पंजाब के पत्रकार और यूट्यूबर रत्तनदीप सिंह धालीवाल के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों द्वारा दर्ज कराई गई कई शिकायतों के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने फिलहाल धालीवाल के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने को कहा है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि “किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ एजेंडा चलाना स्वतंत्र पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता।”
न्यायमूर्ति रोहित कपूर ने सुनवाई के दौरान कहा, “यदि केवल एक ही राजनीतिक दल के खिलाफ एजेंडा है, तो इसे स्वतंत्र पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता। जब हम कहते हैं कि कोई व्यक्ति पत्रकार है और वह कुछ बातें सार्वजनिक मंच पर रखना चाहता है, तो यह अच्छी बात है। लेकिन हर नागरिक कानून के समक्ष समान है। चाहे वह पत्रकार हो या वकील, किसी को भी विशेष प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) प्राप्त नहीं है।”
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि किसी व्यक्ति के लिए 24 घंटे के भीतर पूरे राज्य में अलग-अलग स्थानों पर पेश होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा, “यह नहीं कहा जा रहा कि उन्हें कोई विशेष छूट है, लेकिन कम से कम उचित नोटिस दिया जाना चाहिए। कोई व्यक्ति 24 घंटे के भीतर पूरे राज्य में अलग-अलग जगहों पर उपस्थित नहीं हो सकता।”
दरअसल, 21 मई को रत्तनदीप सिंह धालीवाल ने अपने पॉडकास्ट में दावा किया था कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी अपने लगभग 32 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दे सकती। इसके बाद पार्टी के कई विधायकों ने उनके खिलाफ पुलिस शिकायतें दर्ज कराईं और पंजाब के विभिन्न जिलों की पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी किए।
सुनवाई के दौरान पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पत्रकार को उन दस्तावेजों को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया जाए, जिनके आधार पर उन्होंने ‘आप’ विधायकों के टिकट कटने का दावा किया था।
इस पर हाईकोर्ट ने धालीवाल को अपने दावों के समर्थन में अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
धालीवाल ने अपनी याचिका में कहा है कि वह “रत्तनदीप सिंह धालीवाल” और “टॉक विद रत्तन” नाम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म संचालित करते हैं और उनकी पत्रकारिता के कारण उन्हें प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2025 में पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उनके खिलाफ टिप्पणी की थी। इसके बाद विज्ञापन खर्च समेत कुछ मुद्दों पर रिपोर्टिंग जारी रखने पर उनके कंटेंट के खिलाफ बौद्धिक संपदा (आईपी) से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिसके चलते उनका फेसबुक पेज भी हट गया।
मौजूदा विवाद मई 2026 में प्रसारित एक पॉडकास्ट से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषण किया था। अपनी याचिका में उन्होंने पॉडकास्ट से संबंधित सभी शिकायतों, पूछताछ और समन की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
मामले की अगली सुनवाई अब 16 जून को होगी।
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