‘फेंकू’ बनना ‘पप्पू’ को भारी पड़ गया!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फिर बने पार्टी के लिए मुसीबत … अमेठी से निकला जिन्ना, सुप्रीम कोर्ट के पिंजड़े में कैद : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की काबलियत पर हमेशा सवाल उठते रहते हैं। बीजेपी ही नहीं, जनता में भी राहुल को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। फिर भी देश की सियासत में राहुल …

मोदी के जुमलों पर कांग्रेस की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक है घोषणापत्र!

कांग्रेस घोषणापत्र का शीर्षक है: ‘हम निभाएंगे’. मतलब कि ये शीर्षक ही मोदी के जुमलों पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक है! कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

संघी पत्रकार ने कांग्रेसी CM से पूछा- पप्पू इस बार कितने नंबर से पास होगा?

अगर पत्रकार संघी बैकग्राउंड का होगा तो उसके मुंह से वही निकलेगा, जो भक्तगण आपस में रोजाना बोलते रहते हैं. मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा का है. संघी पत्रकार के मुंह से जब पप्पू निकला तो भड़क गए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भड़ास संपादक यशवंत ने खोला पत्ता, बताया कि वो क्यों चाहते हैं राहुल गांधी PM बनें!

Yashwant Singh : सवर्ण घरों के तमाम चूतिये बेरोजगार टहल रहे हैं, लेकिन वोट देंगे मोदी को। क्या कि पाकिस्तान को ठोंक दिया, मुसलमानों को ठीक कर दिया। जब नौकरी चाकरी के बारे में पूछो तो दांत चियार लेते हैं। दिन भर खोजते हैं कोई बीयर पिलाने, गोश्त खिलाने वाली ‘पार्टी’ मिल जाए। कृपया हमें …

राहुलजी की सरकार आने पर जो 6 हजार रुपये मिलेंगे, उसमें से पत्नी को गुजारा-भत्ता दे दूंगा!

राहुल गांधी का फार्मूला तो लगता है हिट हो गया. लोगबाग इसकी चर्चा करने लगे हैं. कई ने मिलने वाले पैसे को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी है. पत्नी के गुजारा भत्ता मांगने पर एक शख्स तो कोर्ट को लिखित में दे आया कि फिलहाल उसके पास पैसे नहीं है, जब राहुल गांधी की सरकार …

प्रियंका के आने से राहुल फ्लॉप हो जाएंगे!

हस्बे मामूल, राहुल गांधी ने फिर गलती कर दी। उनको प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ लखनऊ नहीं जाना चाहिए था। वहां भीड़ प्रियंका के नाम पर जुट रही है, वे ही आकर्षण का केंद्र रहेंगी। राहुल गांधी अपने को हाशिये पर पायेंगे। इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर ऐसा …

टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय कहिन- आखिर कांग्रेस ने अपना चेहरा दिखा ही दिया!

Abhishek Upadhyay : आखिर कांग्रेस ने अपना चेहरा दिखा ही दिया। वोटबैंक के सफेद पाउडर के पीछे से झांकता अवसरवाद की कालिख से रंगा पुता काला चेहरा। यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन से घबराई कांग्रेस ने तीन तलाक जैसी बर्बर प्रथा को खत्म करने वाला कानून ही खत्म करने का ऐलान कर दिया। यही कांग्रेस …

मौसम विज्ञानी ‘जी ग्रुप’ भी पलटी मारने को तैयार, राहुल गांधी को गई चिट्ठी पढ़ें

पीएम मोदीजी की खराब होती हवा और राहुल का चढ़ता सियासी पारा देख कई मौसम विज्ञानी पलटी मारने को तैयार होते दिख रहे हैं. इसी क्रम में ‘जी न्यूज’ ने भी सक्रियता दिखाई है. भाजपा और मोदी की भरपूर भक्ति दिखाने और कांग्रेस समेत सारे गैर-भाजपा पार्टियों को जमकर गरियाने वाले जी न्यूज को अब …

जियो रे एडिटर्स ‘गिल्ट’! Presstitute, News Trader, बाजारू, बिकाऊ कहे जाने पर चुप्पी, Pliable पर उबाल!

