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शब्दचर्चा 93 : स्मृति मलहोत्रा शादी के बाद क्या हुईं – ईरानी या इरानी?

नीरेंद्र नागर-

कुछ लोग हमेशा चर्चा में रहते हैं चाहे वे सत्ता में रहें या नहीं। जैसे Smriti Irani 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से हारने के बाद भी ख़बरों में रहती हैं। जैसे दो सप्ताह पहले यह ख़बर आई कि यूपी पंचायत चुनाव की अंतिम वोट लिस्ट से उनका नाम ग़ायब रहा। फिर चार दिन पहले यह समाचार आया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा कार्यकारिणी से अमेठी का कोई नेता शामिल नहीं किया गया और इसके लिए भी स्मृति जी की हार को ही ज़िम्मेदार ठहराया गया।

ख़ैर, हमें स्मृति जी की चर्चाओं से कोई मतलब नहीं। मतलब तो है उनके नाम से जो हिंदी मीडिया में दो तरह से लिखा जा रहा है। अधिकतर वेबसाइटों पर उनका नाम स्मृति ईरानी लिखा जा रहा है जबकि अमर उजाला और नवभारत टाइम्स में मुझे स्मृति इरानी मिला। आज की शब्दचर्चा 93 में हम यही जानेंगे कि बीजेपी की इस बड़बोली नेत्री का सरनेम ईरानी है या इरानी।

अगर इतिहास के आधार पर बात करें तो सही सरनेम ईरानी ही होना चाहिए क्योंकि स्मृति मलहोत्रा ने जिस पारसी शख़्स से शादी की, उसका परिवार ईरान से तालुल्क़ रखता है और इस हिसाब से सरनेम ईरानी ही होना चाहिए।

फ़िल्मी दुनिया में कई मशहूर कलाकार रहे हैं जिनका सरनेम ईरानी है। जैसे बीते ज़माने की बाल कलाकार डेज़ी ईरानी, उनकी बहन और जावेद अख़्तर की पहली पत्नी हनी ईरानी, प्रख्यात अभिनेत्री अरुणा ईरानी और हास्य कलाकार बोमन ईरानी।

लेकिन स्मृति साहिबा की ससुराल में संभवतः सरनेम के तौर पर इरानी ही लिखा जाता है और मंत्री रहते हुए मैडम ने मीडिया को सख़्त हिदायत दे रखी थी कि उनका सरनेम इरानी लिखा जाए। उनके मंत्रिकालीन लेटर हेड पर भी स्मृति इरानी ही लिखा जाता था और हस्ताक्षर करते समय भी वे इरानी ही लिखती थीं।

Official government letterhead from Smriti Zubin Irani, Minister for Women & Child Development, dated 25 October 2023, in Hindi.

इसके पीछे क्या तर्क है, यह तो वे ही जानें क्योंकि Iran को हिंदी में ही नहीं, फ़ारसी में भी ईरान (ایران) ही लिखा जाता है, न कि इरान। हाँ, अंग्रेज़ी में Iran का उच्चारण इरान (ɪˈrɑːn) है। सो यदि कोई Iran के अंग्रेज़ी उच्चारण के हिसाब से Irani का लिप्यंतर करना चाहे तो इरानी हो सकता है।

इस विषय में जाँच-पड़ताल करते समय मुझे एक रोचक जानकारी मिली कि भारत में जो पारसी समाज है, उनके दो तरह के समूह हैं। एक समूह वह जिनके पूर्वज 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच भारत आए जबकि दूसरा समूह वह जिनके पूर्वज 19वीं और 20वीं शताब्दी के मध्यवर्ती काल में भारत आए। यह जो बाद वाला समूह आया, उसके लोगों ने अपना पुश्तैनी सरनेम छोड़कर अपना सरनेम Irani ही रख दिया।

इन दो पारसी समूहों की भाषाओं और खानपान में भी अंतर है हालाँकि आपस में मिलना-जुलना और शादी-ब्याह का रिश्ता बरक़रार है।

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