अरविंद शर्मा-
भाई निशांत कौशिक को बधाई! प्रतिभा न कभी छुपती है, न दबती है। समय आने पर अपनी पहचान खुद बना लेती है। वरिष्ठ पत्रकार निशांत कौशिक की ताजा उपलब्धि इसी सत्य का प्रमाण है। उन्हें हिंदुस्तान अखबार में एनसीआर का संपादक बनाया गया है, जो उनके समर्पण, मेहनत और पेशेवर ईमानदारी की स्वाभाविक परिणति है। इस उपलब्धि पर उन्हें दिल से बधाई और शुभकामनाएं।

निशांत को मैं डेढ़ दशक से ज्यादा समय से देख-सुन रहा हूं। हिंदुस्तान अखबार में अप्रैल 2010 से जनवरी 2015 तक समाचार संपादक था। 2011 में जब मेरा तबादला जमशेदपुर से मेरठ हुआ, तब निशांत बुलंदशहर में ब्यूरो प्रभारी थे। शुरुआती दिनों में खबरें, कंटेंट और काम की बारीकियों के सिलसिले में मेरी अधिकतर बातचीत फोन तक सीमित रही। कंटेंट डेवलपमेंट के सिलसिले में दो-तीन बार बुलंदशहर भी जाना हुआ। हर बार उनकी कार्यशैली, सजगता और सहज व्यवहार ने गहरा प्रभाव छोड़ा।
कुछ ही समय बाद उनका तबादला मेरठ हो गया। तब वह मेरे और निकट आ गए। दफ्तर के भीतर भी और बाहर भी—दिन में कई-कई बार मुलाकात और बातचीत होने लगी। मैंने उन्हें हर परिस्थिति में एक सच्चे “खबरची” के रूप में पाया। जो जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने न केवल पूरा किया, बल्कि उसे बेहतर बनाने की कोशिश भी की।
अखबार के काम के सिलसिले में कभी-कभी विचारों में मतभेद भी हुए, पर निशांत की असहमति में हमेशा शालीनता रही। वे अपनी बात रखते थे, पर बिना किसी कटुता के। यह गुण उन्हें भीड़ से अलग करता है। खबरों की उनकी समझ गहरी है। समाज और व्यवस्था की परतों को पढ़ने की उनकी क्षमता उल्लेखनीय है। सबसे बड़ी बात कि उनका स्वभाव अत्यंत मिलनसार है, जो रिश्तों को सहज और मजबूत बनाता है।
फरवरी 2015 में मैं मेरठ छोड़कर पटना दैनिक जागरण चला गया, लेकिन संवाद का सिलसिला कभी टूटा नहीं। समय के साथ उन्होंने अपने काम से नई पहचान बनाई और एनसीआर में मेट्रो एडिटर की जिम्मेदारी संभाली। अक्टूबर 2022 में जब मैं दिल्ली आया, तब बातचीत तो कई बार हुई, पर मुलाकात नहीं हो सकी।
आज निशांत जब नई जिम्मेदारी संभाल रहे हैं तो विश्वास और भी दृढ़ होता है। वे न केवल इस भूमिका के साथ न्याय करेंगे, बल्कि उसे नई ऊंचाई भी देंगे। मेरी कामना है कि वे निरंतर आगे बढ़ते रहें। हर मंजिल को पार करते हुए साहसी मुसाफिर की तरह अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हों।