Samar Anarya : मोदी ने मीडिया को बाज़ारू कहा, मंत्री वीके सिंह ने प्रेस्टीट्यूट। एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया सोता रहा. फिर राहुल गाँधी ने एक पत्रकार को प्लाइअबल (कोमल /दब्बू /आसानी से वश में आ जाने वाला /पुटुक /लचीला /आज्ञाकारी) कहा- एडिटर्स गिल्ट ऑफ इंडिया मीडिया पर हमलों को लेकर बहुत चिंतित हो गया! जियो …

राहुल गांधी द्वारा Pliable कहे जाने से नाराज हैं ANI की मालकिन उर्फ संपादिका स्मिता प्रकाश!

अनिल जैन : लीजिए, अब प्रधान जी के चर्चित ‘इंटरव्यू’ को लेकर जारी बहस में स्मिता प्रकाश भी कूद पडीं। वही स्मिता प्रकाश जिनके सामने बैठकर दो दिन पहले प्रधान जी राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे। स्मिता प्रकाश इंटरव्यू को प्रायोजित बताए जाने को लेकर राहुल गांधी से नाराज हैं। वे राहुल को चुनौती …

मोदी इंटरव्यू से चर्चित स्मिता प्रकाश को राहुल गांधी ने ‘Pliable’ कहा, मचा बवाल

Manoj Malayanil : जिस पत्रकार ने नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लिया उनके लिए राहुल गांधी ने pliable शब्द इस्तेमाल किया है…यानी ऐसा व्यक्ति जिसे आसानी से वश में किया जा सकता है, जो बहुत लचीला हो। pliable किसे कहते हैं, इस शब्द के मतलब को राहुल गांधी ने ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में क़रीब एक दशक …

जब सरकार तय करने लगे खबरें तब राजनीति में आना ही ठीक

Rajkumar Soni : जब सरकार तय करने लगे खबरें तब… राजनीति में आना ही ठीक… रूचिर गर्ग एक अखबार में संपादक थे, लेकिन जब उनके कांग्रेस प्रवेश की खबरें चली और उन्होंने कांग्रेस प्रवेश कर लिया तब सबने यहीं लिखा कि पत्रकार रूचिर गर्ग… उनके नाम के आगे- पीछे यदा-कदा ही संपादक लिखा गया। ऐसा …

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार रुचिर गर्ग ने पकड़ा राहुल गांधी का हाथ, देखें तस्वीर

Girijesh Vashistha : हमारे पुराने मित्र, साथी और बेहद भले आदमी रुचिर गर्ग राजनीति को प्राप्त हो गए हैं.उन्होंने राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस को धारण किया. लेकिन वो राजनीति में करेंगे क्या ? चाल-फरेब, झूठ धोखा-धड़ी, धन-संपदा, एक भी ‘सद्गुण’ नहीं है . मोटी चमड़ी भी नहीं है. चिंता होना स्वाभाविक है. इस …

राहुल गांधी ने गोदी मीडिया से पूछा- ‘खुलकर लिख रहे आप लोग? या, कोई दबाव है? थोड़ा-सा!’, देखें वीडियो

अरुण जेटली के ब्लॉग से खबर बनाने वाले पत्रकार राहुल गांधी की हालिया प्रेस कांफ्रेंस में रखे गए तथ्यों से खबर बनाने में कांप गए… हमारा पप्पू ऐसा है कि पत्रकारों से आंख में आंख डाल कर पूछ लेता है- ”मूड कैसा है, कोई दबाव तो नहीं है”. व्हाट्सऐप्प यूनिवर्सिटी के साथ गोदी मीडिया कहता …

राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा- राफेल घोटाले पर भी बोलिए, रीढ़ की हड्डी तो दिखाइए! देखें वीडियो

Sanjaya Kumar Singh : राहुल गांधी तो गले लगने की अच्छी कीमत वसूल रहे हैं। श्रीमान 56 की ऐसी खिंचाई तो अभी तक हुई ही नहीं थी। उसपर से उनके ‘मित्र’ भी नहीं बख्शे जा रहे हैं। आज एक वीडियो दिखा जिसमें राहुल पत्रकारों से पूछ रहे थे आपलोग राफेल पर बात क्यों नहीं करते …

राहुल गांधी के आंख मारने पर लिखी गई बोधिसत्व की कविता हुई वायरल- ”कुछ भी मारो, बस आँख मत मारो!”

