही है.

इसी क्रम में एक श्री विजय कौशिक को सत्तर हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. परन्तु मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में अपना पल्ला झाड़ लिया है. ज्ञात रहे कि ललित कला अकादेमी पिछले कुछ सालों से खूब सारे विवादों में घिरती जा रही है. देखते ही देखते यह अकादमी भारत सरकार के खजाने पर बोझ बन गयी है. न खाउंगा न खाने दूंगा का दावा करने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, जो अपने आप को प्रधान चौकीदार भी कहते हैं, इस ललित कला अकादमी की लूटपाट को देख पाएंगे? इस अकादमी में फैले सड़ांध पर मीडिया वाले भी मौन हैं… आखिर कब मीडिया और मोदी इस अकादमी पर नजर गड़ाकर सफाई अभियान शरू कराएंगे?

कुमार सुरेंद्र की रिपोर्ट.

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