द वायर के खिलाफ एफआईआर पर जताई नाराजगी, सीएम से हस्तक्षेप की मांग

लखनऊ स्थित एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने कल अयोध्या में द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर 02 एफआईआर दर्ज कराये जाने का विरोध किया है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए अपने पत्र में नूतन ने कहा है कि अयोध्या जिले के कोतवाली नगर के इंस्पेक्टर सहित एक अन्य व्यक्ति द्वारा एक ही दिन में 02 एफआईआर दर्ज किया जाना प्रथमद्रष्टया सत्ता तथा अधिकारों को दुरुपयोग दिखता है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से जुड़े सन्दर्भों में प्रदेश में विभिन्न थानों में आनन-फानन में दर्ज हो रहे मुकदमों से यह सन्देश जा रहा है कि पुलिस अफसर मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार तथा संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत बताते हुए नूतन ने इन 02 एफआईआर को समाप्त कराये जाने तथा भविष्य में उनसे जुड़े मामलों में बिना मुख्यमंत्री कार्यालय की औपचारिक अनुमति के एफआईआर दर्ज नहीं करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है.

Activist opposes FIR against The Wire, seeks CM intervention

Lucknow based activist Dr Nutan Thakur has opposed the 02 FIRs registered yesterday in Ayodhya against The Wire editor Siddharth Varadrajan.

In her letter sent to UP Chief Minister Yogi Adityanath, Nutan has said that registration of 02 FIRs, including one by the Inspector of Kotwali police station of Ayodhya, prima-facie seem to show the misuse of power and authority.

She said that registration of FIRs related with CM in different police stations of UP on regular basis is giving a message that the police officers are doing so merely to please the CM.

Calling this trend bad against freedom of expression and our democratic system, Nutan has requested the CM to direct closure of these 02 FIRs and issuing directions to the competent authorities not to register FIRs related with his name without formal approval of the CM office.


पत्र संख्या- NT/Complaint/34/2020
दिनांक- 02/04/2020

सेवा में,

श्री योगी आदित्यनाथ,

मुख्य मंत्री,
उत्तर प्रदेश शासन,
लखनऊ

विषय- मु०अ०स० 246/2020 अंतर्गत धारा 66D आईटी एक्ट 2008 थाना कोतवाली अयोध्या, जनपद अयोध्या एवं मु०अ०स० 268/2020 अंतर्गत धारा 188, 505(2) आईपीसी थाना कोतवाली नगर, जनपद अयोध्या विषयक

महोदय,

कृपया कल दिनांक 01/04/2020 को जनपद अयोध्या में वेबसाइट https://thewire.in/ के संपादक श्री सिद्धार्थ वरदराजन के विरुद्ध पंजीकृत हुए मु०अ०स० 246/2020 अंतर्गत धारा 66D आईटी एक्ट 2008 थाना कोतवाली अयोध्या एवं मु०अ०स० 268/2020 अंतर्गत धारा 188, 505(2) आईपीसी थाना कोतवाली नगर का सन्दर्भ ग्रहण करने की कृपा करें, इनमे मु०अ०स० 246/2020 कल समय 17.42 बजे श्री हरवजन गौड़ निवासी दर्शन नगर, अयोध्या द्वारा दर्ज करवाया गया है. इस एफआईआर में मुख्य रूप से कहा गया है कि श्री सिद्धार्थ ने आपको बदनाम करने की नीयत से ट्वीट किया, जिससे श्री हरवजन गौड़ को तकलीफ हुई कि कोई व्यक्ति आपके विषय में ऐसी अनाप-शनाप बातें कैसे कर सकता है, अतः आईटी एक्ट में मुक़दमा दर्ज किया जाये.

मु०अ०स० 268/2020 कल समय 19.03 बजे श्री एन के श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर, कोतवाली नगर द्वारा पंजीकृत कराया गया है जिसके अनुसार श्री सिद्धार्थ ने अपने ब्लॉग पर जनता में अफवाह एवं वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से निम्न सन्देश प्रसारित किया-“On the day the Tablighi Jamaat event was held. Yogi Adityanath insisted that a large fair planned for Ayodhya on the occasion of Ram Navami from March 25 to April 2 would proceed as usual while Acharya Paramhans said that Lord Ram would protect devotees from the coronavirus: One day after Modi announced the curfew like national lockdown on March 24, Adityanath violated the official guidelines to take part in a religious ceremony in Ayodhya along with dozens of people. उन्होंने कहा कि इस समय जब जनपद में धारा 144 लागू की गयी है, तो आपके प्रति इस अशोभनीय टिप्पणी से आम जनमानस में काफी रोष व्याप्त है जो धारा 188, 505(2) आईपीसी की परिधि में आता है.