मर्यादावादियों के लिए एक नया राष्ट्रगान…. ‘कुछ भी मारो, बस आँख मत मारो! कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

तो राहुल गांधी ने ये तय कर लिया है कि अंबानियों की और उनके मीडिया की परवाह नहीं करनी है!

Prashant Tandon : बढ़िया धुलाई के बाद प्रेस भी – पूरा काम किया आज राहुल गांधी ने… राहुल गांधी ने मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बेहतरीन भाषण दिया. राहुल ने आज वही बोला जो लोग सुनना चाहते थे. देश की तमाम समस्याओं, घटनाओं और सरकार की विफलताओं पर सरकार को जवाबदेह …

राहुल गांधी मोदी के गले मिले या गले पड़े! देखें तस्वीरें

शंभूनाथ शुक्ल : राहुल ने मोदी को गले लगाया अथवा धोबीघाट दाँव का इस्तेमाल किया। पप्पू ने बता दिया कि साठ साल का अनुभव सिखा गया है कि बीजेपी चाहे जितनी फुला जाए, पर रहेगी नीचे ही। राजनीति ऐसे की जाती है प्रधानमंत्री जी! सरकार आपकी, संसद आपकी और स्पीकर भी आपकी पार्टी की ही। …

राहुल गांधी ने सच में भूकंप ला दिया, मोदी के लिए कहा- ये चौकीदार नहीं, भागीदार

Sanjaya Kumar Singh : चौकीदार नहीं, भागीदार… राहुल गांधी ने संसद में प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला। नोटबंदी और जीएसटी से लेकर बिना एजंडा के चीन जाने और उसे चीन का एजंडा बताने से लेकर रक्षा मंत्री पर भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि फ्रांस के साथ राफेल विमान की कीमत नहीं बताने संबंधी कोई …

राहुल गांधी में नेतृत्व क्षमता है?

संदीप ठाकुर

राहुल गांधी का नाम सुनते ही आपके जहन में सबसे पहले उनकी कौन सी छवि
उभरती है…पप्पू वाली या गंभीऱ। पप्पू वाली न। आप बिल्कुल सही हैं। इसके
बाद  उनकी कौन सी बात याद आती है। यदि में गलत नहीं हूं तो आपको याद आती
हाेगी, आलू की फैक्ट्री या नारियल जूस वाली कहानी। या फिर याद आती होगी
उनके ऊपर चल रहे सोशल मीडिया के जोक्स और भाजपा नेताओं द्वारा समय समय
पर किए गए कटाक्ष। जरा सोचिए, क्या इन बातों के आधार पर राहुल को जज
किया जा सकता है? सही मायने में राहुल गांधी पप्पू हैं? क्या राहुल
गांधी पॉलिटिकल मैटीरियल नहीं हैं? क्या राहुल गांधी में नेतृत्व क्षमता
नहीं है?

देश को ‘कांग्रेस मुक्त’ करने के मायने

श्रीगंगानगर। कांग्रेस मुक्त भारत। कांग्रेस मुक्त देश। बीजेपी के महापुरुष नरेंद्र मोदी के ये शब्द लगभग 3 साल से मेरे कानों मेँ गूंज रहे हैं। अकेले मेरे ही नहीं और भी ना जाने कितने करोड़ देश वासियों के कानों मेँ होंगे ये शब्द। किसी के कानों मेँ मिठास घोल रहे होंगे और किसी के जहर। इन शब्दों का मायने ना जानने वालों के लिए ये शब्द गुड़ है और जो समझ रहे हैं उनके लिए कड़वाहट है। चिंता भी है  साथ मेँ चिंतन भी।

