देवास। पत्रकारिता के नाम पर डॉक्टरों को डराने और उनसे लाखों रुपये वसूलने के आरोप में देवास पुलिस ने एक कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि गिरोह की महिलाएं पहले मरीज या नर्स बनकर डॉक्टरों के पास पहुंचती थीं। डॉक्टरों को गर्भपात या भ्रूण के लिंग परीक्षण जैसे गैरकानूनी काम के लिए उकसाया जाता और इसी दौरान गुप्त कैमरे से बातचीत रिकॉर्ड कर ली जाती। बाद में इसी रिकॉर्डिंग को कथित स्टिंग ऑपरेशन बताकर डॉक्टरों को डराया जाता और वीडियो वायरल करने या जेल भिजवाने की धमकी देकर लाखों रुपये मांगे जाते।
मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे विनय अरोरा समेत कई लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं। आरोपी ने अदालत में खुद को पत्रकार बताते हुए दावा किया कि वह भ्रूण हत्या के खिलाफ खोजी पत्रकारिता कर रहा था। लेकिन अदालत के सामने जांच में सामने आए तथ्यों ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अदालत ने मामले को पत्रकारिता के नाम पर डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने और डराकर रकम वसूलने से जुड़ा गंभीर मामला माना। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड के आधार पर एक नेटवर्क के काम करने की बात सामने आई है।
पहले डॉक्टरों को उकसाया, फिर वीडियो दिखाकर डराया
पुलिस के मुताबिक गिरोह की महिला सदस्य डॉक्टरों के पास मरीज या नर्स बनकर जाती थीं। आरोप है कि वे परिवार में पहले से बेटियां होने की बात कहकर बेटे की चाहत का हवाला देतीं और डॉक्टरों पर गर्भपात या भ्रूण का लिंग पता करने के लिए दबाव बनाती थीं।
इसी दौरान बातचीत को कथित तौर पर छिपे कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया जाता था। इसके बाद गिरोह के पुरुष सदस्य डॉक्टरों के सामने वीडियो रखते और उसे स्टिंग ऑपरेशन बताते। आरोप है कि वीडियो सार्वजनिक करने, पुलिस को देने या डॉक्टर को जेल भिजवाने का डर दिखाकर रकम मांगी जाती थी।
श्रीराम नर्सिंग होम से मांगे 15 लाख
पहले मामले में शरीफा और सिमरन नाम की महिलाएं अपने साथी राजवीर उर्फ विनय अरोरा के साथ श्रीराम नर्सिंग होम पहुंचीं। आरोप है कि उन्होंने डॉक्टरों पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया।
इसके बाद खुद को पत्रकार बताने वाले राजेश धनेचा और उसके दो साथियों ने डॉक्टरों को कथित तौर पर एडिटेड वीडियो दिखाया। आरोप है कि वीडियो को दबाने के बदले 15 लाख रुपये मांगे गए और रकम नहीं देने पर बदनाम करने की धमकी दी गई।
डॉक्टरों की शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज किया।
माहेश्वरी नर्सिंग होम में भी वही तरीका
पुलिस के मुताबिक गिरोह ने माहेश्वरी नर्सिंग होम को भी निशाना बनाया। आरोप है कि यहां डॉक्टरों का कथित सीक्रेट वीडियो तैयार किया गया और फिर राजेश धनेचा तथा श्रीकांत उपाध्याय ने डॉक्टरों को डराया कि दिल्ली से विजिलेंस और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी टीम आई है और अस्पताल सील होने वाला है।
आरोप है कि अस्पताल को कार्रवाई से बचाने के नाम पर पहले 21 लाख रुपये मांगे गए और बाद में 16 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। डॉक्टर ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये नकद दे दिए।
विनय अरोरा ने खुद को बताया पत्रकार
पुलिस कार्रवाई के बाद विनय अरोरा ने अदालत में अपनी उम्र और बीमारी का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। उसकी ओर से यह भी कहा गया कि वह सच्ची पत्रकारिता कर रहा था और भ्रूण हत्या जैसे गंभीर अपराधों को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन कर रहा था।
लेकिन अभियोजन की ओर से पेश जांच सामग्री में डॉक्टरों को कथित तौर पर फंसाने, वीडियो रिकॉर्ड करने और फिर रकम मांगने के आरोप सामने आए। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड को भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना।
कार से 3.5 लाख रुपये बरामद
मामला अभी जांच के शुरुआती दौर में है। पुलिस के अनुसार सह आरोपी श्रीकांत उपाध्याय की कार से करीब 3.5 लाख रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस का दावा है कि इसमें दो लाख रुपये एक मामले और डेढ़ लाख रुपये दूसरे मामले से जुड़ी कथित वसूली की रकम है।
पुलिस विनय अरोरा के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। गिरोह के कुछ आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क ने अब तक कितने डॉक्टरों और अस्पतालों को निशाना बनाया और कितनी रकम वसूली।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि डॉक्टरों से कितने रुपये वसूले गए। बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी अपराध को छिपे कैमरे से रिकॉर्ड करने के बाद उसी रिकॉर्डिंग के नाम पर पैसे मांगे जाएं, तो क्या उसे पत्रकारिता कहा जा सकता है? अदालत की टिप्पणी ने इसी सवाल को केंद्र में ला दिया है।





