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सियासत

इंडियन एक्सप्रेस वाले राजकमल झा इस हेडिंग से भले ही मोदी दरबार में नंबर बना लें…

Front page of The Indian Express with the headline “At INDIA bloc meeting, allies take aim at Cong,” by Manoj CG & Asad Rehman, June 8, and two columns of article text.

प्रशांत टंडन-

इंडियन एक्सप्रेस के संपादक राजकलम झा भले ही इस तरह की हेडलाइन से मोदी दरबार में नंबर बना लें लेकिन सच ये है कि कल इंडिया गठबंधन की बैठक एक बड़ी राजनीतिक घटना थी.

2029 के चुनाव का राजनीतिक रोडमैप दिखाई दे रहा है जो 2024 से कहीं ज्यादा स्पष्ट और मज़बूत है.

बैठक के दिन ही तृणमूल कांग्रेस में ऑपरेशन लोटस करके बीजेपी ने विपक्षी एकता को और मजबूत करने का कारण दे दिया. क्षेत्रीय पार्टियों को समझ में आ गया है कि B टीम बनोगे तो मरोगे.

इंडिया गठबंधन को सिर्फ गोदी मीडिया को लेकर अपना कंफ्यूज़न दूर करना है बाकी सब इनके पक्ष में हो जायेगा. बड़े नेताओं को मीडिया को लेकर कड़े और स्मार्ट फैसले लेने होंगे. जिनके चेहरे मीडिया में चमक जाते हैं वो शायद अपने नेताओं को ईमानदार सलाह न दें. ये कॉल राहुल गांधी, खड़गे जी और बाकी पार्टियों के अध्यक्षों को लेनी है.


मुकेश कुमार-

इंडिया गठबंधन जिस अंदाज़ में चल रहा है उससे बहुत सारे लोग हताश हैं। वे उसकी उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। पूछ रहे हैं कि गठबंधन आख़िर कर क्या रहा है। क्या उसने कोई ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसकी वज़ह से उसे बनाए रखा जाए।

ये दलील अब इस हद तक आगे बढ़ाई जा रही है कि कांग्रेस को अलग हो जाना चाहिए, क्योंकि इंडिया के मोह में वह ख़ुद भी फँस गई है और आगे नहीं बढ़ पा रही है। क्षेत्रीय दल उस पर जब-तब ठीकरा फोड़ते रहते हैं और उसे अपने प्रदेशों में थोड़ा भी स्पेस देने में न नुकुर करते हैं।
इसी खींचतान और ढुलमुलपन का नतीजा है कि इंडिया न नेता तय कर पा रहा है और न ही नीतियाँ और एजेंडा। इससे उसकी छवि ख़राब हो रही है। लेकिन कांग्रेस भी यथास्थिति में फँसकर रह गई है।

लेकिन इस समस्या का दूसरा पक्ष भी है। पक्ष ये है कि क्या इंडिया टूटा तो कांग्रेस क्या अपने दम पर खड़ी होने लायक रहेगी। वह अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में ही अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही और अगर उसने लोकसभा चुनाव में अपनी सीटें दोगुनी कर ली थीं तो इसीलिए कि विभिन्न राज्यों में तालमेल से उसे लाभ हुआ।

फिर इससे भी बड़ा मुद्दा तो ये है कि अगर इंडिया टूटा तो सबसे बड़ा फ़ायदा तो मोदी और उनकी पार्टी को होगा….वे तो जाने कब से इंडिया को बदनाम करने में लगे हैं और दिन-रात उसे तोड़ने के उपाय सोचते रहते होंगे। ज़ाहिर है कि इससे उनकी मन मांगी मुराद पूरी हो जाएगी।

क्या कांग्रेस या राहुल गाँधी या उनके समर्थक ये चाहते हैं….क्या वे इस परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं या फिर उन्हें किसी और विकल्प के रूप में सोचना चाहिए जिसमें इंडिया को मज़बूत करने के उपाय भी शामिल हों….