मीडिया हो या आरबीआई, सभी इस मोदी सरकार से थोड़ा डर कर चल रहे हैं : राहुल गांधी

राहुल गांधी का आज का भाषण उन्हें बहुत आगे ले जाएगा। उन्होंने दिल्ली में खड़े होकर जो लाइन कांग्रेस और बीजेपी के बीच खींची है अगर उसे कायम रख पाए तो कोई वजह नहीं कि कांग्रेस की अगली जीत के नायक वही हों। कई और ठीक-गलत बातों से हट कर उन्होंने आज जो बार-बार कहा, वो था ‘डरो मत’। ना राहुल ने यूपीए के विकास कार्य गिनाए, ना राहुल ने हिंदू-मुस्लिम की बात की, ना राहुल ने एनडीए के घोटाले बताए… उन्होंने जो कहा वो सिर्फ इतना था कि बीजेपी- संघ परिवार ‘डराओ’ की लाइन पर चलते हैं जबकि कांग्रेस का हाथ ‘डरो मत’ कहता है। वोटर ऐसी सीधी बात ही समझता है, जबकि सीधे-सादे इन दो शब्दों के अर्थ कहीं ज़्यादा गहरे और सच्चे हैं।

राहुल गांधी की ‘पप्पू’ छवि बनाने वाली भाषण कला के माहिर खिलाड़ी हैं मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में कभी मजाकिया लहजे में तो कभी आक्रामक अंदाज में राहुल गांधी को हमेशा निशाने पर रखते हैं। दरअसल, राहुल गांधी के मामले में अपने भाषणों में मोदी इन दिनों बहुत आक्रामक दिख रहे हैं। मतलब साफ है कि माफ करना उनकी फितरत में नहीं है। और बात जब कांग्रेस और राहुल गांधी की हो, तो वे कुछ ज्यादा ही सख्त हो जाते हैं।

तो अब प्रियंका गांधी के सहारे राहुल मजबूत होंगे?

कांग्रेस अब बदलाव की तैयारी में है। अपने 131वें स्थापना दिवस से पहले कांग्रेस प्रियंका गांदी को पार्टी में पद पर लाकर राहुल गांधी को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। इससे पार्टी से युवा तो जुडेंगे ही, महिलाएं भी मजबूती से जुड़ेगी। जो, कि बीते दस साल में पार्टी से दूर होते गए हैं। मगर, ऐसा नहीं हुआ, तो फिर कांग्रेस की दशा और दिशा किधर जा रही होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। मतलब साफ है कि नियुक्ति करे तो भी और नहीं करे तो भी, कांग्रेस फिलहाल सवालों के घेरे में है। वैसे, राजनीति अपने आप में एक सवाल के अलावा और है ही क्या?

सहारा पर मोदी की चुप्पी देशद्रोह! भड़ास के सवालों पर भी मौन है मोदी सरकार

राहुल गांधी ने सहारा पर मोदी से अपने सवालों का सीधा जवाब मांगा. भड़ास ने तो सबसे पहले यह सवाल उठाया था कि आखिर क्यों जब सारे चिटफंडिये जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं तो सहारा और एक-दो चिटफंडियों पर रियायत क्यों? गरीबों के मसीहा बने मोदी सरकार क्यों इस मामले में दरियादिली दिखा रहे हैं. जबकि सहारा मीडिया कर्मचारी भी अपनी सैलरी के लिए सहाराश्री की पोल खोलते हुए सत्ता के तमाम दरवाजों को खटखटा चुके हैं.

सहारा समूह ने छह महीने में नौ बार दिए नरेंद्र मोदी को करोड़ों रुपये : राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आखिरकार बम फोड़ ही दिया. उन्होंने आज मेहसाणा (गुजरात) में आयोजित एक रैली में कहा कि सहारा समूह पर पड़े छापे के बाद छह महीने में सहारा समूह के लोगों ने नरेंद्र मोदी को नौ बार करोड़ों रुपए दिए. मोदी को सहारा के बाद बिड़ला ग्रुप के लोगों ने भी पैसे दिए. इसकी पूरी जानकारी तारीख-दर-तारीख और विस्तार से मौजूद है.

तो क्या राहुल गांधी ठिकाने लगा देंगे वरिष्ठ नेताओं को?