कृपया यह भी द्रष्टव्य हो कि आपके मीडिया सलाहकार श्री मृत्युंजय कुमार ने ट्विटर हैंडल @MrityunjayUP से कल दिनांक 01/04/2020 को समय 11.19 AM बजे श्री सिद्धार्थ को निम्न ट्वीट किया था- “झूठ फैलाने का प्रयास ना करे, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कभी ऐसी कोई बात नहीं कही है। इसे फ़ौरन डिलीट करे अन्यथा इस पर कार्यवाही की जाएगी तथा डिफ़ेमेशन का केस भी लगाया जाएगा। वेबसाईट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी डोनेशन माँगना पड़ेगा फिर।“ श्री कुमार ने पुनः 8.27 PM शाम में निम्न ट्वीट “हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया ना माफ़ी माँगी। कार्यवाही की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने के की सोच रहे है तो कृपया ऐसे ख़्याल दिमाग़ से निकाल दें” तथा 09.52 शाम में निम्न ट्वीट किया- “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नाम पर झूठ फैलाने के आरोप में @svaradarajan पर अयोध्या में एक और FIR, आशा करता हूँ दो-दो केस लड़ने के लिए इनके पास डोनेशन होगी।“

अनुरोध करुँगी कि आप वर्तमान समय में प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और इस समय यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी थाने में कोई ऐसी एफआईआर लेकर जाता है जिसमे आपका उल्लेख हो तो जाहिर सी बात है कि किसी भी थाना प्रभारी की यह हिम्मत नहीं है कि वह यह एफआईआर दर्ज करने से मना कर दे. यह भी देखने में आया है कि प्रदेश के कई थाने में आपके नाम से संबंधित प्रकरणों में एफआईआर दर्ज हुई है और इन मुकदमों में गिरफ्तारियां भी उतनी ही त्वरित गति से हुई है.

हमारे देश में लोकतान्त्रिक व्यवस्था है जिसमे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को विशेष महत्व दिया गया है. किसी भी व्यवस्था में शासन में बैठे व्यक्तियों से ही अपेक्षा और उम्मीद भी होती है और उन्हें ही आरोपित भी किया जाता हैं. यह स्थिति आपसे पूर्व भी थी और आज भी है. आज आप प्रदेश शासन के सर्वेसर्वा हैं और प्रदेश शासन की समस्त प्रशासनिक एवं वैधानिक शक्तियां अंततोगत्वा आपमें निहित हैं. इन्ही कारणों से आज हर कोई आपसे ही अपेक्षा करता है, आप पर टिप्पणी करता है, आपका नाम लेता है. ऐसे में यदि इनमे से कुछ टिप्पणियां पूर्णतया सत्यपरक नहीं भी हों अथवा थोडा असत्य या भ्रामक भी हो अथवा कुछ चुभने वाली भी हों, तो भी व्यापक देशहित, जनहित एवं न्यायहित में यह कदापि उचित नहीं है कि आपके नाम पर प्रदेश के थाना प्रभारीगण इन सभी मामलों में एफआईआर दर्ज करें एवं गिरफ़्तारी करें. यदि किसी मामले में वास्तव में अभद्र/अमर्यादित टिप्पणी हुई हो, गाली-गलौज हुआ हो, तब तो ठीक है, किन्तु यदि राजनैतिक एवं प्रशासनिक टिप्पणी तक पर एफआईआर दर्ज होने लगे तो इससे निश्चित रूप से शासन तंत्र के अनुचित प्रयोग का सन्देश जाता है.

