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उत्तराखंड

हरिद्वार में कई पत्रकारों पर मारपीट का आरोप; पुलिस जांच में जुटी!

हरिद्वार। हरिद्वार में जंगल सफारी के दौरान हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। एक व्यक्ति ने खुद को मारपीट और अभद्रता का शिकार बताते हुए कुछ कथित पत्रकारों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला कोतवाली तक पहुंच गया है, जिसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता तालिब हसन का आरोप है कि जंगल सफारी के दौरान उनका विवाद कुछ लोगों से हो गया, जिसके बाद उनके साथ अभद्रता की गई और मारपीट की गई। उन्होंने अपनी तहरीर में हयातपाल, वैभव सूना, राहुल शर्मा, धनराज, अरुण समेत अन्य लोगों के नाम शामिल करते हुए कार्रवाई की मांग की है। तालिब हसन का दावा है कि इनमें से कुछ लोग खुद को पत्रकार बताते हैं।

बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ, जब जंगल सफारी में अन्य पर्यटक भी मौजूद थे। पर्यटकों के सामने हुए इस विवाद ने न सिर्फ सफारी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और आचार-संहिता के पालन को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि विवाद के दौरान उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया। वहीं, दूसरी ओर आरोपित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में घटना का दूसरा पक्ष सामने आना बाकी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तहरीर प्राप्त कर ली है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यदि सफारी परिसर या आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध होती है, तो उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना इसलिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि आरोप ऐसे लोगों पर लगाए गए हैं, जिन्हें कथित तौर पर पत्रकार बताया जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही का मामला होगा, बल्कि पत्रकारिता की आड़ में प्रभाव के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

फिलहाल पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जंगल सफारी के दौरान हुआ विवाद महज कहासुनी का मामला था या वास्तव में मारपीट और अभद्रता जैसी घटनाएं भी हुईं।

Handwritten Devanagari document, a formal letter or report with a header, multiple paragraphs, and signatures at the bottom.
Scanned medical form with vitals, notes, and an opinion section, including stamps.
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