पुष्प रंजन-
US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोपों पर अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे और ग्रुप के वरिष्ठ कार्यकारी सागर अडानी को सीधे ईमेल के माध्यम से समन भेजने के लिए न्यूयॉर्क की अदालत से अनुमति मांगने के बाद, सूचीबद्ध अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर शुक्रवार को गिर गए, जिसमें 3.3 प्रतिशत से 14.6 प्रतिशत के बीच गिरावट आई। न्यूयॉर्क ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अपनी नवीनतम प्रस्तुति में, SEC ने कहा कि भारत सरकार ने पहले समन भेजने के दो अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया था।
अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर शुक्रवार को BSE पर 10.8 प्रतिशत गिर गए, जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के शेयर क्रमशः 14.6 प्रतिशत, 12 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत गिर गए। BSE का 30-शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स लगभग 1 प्रतिशत या 769 अंक गिरकर 81,537 अंक पर बंद हुआ, और रुपया शुक्रवार को 91.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
20 नवंबर, 2024 को एसईसी ने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी, जो कंपनी के कार्यकारी निदेशक हैं, के खिलाफ एक सिविल शिकायत दायर की. इसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर के भुगतान या भुगतान के वादों से जुड़ी एक रिश्वतखोरी योजना को अंजाम दिया.
ये आरोप सितंबर 2021 में अडानी ग्रीन द्वारा जारी बॉन्ड ऑफरिंग से जुड़े हैं, जिसके ज़रिये अमेरिकी निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई थी. एसईसी की शिकायत के अनुसार, इस बॉन्ड ऑफरिंग से जुड़े दस्तावेज़ों में अडानी ग्रीन के भ्रष्टाचार-रोधी और रिश्वत-रोधी कार्यक्रमों को लेकर किए गए दावे गौतम और सागर अडानी के कथित आचरण के मद्देनज़र ‘महत्वपूर्ण रूप से झूठे या भ्रामक’ थे.
इसी दिन न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के लिए अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने एक समानांतर आपराधिक मामला भी दर्ज किया. इसमें अडानी बंधुओं और अन्य लोगों पर प्रतिभूति धोखाधड़ी की साज़िश, वायर फ्रॉड की साज़िश और प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए.
हालाँकि, अडानी समूह ने 21 नवंबर, 2024 को जारी अपने बयान में इन आरोपों को ‘निराधार’ बताया और कहा कि वह ‘सभी संभव कानूनी विकल्पों’ का सहारा लेगा. अडानी समूह को हेग कन्वेंशन (नागरिक या वाणिज्यिक मामलों में न्यायिक और गैर-न्यायिक दस्तावेज़ों की विदेशों में तामील से जुड़ा समझौता) के तहत नोटिस भेजने की एसईसी की कोशिशें 17 फरवरी 2025 को शुरू हुई थीं. इसी दिन एसईसी ने औपचारिक रूप से भारत के विधि एवं न्याय मंत्रालय को दस्तावेज़ भेजे थे, जो इस अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत भारत की नामित ‘सेंट्रल अथॉरिटी’ है.
25 फरवरी 2025 की तारीख वाले पत्रों में – जिनकी प्रतियां 21 जनवरी को एसईसी द्वारा दायर याचिका के साथ संलग्न की गई थीं – मंत्रालय ने इन अनुरोधों को अहमदाबाद की जिला एवं सत्र न्यायालय को अग्रेषित किया. साथ ही निर्देश दिया गया कि ‘अनुरोध और मामले से जुड़े दस्तावेज़ों का एक सेट संबंधित पक्ष/पक्षों को तामील कराया जाए और तामील के प्रमाण से जुड़ी रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाए.’
इसके कुछ हफ्तों बाद 16 अप्रैल 2025 को मंत्रालय ने इन अनुरोधों को बिना तामील किए वापस लौटा दिया. एसईसी के वकील क्रिस्टोफर एम. कोलोराडो को भेजे गए एक जैसे पत्रों में – जो याचिका के साथ संलग्न हैं – मंत्रालय ने लिखा कि ‘यह पाया गया है कि फॉरवार्डिंग लेटर पर न तो कोई मुहर है और न ही हस्ताक्षर, और मॉडल फॉर्म पर भी अनुरोध करने वाली प्राधिकरण की कोई मुहर नहीं है.’
इसके बाद एसईसी ने 27 मई 2025 को अनुरोध दोबारा भेजा. इसके साथ एक पत्र भी संलग्न किया गया, जिसमें कहा गया कि हेग कन्वेंशन के तहत न तो कवर लेटर और न ही मॉडल फॉर्म पर मुहर लगाना अनिवार्य है. एसईसी ने उस पत्र में यह भी बताया कि उसके पास ऐसे कई पुराने रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनमें हेग सर्विस कन्वेंशन के तहत भारत की सेंट्रल अथॉरिटी को भेजे गए अनुरोध बिल्कुल इसी तरह के फॉर्मेट में थे और उन्हें बिना किसी समस्या के तामील कर दिया गया था. इसमें दिसंबर 2024 तक भेजे गए अनुरोध भी शामिल हैं, जिन पर कोई मुहर नहीं थी और कवर लेटर डिजिटल रूप से साइन किए गए थे.
एसईसी ने यह भी कहा कि वह अन्य देशों की सेंट्रल अथॉरिटीज़ को भी नियमित रूप से ऐसे ही अनुरोध भेजता है—बिना मुहर के और डिजिटल हस्ताक्षर वाले फॉरवार्डिंग लेटरों के साथ—और आमतौर पर उन पर कोई आपत्ति नहीं की जाती. इसके बावजूद, भारतीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से कोई जवाब नहीं आया. जब एसईसी के ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स ने 3 अप्रैल 2025 को स्थिति जानने के लिए एक फॉलो-अप पत्र भेजा, तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. 12 सितंबर को भेजा गया दूसरा रिमाइंडर पत्र भी बिना जवाब के ही रह गया.
एसईसी यह भी चाहती है कि प्रतिवादियों को उनके कारोबारी ईमेल पतों पर ईमेल के ज़रिये नोटिस भेजा जाए. एजेंसी ने कहा कि शिकायत दायर करने से पहले की जांच के दौरान उसे 100 से अधिक दस्तावेज़ मिले, जिनसे पता चलता है कि सागर अडानी ने अडानी ग्रीन से जुड़े कारोबारी कामकाज के लिए अपने कॉर्पोरेट ईमेल का इस्तेमाल किया था. इनमें बॉन्ड ऑफरिंग से जुड़े दस्तावेज़ भी शामिल हैं, साथ ही मार्च 2024 तक के हालिया दस्तावेज़ भी हैं.
इसी तरह, एसईसी को ऐसे दस्तावेज़ भी मिले हैं, जिनसे पुष्टि होती है कि गौतम अडानी ने भी अपने कारोबारी ईमेल का इस्तेमाल व्यावसायिक संवाद के लिए किया था. इनमें अडानी ग्रीन से जुड़ी बैठकों के पत्राचार शामिल हैं. यही ईमेल पता भारत के प्रतिभूति नियामक को दी गई एक सबमिशन में उनके संपर्क ईमेल के रूप में भी दर्ज है. एसईसी ने लिखा, ‘यह मानने के ठोस आधार हैं कि दोनों ईमेल पते अभी भी सक्रिय हैं और उन पर निगरानी रखी जाती है.’एसईसी ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि प्रतिवादी इस मुक़दमे के मूवमेंट से पूरी तरह अवगत हैं, जिसका प्रमाण उनके सार्वजनिक बयान, नियामकीय फाइलिंग्स और अमेरिकी वकीलों की नियुक्ति है.


