कानपुर: सिविल लाइंस क्षेत्र में करोड़ों रुपये की नजूल संपत्ति पर कब्जे और गैंगस्टर एक्ट के मामले में जेल जा चुके अवनीश दीक्षित को अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट निशा श्रीवास्तव की अदालत ने पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी संपत्ति कुर्की आदेश को सही ठहराते हुए अवनीश की याचिका खारिज कर दी है।
अवनीश दीक्षित ने जेल से रिहा होने के बाद अदालत में याचिका दाखिल कर 29 सितंबर 2025 को जारी कुर्की आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। उनका कहना था कि गैंगस्टर एक्ट के तहत केवल वही संपत्ति कुर्क की जा सकती है जो अपराध से अर्जित की गई हो। जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध न हो जाए, तब तक उसकी संपत्ति कुर्क नहीं की जा सकती।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
अवनीश की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि उनके खिलाफ अब तक कोई अपराध साबित नहीं हुआ है। इसलिए पुलिस कमिश्नर का कुर्की आदेश कानून के अनुरूप नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया कि अवनीश की पत्नी प्रतिमा ने नवंबर 2019 में अपना एक फ्लैट 34 लाख रुपये में बेचा था। इसके बाद अवनीश और उनकी पत्नी ने बैंक से 41 लाख रुपये का लोन लेकर किदवईनगर स्थित मकान करीब 68.56 लाख रुपये में खरीदा था।
बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि अवनीश के एक बैंक खाते में करीब 29 हजार रुपये और दूसरे खाते में मात्र 1300 रुपये थे, जबकि उनकी पत्नी प्रतिमा के खातों में 70 हजार और 2561 रुपये जमा थे।
फॉर्च्यूनर कार को लेकर भी दलील दी गई कि उसे खरीदने के लिए 10 लाख रुपये का बैंक लोन लिया गया था और 30 लाख रुपये साथी सुनील कुमार शुक्ला से उधार लिए गए थे। बाद में पुलिस ने इस वाहन को भी कुर्क कर लिया।
अभियोजन ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि पुलिस कमिश्नर के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि अवनीश दीक्षित ने अपने गैंग के सदस्यों के साथ मिलकर जमीनों पर कब्जा करने, रंगदारी वसूलने, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े जैसे अपराध किए हैं। इन्हीं आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन से संपत्तियां खरीदी गईं।
अभियोजन के मुताबिक, अवनीश और उसके परिजनों के नाम पर करीब 2.68 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति खरीदी गई, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत सवा तीन करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा मकान के इंटीरियर पर ही करीब 1.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि अवनीश की पत्नी द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न में दर्शाई गई आय और वास्तविक संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर है। इससे साफ होता है कि संपत्तियां वैध आय से अर्जित नहीं की गईं।
अदालत ने किन तथ्यों को माना अहम
सुनवाई के दौरान अदालत ने कई बिंदुओं पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि फॉर्च्यूनर कार खरीदने के लिए सुनील कुमार शुक्ला से 30 लाख रुपये कब और किस खाते में लिए गए, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।
कोर्ट ने यह भी माना कि 10 लाख रुपये का बैंक लोन बहुत कम समय में चुका दिया गया, जबकि अवनीश और उनकी पत्नी की आय इतनी नहीं दिखती कि वे इतनी जल्दी कर्ज चुका सकें।
अदालत ने कहा कि अवनीश ने कृषि भूमि होने की बात तो कही, लेकिन यह नहीं बताया कि मकान या वाहन खरीदने के लिए भूमि बेची गई थी या नहीं। अदालत ने उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि को भी मजबूत नहीं माना।
“संगठित गिरोह का गैंग लीडर”
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अवनीश दीक्षित एक संगठित गिरोह का गैंग लीडर है, जिसके 16 सक्रिय सदस्य हैं। यह गिरोह कब्जा, धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। अदालत के अनुसार, इन्हीं गतिविधियों के जरिए संपत्तियां अर्जित की गईं।
रिकॉर्ड के अनुसार, अवनीश पर कुल 16 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से पांच मामले कोतवाली, अनवरगंज और बादशाहीनाका थाना क्षेत्रों में गैंग के साथ मिलकर किए गए अपराधों से जुड़े हैं।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी कुर्की आदेश को वैध मानते हुए अवनीश दीक्षित की याचिका खारिज कर दी।