यदि इसी मामले को लें तो एक दिन में एक ही जनपद में एक ही व्यक्ति पर एक ही विषयवस्तु पर 2-2 एफआईआर, वह भी एक थाने के कोतवाल द्वारा किया जाना स्पष्टतया अनुचित सन्देश देता है. आप अवगत है कि धारा 66D आईटी एक्ट cheating by personation (गलत आइडेंटिटी अपनाने) की स्थिति में बनता है. यहाँ श्री सिद्धार्थ ने अपने ही ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट किया, अतः इसमें cheating by personation का प्रश्न ही नहीं है, फिर भी यह धारा लगायी गयी. यद्यपि सीसीटीएनएस के अनुसार इस मुकदमे में मात्र यही धारा है किन्तु श्री मृत्युंजय कुमार ने अपने ट्वीट में प्रस्तुत एफआईआर की प्रति में इसके साथ हाथ से बढ़ाया गया धारा 188, 505(2) आईपीसी भी दर्शाया है और यही दो धाराएँ इंस्पेक्टर कोतवाली नगर के मुकदमे में भी अंकित हैं. मेरी जानकारी के अनुसार श्री सिद्धार्थ न तो अयोध्या आये थे और न ही उन्होंने भौतिक रूप से धारा 144 का उल्लंघन किया अथवा किसी विधिक आदेश की अवहेलना की. अतः यह धारा 188 आईपीसी का अपराध नहीं है. यह संभव है कि श्री सिद्धार्थ की बात तथ्यात्मक रूप से सही न हो किन्तु इसके बाद भी वह धारा 505(2) आईपीसी का अपराध नहीं है क्योंकि उन्होंने अधिकतम आपके हवाले से यह कहा कि आपने रामनवमी के पूर्ववत होने की बात कही थी. यदि श्री सिद्धार्थ ने एक गलत तथ्य अंकित भी कर दिया हो तो भी इससे धार्मिक समुदायों के मध्य द्वेष पैदा होने की स्थिति आती कहीं से नहीं दिखती है और न ही इसके आधार पर आपराधिक मुक़दमा चलाया जाना सही जान पड़ता है. स्वयं श्री हरवजन गौड़ तथा इंस्पेक्टर कोतवाली की एफआईआर में भी ये तथ्य अंकित नहीं हैं और दोनों ने मात्र आपके प्रति अनुचित शब्द कहे जाने की बात अपनी एफआईआर में कही है. आप सहमत होंगे कि अनुचित शब्द कहना तथा धार्मिक विद्वेष उत्पन्न करना पूर्णतया अलग-अलग बातें हैं. श्री मृत्युंजय कुमार की ट्वीट से भी स्पष्ट है कि इसे मुख्य रूप से श्री सिद्धार्थ द्वारा असत्य कथन कहने तथा आपकी मानहानि के रूप में लिया गया था.

यह भी सही है कि श्री सिद्धार्थ एक पत्रकार हैं. यह तथ्य भी सर्वज्ञात है कि उनकी विचारधारा सामान्य तौर पर आपकी पार्टी की विचारधारा के विपरीत मानी जाती है. इसके बाद भी हमारे देश ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को विशेष महत्व दिया है और इमरजेंसी की अल्प-अवधि को छोड़ कर प्रत्येक शासन काल में लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने पर विशेष बल दिया जाता रहा है. ऐसे में यदि श्री सिद्धार्थ ने तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण तथ्य अंकित भी किया हो और उन्होंने ऐसा वैचारिक वैभिन्य के कारण भी किया हो, तब भी कोरोना के राष्ट्रीय संकट के समय उनपर आनन फानन में कोतवाली थाने के इंस्पेक्टर द्वारा अन्य समस्त अति-आवश्यक कार्यों को छोड़ कर एक ट्वीट के आधार पर असम्बद्ध धाराओं में एफआईआर दर्ज किया जाना और लगभग उसी समय एक अन्य थाने में भी समान प्रकरण में एफआईआर अंकित होना एक ऐसी प्रशासनिक स्थिति है, जो स्पष्टतया गलत सन्देश दे रही है. इसी तरह बहुधा विभिन्न थानों में आपके नाम पर इस प्रकार के एफआईआर दर्ज होने से भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक संकल्पना पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है.

इन समस्त तथ्यों के दृष्टिगत आपसे निम्न निवेदन है-

  1. कृपया मात्र राजनैतिक एवं वैचारिक कारणों से जबरदस्ती लगायी गयी धाराओं के साथ दर्ज कराये गए इन दोनों मुकदमों को तत्काल समाप्त करने के संबंध में उचित निर्देश निर्गत करने की कृपा करें.
  2. कृपया सभी संबंधित अधिकारियों को आदेशित करने की कृपा करें कि अनावश्यक रूप से आपके नाम पर एफआईआर दर्ज करने की वर्तमान स्थिति एवं प्रवृति को समाप्त कर तब तक आपके नाम से संबंधित एफआईआर दर्ज नहीं कराएं जब तक इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय की आधिकारिक सहमति/स्वीकृति न हो जाये.

भवदीय,
(डॉ नूतन ठाकुर)
nutanthakurlko@gmail.com


मूल खबर-

योगी के मीडिया सलाहकार के निर्देश पर ‘द वायर’ के एडिटर के खिलाफ दो मुक़दमे दर्ज

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