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दीपक शर्मा स्टिंग मुकदमा प्रकरण : आज़म खान को हाईकोर्ट में मुंह की खानी पड़ी

इलाहबाद: पत्रकारों पर मुक़दमे ठोंकने में माहिर यू पी के मुग़ले आज़म मंत्री आज़म खान को आज इलाहबाद हाई कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी। आजतक के पत्रकारों पर चार चार आपराधिक मुक़दमे दर्ज़ करवा कर आज़म खान दीपक शर्मा सहित कई बड़े पत्रकारों को जेल भेजना चाह रहे थे। ये मुक़दमे १० पुलिस अफसरों के ज़रिये आज़म खान के गोपनीय मौखिक आदेश पर दर्ज़ किये गए थे।  मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस बी के नारायण और जस्टिस विजय लक्ष्मी ने यूपी पुलिस को अंतरिम आदेश दिए की वो मुज़फ्फरनगर दंगो में दिखाए गए ऑपरेशन दंगे को लेकर दर्ज़ मुकदमे में आजतक के किसी भी पत्रकार को गिरफ्तार नही करेंगी।

इलाहबाद: पत्रकारों पर मुक़दमे ठोंकने में माहिर यू पी के मुग़ले आज़म मंत्री आज़म खान को आज इलाहबाद हाई कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी। आजतक के पत्रकारों पर चार चार आपराधिक मुक़दमे दर्ज़ करवा कर आज़म खान दीपक शर्मा सहित कई बड़े पत्रकारों को जेल भेजना चाह रहे थे। ये मुक़दमे १० पुलिस अफसरों के ज़रिये आज़म खान के गोपनीय मौखिक आदेश पर दर्ज़ किये गए थे।  मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस बी के नारायण और जस्टिस विजय लक्ष्मी ने यूपी पुलिस को अंतरिम आदेश दिए की वो मुज़फ्फरनगर दंगो में दिखाए गए ऑपरेशन दंगे को लेकर दर्ज़ मुकदमे में आजतक के किसी भी पत्रकार को गिरफ्तार नही करेंगी।

     एक अप्रत्याशित फैसले में दोनों जजों ने ये भी आदेश दिए की इस मुकदमों की जांच रोक दी जाए। यानी फिलहाल पुलिस किसी भी तरह से पत्रकारों से कोई भी पूछताछ नहीं कर सकेगी। अपराध संख्या ३०६/२०१५, ४४२/२०१५, ३०७/२०१५ एवं २०१५/५३७ के तहत चार मुक़दमे अलग अलग थानो में दीपक शर्मा और अन्य कर्मचारी /अधिकारीगण के खिलाफ दर्ज़ किये गए थे। ये मुक़दमे मानहानि और धोखा धड़ी ( हिडन कैमरा के ज़रिये स्टिंग ऑपरेशन करने ) की धाराओं में लिखाये गए। दीपक शर्मा की तरफ से इलाहबाद के नामी वकील गोपाल चतुर्वेदी ने बहस करते हुए कहा की सारे मुक़दमे दो साल बाद दर्ज़ कराए गए हैं। दो साल तक पुलिस कहाँ सो रही थी। अगर खबर को लेकर आपत्ति थी तो आजतक को या न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैण्डर्ड अथॉरिटी NBSA  को अब तक नोटिस क्यों नहीं भेजा गया। अदालत को ये भी बताया गया की आज़म खान ने इस मामले में विधान सभा में एक जांच समिति गठित करायी थी और उसमे सभी बड़े पत्रकारों को बुलाकर बार बार प्रताड़ित किया गया और उन पर मुक़दमे दर्ज़ कराने की सिफारिश की गयी। अदालत के सामने गांधीनगर लैब की रिपोर्ट भी रखी गयी जिसमें वरिष्ठ वैज्ञानिक एच सी त्रिवेदी ने कहा था की उपलब्ध फुटेज और टीवी में दिखाए गए प्रोग्राम में कोई छेड़छाड़ नही की गयी है। किसी दूसरे व्यक्ति की आवाज़ नहीं डाली गयी और ना ही इसे बीच में एडिट किया गया। अदालत ने पत्रकारों और सरकार के वकीलों का पक्ष सुनकर अंतरिम आदेश दिए की इस मामले में किसी बी पत्रकार  को आगे परेशान न किया जाए और मुकदमों की जांच पर रोक लगा दी। गौरतलब है की जिस वक्त अदालत में याचिका पर सुनवाई हो रही थी उस वक़्त आज़म खान इलाहबाद में ही थे।

भड़ास संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट

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2 Comments

2 Comments

  1. Gopalji

    September 15, 2015 at 5:09 pm

    Good News

  2. Harish

    September 16, 2015 at 10:54 am

    दीपक भाई को बधाई। आपको जीत के लिए और यूपी सरकार और आजम खा को हार के लिए। क्योंकि आजम के सामने यूपी सरकार नतमस्तक है। देखना है कब तो सरकार उन्हें झेलती है। अपने को यूपी सरकार से ऊपर रखने वाले आजम को आज नींद तो नहीं आएगी।

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