
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में (पहले पन्ने पर नहीं) छपी खबर के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी के साथ किये गये समझौते का उल्लंघन करना हमारी गलती थी। पाकिस्तान मुस्लिम लीग का अध्यक्ष चुने जाने के बाद पार्टी की बैठक में उन्होंने कहा, 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने पांच परमाणु परीक्षण किए थे। इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान आए थे और 21 फरवरी 1999 को लाहौर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। नवाज ने आगे कहा, हमने उस समझौते का उल्लंघन किया और यह हमारी गलती थी।
आप जानते हैं कि नवाज शरीफ और वाजपेयी ने 21 फरवरी 1999 को लाहौर समझौते पर दस्तखत किए थे। लेकिन कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तान ने कारगिल में घुसपैठ की, जिससे कारगिल जंग हुई। नवाज ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के साथ हुई संधि का उल्लंघन किया। उन्होंने बताया कि उस समय मैं पाकिस्तान का प्रधानमंत्री था और तब आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ थे। उन्होंने सेना को मार्च 1999 में कारगिल में घुसपैठ का आदेश दिया था। भारत को जब इसका पता चला तो युद्ध छिड़ गया। नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते भारत ने युद्ध जीत लिया था। नवाज शरीफ ने ये भी बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान को परमाणु परीक्षण करने से रोकने के लिए पांच अरब डॉलर की पेशकश की थी, लेकिन इनकार कर दिया गया।
आप जानते हैं कि 2014 में नरेंद्र मोदी के चुनाव जीतने के बाद शपथग्रहण में नवाज शरीफ भी आये थे। किसने बुलाया, कैसे आये अभी यह सब मुद्दा नहीं है। तथ्य यह है कि नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बिना बुलाये पाकिस्तान गये थे। रूस, अफगानिस्तान और अचानक पाकिस्तान पहुंच गए थे। उन्होंने लाहौर जाकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। तब खबर छपी थी (ट्वीट था), काबुल में नाश्ता, लाहौर में चाय, दिल्ली में डिनर, मोदी बोले- दिल को छू गई शरीफ की गर्मजोशी। तब नवाज शरीफ ने पीएम मोदी की अगवानी की थी और गले मिलकर स्वागत किया था। एयरपोर्ट पर ही मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। इसके बाद मोदी नवाज शरीफ के साथ उनके घर भी गये थे।
वही नवाज शरीफ अब आम चुनाव के बीच (एक ही चरण बाकी है) गलती मान रहे हैं। इसका उद्देश्य जो हो, या न हो खबर तो है ही। खासकर इसलिए कि, राहुल गांधी और अरविन्द केजरीवाल को पाकिस्तान का समर्थन मोदी के लिए चिंता की बात है। वे कह चुके हैं – इसकी जांच हो, प्रधानमंत्री होने के नाते मुझे इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी ने इस बार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति खुद की है और उसका फल प्राप्त कर रहे हैं। बदले में कुछ भी बोल रहे हैं और इसी क्रम में राहुल व केजरीवाल के बारे में उपरोक्त बातें कर चुके हैं। कल टाइम्स ऑफ इंडिया में ऐसी खबर पहले पन्ने पर थी और आज नवाज शरीफ की यह खबर आ गई। इससे पहले, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने कहा था, पाकिस्तान में सब चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी चुनाव हार जाएं, क्योंकि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तभी बेहतर होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान में भारत को लेकर नफरत नहीं है, लेकिन वहां (भारत में) वो पाकिस्तान को लेकर नफरत पैदा कर रहा है।
वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों को पाकिस्तान का समर्थक बताया था। पाकिस्तानी नेता ने कहा था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी को साथ होना चाहिए ताकि वे कट्टरपंथियों को हरा सके। पुरानी खबरों के आलोक में आज नवाजशरीफ की खबर पहले पन्ने पर हो सकती थी। लेकिन नहीं है। कारण समझने के लिए आज की दूसरी खबरों को जानना जरूरी है। आइये, अब आज की बाकी खबरें देखते हैं। वैसे तो आज ज्यादातर अखबारों में मौसम की खबर लीड है लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री के चुनाव प्रचार और भाषण की खबर को लीड बनाया है। अंतिम चरण के चुनाव प्रचार का आखिरी दिन कल है। नवोदय टाइम्स ने इस कॉलम के चार कॉलम में छापा है। शीर्षक है, “माकपा, कांग्रेस, तृणमूल ने बंगाल को बर्बाद किया : मोदी”। कहा, “तुष्टिकरण और वोट जिहाद के लिए तृणमूल के छीने ओबीसी के अधिकार”।
अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। दूसरे पहले पन्ने की लीड का शीर्षक है, “विपक्ष के घोर सांप्रदायिक नकाब को उतारा तो उड़ गई रातों की नींद : मोदी”। झारखंड में कहा, “विपक्षियों का नफरती प्रचार नाकाम करके रहूंगा”। एक और शीर्षक है, “संविधान और तानाशाही रटने वाले बंगाल में देखें बोलती बंद हो जाएगी”। द टेलीग्राफ में कोलकाता में प्रधानमंत्री के रोड शो की खबर लीड है। साथ में संकर्षण ठाकुर की खबर, हार्टलैंड पल्स (हृदयस्थल की नब्ज) गाजीपुर डेटलाइन से है। इसका शीर्षक है, मोदी गढ़ में नया: गुस्सा बढ़ा। इंडियन एक्सप्रेस में भी लीड के साथ ममता बनर्जी की खबर है। उन्होंने कहा है, हवा की दिशा बदल रही है …. कुछ दिन में मोदी पूर्व प्रधानमंत्री हो जायेंगे। नवोदय टाइम्स में भी मोदी की खबर के साथ राहुल गांधी की खबर है। इसका शीर्षक है, “चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी पीएम नहीं बनने जा रहे राहुल गांधी”।
इस तरह, स्पष्ट है कि मोदी की खबरें पहले की तरह, पहले पन्ने पर जगह नहीं पा रही हैं और अगर किसी ने पहले पन्ने पर जगह दी है तो है इंडिया गठबंधन की खबर के साथ। कहने की जरूरत नहीं है कि नरेन्द्र मोदी के भाषणों में अब कुछ होता नहीं है और इसीलिए पहले पन्ने पर जगह नहीं मिल रही है। इन तथ्यों के अपने मायने हैं पर अभी वह मुद्दा नहीं है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की जमानत अवधि के विस्तार के लिए आवेदन पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया की खबर मैंने कल दी थी। स्वास्थ्य कारणों से एक जरूरत को राजनीतिक रंग दिये जाने की कोशिश पर कल मैंने अफसोस किया था। मेरा मानना है कि इस तरह की खबरें न्याय के मार्ग में बाधा हो सकती हैं। फिर भी आज यह सभी अखबारों में पहले पन्ने पर है। खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसे मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है। इंडियन एक्सप्रेस में तीन कॉलम में है लेकिन डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हत्या के एक मामले में बरी कर दिया गया है। यह अंदर के पन्ने पर होने की सूचना है।
केजरीवाल की खबर अमर उजाला में पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन राम रहीम सिंह की खबर पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है। नवोदय टाइम्स में केजरीवाल की खबर ऊपर तीन कॉलम में है तो राम रहीम की खबर ठीक नीचे दो कॉलम में है। द हिन्दू में यह खबर दो कॉलम में है और राम रहीम की खबर तीन कॉलम में। शीर्षक में बताया गया है कि कोर्ट ने राम रहीम के साथ चार अन्य को छोड़ा है और यह हत्या 2002 में हुई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया में केजरीवाल के मामले में ईडी का दावा शीर्षक है। साथ में जमानत और आतिशी को समन की दो खबरें अलग-अलग सिंगल कॉलम में है। इसके बराबर में राम रहीम कीखबर है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने टॉप पर एक एक्सक्लूसिव खबर छापी है। यह दिल्ली में आग लगने के पुराने मामलों का का फॉलो अप है। बताया गया है कि ट्रायल धीमा है सभी अभियुक्त जमानत पर बाहर है। अदालत ने लचर जांच और अफसरों की ढिलाई की बात की है।
आज के मेरे सात अखबारों में राहुल गांधी, ममता बनर्जी और लालू यादव के हवाले से तीन खबरें हैं। इनके अनुसार नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन रहे हैं। दो खबरें आप ऊपर पढ़ चुके, तीसरी द टेलीग्राफ में कोट है। अपनी बेटी मीसा भारती के लिए चुनाव प्रचार करते हुए लालू यादव ने कहा, मोदी गये …. वे खुद को अवतार कहते हैं पर उन्हें जेल जाना होगा। यहां यह बताना दिलचस्प है कि नरेन्द्र मोदी पिछली बार बनारस में मतदान के पहले गुफा में ध्यान लगाने पहुंच गये थे। इस बार खबर है कि वे कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक मेमोरियल में रहेंगे। अमर उजाला ने इस खबर को चार कॉलम में छापा है। कांग्रेस प्रक्ता जयराम रमेश ने इसपर ट्वीट करके कहा है, ‘सुना है कि निवर्तमान प्रधानमंत्री 30 मई और 1 जून के बीच मेडिटेशन के लिए कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक जा रहे हैं। याद करें कि 7 सितंबर 2022 को राहुल गांधी ने वहीं से अपनी भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की थी। अब निवर्तमान प्रधानमंत्री उसी जगह से अपने रिटायर्ड लाइफ़ यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं।’ अमर उजाला की खबर में इस ट्वीट का जिक्र नहीं है।
अमर उजाला ने लिखा है, दक्षिण के मोर्चे पर प्रधानमंत्री। इसके तहत कहा गया है, चुनाव से पहले से ही पीएम दक्षिण भारत के मोर्चे पर डटे रहे हैं। उन्होंने खासतौर पर तमिलनाडु की लगातार यात्रा की। अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पीएम ने राम विरासत से जुड़ी जगहों का लगातार दौरा किया। चुनाव के दौरान दक्षिण के राज्यों में दो दर्जन से अधिक जनसभाएं कीं। इस संदर्भ में याद किया जा सकता है कि 2019 के चुनावों के आखिरी फेज की वोटिंग से पहले नरेन्द्र मोदी केदारनाथ गए थे। वोटों की गिनती से पहले उन्होंने केदारनाथ मंदिर में पूजा-पाठ किया था। इसके बाद वहां हिमालय में 11,700 फीट ऊपर बनी रुद्र गुफा में 17 घंटे ध्यान लगाया था। इससे संबंधित खबरों से जो प्रचार हुआ होगा वह प्रचार का विस्तारित समय था और इसबार भी लगभग वही होगा। प्रभावित होने वाले वोटर बदल सकते हैं।


