बठिंडा के पत्रकार रत्तनदीप सिंह धालीवाल ने अपने खिलाफ दर्ज की गई कई पुलिस शिकायतों को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई अब बुधवार को होगी।
दरअसल, हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान धालीवाल ने दावा किया था कि पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी (आप) अपने करीब 32 मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। इस बयान के बाद ‘आप’ के कई विधायकों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके आधार पर विभिन्न जिलों की पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति रोहित कपूर ने कहा कि अदालत किसी भी प्रकार का निर्देश जारी करने से पहले संबंधित पॉडकास्ट को स्वयं देखना चाहेगी। धालीवाल ने अपनी याचिका में मांग की है कि उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों और उन पर आधारित पुलिस कार्रवाई को रद्द किया जाए।
याचिका में पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उनके दावों का तथ्यात्मक खंडन करने या सार्वजनिक रूप से जवाब देने के बजाय पार्टी नेतृत्व ने विधायकों को उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग विधायकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों की भाषा लगभग एक जैसी है और ऐसा प्रतीत होता है कि वे पहले से तैयार किसी एक प्रारूप (टेम्पलेट) पर आधारित थीं, जिनमें केवल शिकायतकर्ताओं के व्यक्तिगत विवरण भरे गए थे।
याचिका के अनुसार, शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि उनके वीडियो से पंजाब में वैमनस्य और सार्वजनिक अशांति का माहौल पैदा हुआ। धालीवाल का कहना है कि ये आरोप न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, बल्कि कानूनी रूप से भी टिकाऊ नहीं हैं।
पत्रकार के मुताबिक, शिकायतों के बाद उन्हें पटियाला, अमृतसर, बठिंडा और फिरोजपुर से पुलिस नोटिस मिले, जिनमें पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच में सहयोग की पेशकश करने के बावजूद पुलिस ने उनके घर पर तलाशी अभियान चलाया। धालीवाल ने इसे निष्पक्ष जांच के बजाय डराने-धमकाने की कार्रवाई बताया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मामला कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि पंजाब में पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक कानूनों के कथित दुरुपयोग के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है। धालीवाल का तर्क है कि राज्य में प्रेस की स्वतंत्रता पर दबाव बनाने के लिए कानून के इस्तेमाल के कई उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं।
अब हाईकोर्ट पॉडकास्ट की सामग्री और शिकायतों के आधार की समीक्षा करने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा।


