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सियासत

देश को ‘कांग्रेस मुक्त’ करने के मायने

श्रीगंगानगर। कांग्रेस मुक्त भारत। कांग्रेस मुक्त देश। बीजेपी के महापुरुष नरेंद्र मोदी के ये शब्द लगभग 3 साल से मेरे कानों मेँ गूंज रहे हैं। अकेले मेरे ही नहीं और भी ना जाने कितने करोड़ देश वासियों के कानों मेँ होंगे ये शब्द। किसी के कानों मेँ मिठास घोल रहे होंगे और किसी के जहर। इन शब्दों का मायने ना जानने वालों के लिए ये शब्द गुड़ है और जो समझ रहे हैं उनके लिए कड़वाहट है। चिंता भी है  साथ मेँ चिंतन भी।

श्रीगंगानगर। कांग्रेस मुक्त भारत। कांग्रेस मुक्त देश। बीजेपी के महापुरुष नरेंद्र मोदी के ये शब्द लगभग 3 साल से मेरे कानों मेँ गूंज रहे हैं। अकेले मेरे ही नहीं और भी ना जाने कितने करोड़ देश वासियों के कानों मेँ होंगे ये शब्द। किसी के कानों मेँ मिठास घोल रहे होंगे और किसी के जहर। इन शब्दों का मायने ना जानने वालों के लिए ये शब्द गुड़ है और जो समझ रहे हैं उनके लिए कड़वाहट है। चिंता भी है  साथ मेँ चिंतन भी।

देश को कांग्रेस मुक्त बनाना है… भारत को कांग्रेस से मुक्त करने का सपना है…. इन शब्दों को राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रभक्ति के साथ इस प्रकार से जोड़ दिया गया कि यूं लगने लगा जैसे फिर किसी ने अंग्रेज़ो भारत छोड़ो का नारा बुलंद किया हो। देश  मेँ ना जाने कितनी राजनीतिक पार्टियां हैं। मगर देश को मुक्त केवल कांग्रेस से करना है। क्यों? क्योंकि मोदी जी कांग्रेस का अर्थ जानते हैं ! मोदी जी समझते हैं कि कांग्रेस क्या है! कांग्रेस के रहने के परिणाम से भी मोदी जी अंजान नहीं। मोदी जी के नेतृत्व वाली बीजेपी कांग्रेस से डरती है। मोदी जी जानते हैं कि मात्र कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जिसका भारत के हर गली कूचे मेँ प्रभाव है। जिसका नाम है।

यही एक पार्टी है जो किसी दिन उनकी सरकार को, बीजेपी को सत्ता से बाहर करने की क्षमता रखती है। कांग्रेस ही है जिसमें गिर गिर के उठ जाने की अपार क्षमता है। कांग्रेस के अतिरिक्त कोई और चुनौती है ही नहीं। जब चुनौती देने वाला ही कोई नहीं रहेगा तब अपना राज, केवल और केवल अपना राज। कुछ भी करो, कोई विरोध नहीं। कुछ भी करो, कोई बोलने वाला नहीं। और, जब सरकार की नीतियों, निर्णयों का विरोध करने वाला ही ना रहे तो फिर लोकतन्त्र खतरे मेँ पड़ जाता है। शासक मनमर्जी करता है। क्योंकि उसे किसी राजनीतिक विरोध की चिंता ही नहीं रहती। पब्लिक का विरोध अर्थ हीन हो जाता है। मोदी जी जानते हैं कि जब बीजेपी 30 साल बाद 2 सीटों से यहां तक आ सकती है तो कांग्रेस क्यों नहीं?

बस, इस डर ने मोदी जी और उनके खास दो चार नेताओं ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा इस प्रकार से उछाला कि यह देश प्रेम का प्रतीक हो गया। राष्ट्रवाद की पहचान बन गया। असल मेँ कांग्रेस मुक्त भारत का अर्थ है, विपक्ष का ना रहना। हालांकि लगभग हर स्टेट मेँ राजनीतिक पार्टी है, लेकिन मोदी जी और आज की बीजेपी ने कभी भारत को उनसे मुक्त करने का नारा नहीं दिया। जरूरत भी नहीं है, क्योंकि उनके साथ तो सत्ता का बंटवारा कर उनको अपने साथ लिया जा सकता है। किसी से विचार मिले ना मिले कोई खास बात नहीं। सिद्धांतों मेँ जमीन-आसमान का अंतर है, तब भी चलेगा।

सत्ता का सवाल है। उसे पाने और फिर उसे बनाए रखने की बात है। छोटे छोटे दलों की औकात ही कितनी है! सत्ता के लालच मेँ वे बीजेपी के साथ आने मेँ क्यों हिचकिचाएंगी। कश्मीर और अब बिहार इसके उदाहरण है। जब छोटे दलों को सत्ता का टुकड़ा मिल गया तो वे उसी मेँ मस्त हो जाएंगे और कांग्रेस रहेगी नहीं, तब! तब देश मेँ एक मात्र बीजेपी। बीजेपी मेँ एक मात्र मोदी जी और उनके अमित शाह। बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी नहीं कहा कि देश को कांग्रेस से मुक्त करना है। जे पी नारायण ने भी ऐसा तो नहीं कहा होगा। चूंकि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए उसको मार दो, उसके बाद राज अपना ही अपना।

असली लोकतन्त्र उसी देश मेँ है जहां विपक्ष मजबूत हो। लोकतन्त्र वहीं समृद्ध होता है जहां पक्ष के साथ साथ विपक्ष भी ताकतवर  हो। सत्ता के कामों का विश्लेषण करने वाला हो। उसको रोकने और टोकने वाला हो। परंतु मोदी जी एंड कंपनी ने राजनीति की परिभाषा ही बदल ही। बड़े विरोधी को खत्म कर दो, छोटे मोटे तो खुद शरणागत हो जाएंगे दंडवत करते हुए। कांग्रेसियों से कोई परहेज नहीं, बस देश को कांग्रेस मुक्त करना है। ताकि मोदी जी एंड कंपनी निष्कंटक राज कर सके। लोकतन्त्र ! जब राजनीति की नई परिभाषा गढ़ दी गई है तब लोकतन्त्र की परिभाषा भी तो बदलेगी ही। दो लाइन पढ़ो-

बिहार ने हरयाणा को साफ कर दिया
नितीश ने गिरगिट को मात कर दिया।

लेखक गोविंद गोयल श्रीगंगानगर (राजस्थान) के वरिष्ठ पत्रकार हैं. इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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1 Comment

1 Comment

  1. debashis

    August 2, 2017 at 4:50 pm

    ये तो कुछ ऐसा ही है कि तुम करो तो प्यार और हम करें तो_____..अब तक मलाई ही मलाई खा रहे थे तो जन्नत का मजा, थोड़ी सी नीम क्या आ गई दांतो के बीच देखो बेचैनी। “सब दिन न एक समाना।कांग्रेस प्रजातंत्र कि हत्या कर रही है, लेकिन एक क्रांतिकारी जो आज के ” गांधी ” के गर्भ से जन्म लिया और देशभर में स्वराज लिये घुमते-फिरते रहा, वो आज चुप है, आखिर क्यू ! क्या इस लिए के उस रंगा सियार का रंग उसके ही प्रजाति का एक ” लुच्चा-टुच्चा ” के ” छू ” करते ही उतरने लगा है। नहीं तो अबतक ये क्रांतिकारी अपने पिछवाड़े से फायरिंग कर के मृतप्राय प्रजातंत्र को संजीवनी पिला रहे होते। कुछेक गलत शब्दों के लिए माफी।

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