हफ़ीज़ किदवई-

हमारा इंडिया यही है, जिसमें कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर आवाज़ अपनी पहचान के साथ शामिल है। जो भी अखिलेश यादव के खिलाफ लिखता है या फिर राहुल गांधी के ख़िलाफ़ लिखता है या फिर तेजस्वी के खिलाफ लिखता है, वह इसको कभी समझ ही नहीं सकता। आपको अगर वाक़ई मुल्क से मुहब्बत है, तो इस वक़्त लेकिन वेकिन लगाए बगैर इंडिया के साथ खड़े होइए।

Group of leaders seated on stage at a press conference with a large INDIA banner behind them and cameras in the crowd.

जब एकता की ज़रूरत हो,तब एक दूसरे की टांग खींचने वाले ही गद्दार कहलाते हैं। अगर दिल से इस गठबंधन के साथ हैं, तो इसके हर लीडर को बराबर से सम्मान दीजिये। यह वक़्त किसी को नीचा दिखाने का नहीं है और न ही पास्ट याद दिलाने का है, वरना यहां कोई दल ऐसा नहीं जिसके भूतकाल में सब सही हो, इसलिए भविष्य के लिए वर्तमान में एकजुट होइए।

मेरे नज़दीक हर वह व्यक्ति बीजे पार्टी का एजेंट ही है, जो इस नाज़ुक वक़्त में अखिलेश यादव या फिर राहुल गांधी पर हमलावर है। निजी खुन्नस, निजी लाभ या निजी डर को किनारे रखिये और एक होना सीखिए।

मुझे राहुल जी, सोनिया जी और अखिलेश जी इसीलिए पसन्द हैं कि यह वर्तमान में पाँव रखकर भविष्य का रास्ता तय करते हैं। यह पीछे पलटकर किसी को कोसते नहीं हैं। एक साथ बैठने के लिए बहुत कुछ भुलाना पड़ता है। मेरा इंडिया के हर सहयोगी से कहना है कि अगर वाक़ई आप चाहते हैं कि यह मज़बूती से ज़मीन पर उतरे, तो एक दूसरे के खिलाफ बोलने, लिखने और साजिश करने से बचिए।

सबको मिलकर गठबंधन धर्म का पालन करना होगा। हमारी लीडरशिप जब एक है तो कुछ मुट्ठीभर समर्थक इनके बीच क्यों आग लगाते फिरते हैं। वह बोल दें कि भाई हम गठबंधन नहीं चाहते और अपने नेता को कायल कर लें। यहां हम लोग दिन रात इन्हें एक करने और लोगों को इनका साथ देने की अपील करते हैं, काम करते हैं। मगर कुछ लोग हमारे दुश्मनों को लाभ पहुँचा देते हैं। वह हमारी इस संयुक्त लीडरशिप में एक दूसरे को बुरा भला कहते हैं, यह अच्छी बात नहीं है।

मैं इंडिया के साथ हूँ और दिल व दिमाग़ दोनों से साथ हूँ। मेरा कोई लाभ कहीं और नहीं जुड़ा है। न ही कोई लालच या डर है और न ही किसी के इशारों पर चलता हूँ। मेरी डोर मेरे पास है, इसलिए मैं इनमें से किसी को नहीं कोसता हूँ। मेरे लिए इंडिया की जीत, देश की जीत है।

अभी समय है, चेत जाइये। यह गठबंधन रहेगा। बहुत जल्द केंद्र की सत्ता बदलेगी और राज्य की भी, जो भी इसे तोड़ने में लगे हैं। वह बुरे दिनों का सामना करेंगे। ईमानदारी से इसको मज़बूत करने में जुटिये ।

कोई ऐसा काम मत कीजिये, जिसका एक प्रतिशत लाभ भी बीजे पार्टी को मिले। इतना समझदार बनिये।

आज की बैठक बहुत महत्वपूर्ण और फ्रुटफुल रही है। बहुत कुछ सामने आया है, बहुत कुछ सामने आएगा। वह जा रहे हैं,बशर्ते सब एक रहें। इसलिए थोड़ी गम्भीरता बरतिए, ज़रूरी है।

अखिलेश यादव, राहुल, तेजस्वी या किसी भी इंडिया सहयोगी पर हमले मत कीजिये। वरना आपकी गणना उधर होगी, जिधर आपको जाना पसंद नहीं है। टॉप लीडरशिप को भी यह पसन्द नहीं है, देर सबेर आपको समझ आ जाएगा। संयम बरतिए, बेहतरीन वक़्त आने जा रहा है। हम सब इंडिया हैं।

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