-निरंजन परिहार-
कांग्रेस के बड़े नेता भीतर ही भीतर भुनभुना रहे हैं। ये सब मान रहे है कि नोटबंदी के बाद राहुल गांधी की राजनीति तो चमकी हैं, लेकिन उन्हें यह भी लगने लगा है कि जल्दबाजी में राहुल गांधी नई आफत भी मोल लेते जा रहे हैं। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता राहुल के ताजा राजनीतिक रवैये से खुश नहीं हैं। मजबूरी यह है कि वे नाराजगी जाहिर नहीं नहीं सकते। अगर कर दें, तो राहुल गांधी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध भूचाल भले ही नहीं ला पाए, मगर राहुल के विरुद्ध पार्टी में भूकंप जरूर आ जाएगा। माना जा रहा है कि सही समय पर ये वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से इस मामले पर बात करेंगे। ये सारे पार्टी के बड़े नेता हैं, सो बाहर बोलें भी, तो बोलें कैसे। क्योंकि उनका यह आचरण पार्टी लाइन के विरुद्ध काम होगा।

मोदी से मिलकर राहुल ने अपनी रही-सही इमेज का भी सत्यानाश कर लिया

Om Thanvi : राहुल अपनी पार्टी के नेताओं के साथ जाकर मोदी से मिल आए। संसद में पंद्रह विपक्षी दलों के सहयोग से पनपी एकता टूट गई। मुलाक़ात का फ़ायदा मोदी ने अपने हक़ की ख़बरों के प्रसार (‘हमें मिलते रहना चाहिए, राहुलजी’!) से उठाया है, जिसमें उनका प्रचार-तंत्र माहिर है। इससे कांग्रेस को क्या हासिल हुआ? क्या राहुल मोदी के ग़ुब्बारे की हवा निकालने जा रहे हैं? या अगले संसद सत्र (और फिर उससे अगले) का इंतज़ार करेंगे? तब तक तो मोदी कई ग़ुब्बारे और फुला चुके होंगे। भोले जन-मानस को ग़ुब्बारे पसंद हैं, जब तक वे फुस्स न हों।  अगर राहुल गांधी के पास ठोस तथ्य हैं तो संसद के कवच की परवाह न कर उन तथ्यों को जनता के सामने अविलंब रख देना चाहिए। भूचाल न सही, आँधी-तूफ़ान सही! वरना इतना शोर उठाकर अब ग़ुब्बारे से कतराना उनके ही गले की घंटी बन जाएगा।

राहुल गांधी सियासत का एक अवसरवादी चेहरा

अजय कुमार, लखनऊ

कांग्रेस के युवराज पूरा देश जीतने के लिये निकले हैं। इसके लिये उन्हें कुछ भी करने से परहेज नहीं है।  अपनी तकदीर बनाने के लिये वह देश की तस्वीर बदरंग करने से भी नहीं हिचकिचाते हैं।  आज की तारीख में राहुल गांधी अवसरवादी राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बन गये हैं। वह वहां तुरंत पहुंच जाते हैं जहां से मोदी सरकार को कोसा जा सकता है। अभी तक की उनकी सियासत देखी जाये तो वह देश के किसी भी हिस्से में हुई दर्दनाक मौत पर खूब सियासत करते हैं। बुंदेलखंड में भूख से मरते किसानों, मुजफ्फनगर दंगा, अखलाक की मौत, हैदराबाद में एक दलित छात्र की आत्महत्या जैसे मामलों को हवा देने में राहुल को काफी मजा आता है।

राहुल बाबा, जो मीडिया पक्षपाती है, वही आपका साथी है

: संदर्भ – राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ दौरा : दूसरे अन्य दौरों की तरह ही कांग्रेस के युवराज तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे ने भी खासी सुर्खियां बटोरी। पार्टी के रॉक स्टार बन चुके युवराज राहुल गांधी के दौरे का मकसद साफ था कि वे यहां उन आदिवासियों की व्यथा-कथा जानने पहुंचे थे जो जल, जंगल, जमीन, आजीविका और अपनी संस्कृति बचाने के लिए सालों से उस औद्योगिक-माफिया से लड़ रहे हैं जिसकी गिद्धदृष्टि लगभग 30 हजार हेक्टेयर में फैली कोयला और बाक्साइट जैसी प्राकृतिक संपदा है और जिसे वह कोल आबंटन जैसी सरकारी प्रक्रिया का ठप्पा लगवाकर आराम से लीलना चाहते हैं।