अडानी समूह ने श्रीलंका में प्रवेश करने के लिए मोदी के माध्यम से पिछला दरवाजा चुना!

संजय कुमार सिंह-

मोदी ने अडानी को श्रीलंका में पवन ऊर्जा का काम दिलाया
अडानी का ब्रोकर होने का आरोप, रफाल मामले में भी ऐसे आरोप रहे हैं

श्रीलंका की इलेक्ट्रिसिटी अथारिटी के मुखिया ने वहां की संसदीय समिति के समक्ष बयान दिया है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे ने उनसे कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री के दबाव के चलते अड़ानी ग्रुप को 500 मेगावाट का प्रोजेक्ट सीधे दे दिया जाय! इस आरोप के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अडानी का ब्रोकर होने का आरोप लग रहा है और आप जानते हैं कि राफेल मामले में भी उनपर ऐसे ही आरोप लगे हैं और संतोषजनक जवाब अभी तक नहीं है। ये आरोप तब हैं जब प्रधानमंत्री के प्रचार में कहा गया था कि उनका कोई रिश्तेदार नहीं है वे किसके लिए भ्रष्टाचार करेंगे।

दूसरी ओर, खबर यह भी है कि राजपक्षे ने इससे इनकार किया है। दो दिन बाद संबंधित अधिकारी ने भी ‘मान लिया’ कि वे झूठ बोल रहे थे। द वायर की 12 घंटे पहले (12 जून 2022 को दिन में कोई पौने तीन बजे से) की एक खबर के अनुसार, 24 नवंबर 2021 को राष्ट्रपति ने मुझे बुलाकर इस बाबत कहा था। श्रीलंका के न्यूजचैनल न्यूजफर्स्ट ने इससे संबधित वीडियो भी अपलोड किया है। इसीलिए झूठ बोलने की बात स्वीकार करनी पड़ी होगी। एक तरफ तो यह आरोप है और दूसरी तरफ उससे निपटने का वही पुराना तरीका। ठीक है कि गोदी मीडिया इससे मान जाएगा पर दुनिया भर के मीडिया को ऐसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता है और इस मामले में अभी ही पर्याप्त तथ्य हैं।

सच यह भी है maritimegateway.com पर 13 मार्च 2022 की एक खबर का शीर्षक अंग्रेजी में है (अनुवाद मेरा), अडानी को श्रीलंका में पावर प्रोजेक्ट मिले। इस खबर की शुरुआत होती है कोलंबो में एक महत्वपूर्ण पोर्ट टर्मिनल परियोजना हासिल करने के बाद अडानी समूह ने…। यानी टर्मिनल परियोजना का काम अक्तूबर नवंबर में मिला होगा। और खंडन के बावजूद 500 मेगावाट की परियोजना का काम मिला ही है। 13 मार्च की खबर में यह भी लिखा है कि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

thenewsminute की एक खबर के अनुसार, अडानी के साथ श्रीलंका के करार की घोषणा तो नहीं हुई लेकिन उसी दिन एनटीपीसी और सिलोन इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड के बीच हुए करार की घोषणा की गई थी। इसमें आगे लिखा है, श्रीलंका कि विपक्षी नेता अजीत परेरा ने मार्च में द हिन्दू से कहा था, यह सही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने श्रीलंका को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता दी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की हमारी मूल्यवान भूमि और संसाधन को उनके मित्र अडानी के लिए चुरा लिया जाए।

परेरा ने उस समय कहा था, यह बेहद दुखद है कि अडानी समूह ने श्रीलंका में प्रवेश करने के लिए पिछला दरवाजा चुना है। प्रतिस्पर्धा से बचने को हम ठीक नहीं मानते हैं। इससे हमारी खराब अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है, भुगतान संतुलन से संबंधित मामले प्रभावित होते हैं और हमारे नागरिकों को अतिरिक्त परेशानी होती है।

maritimegateway.com खबर में यह भी लिखा है कि यह खबर अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के श्रीलंका दौरे और राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद आई है। एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मालदीव से वापस आते हुए 07 फरवरी 2022 को श्रीलंका पहुंचे थे। 09 फरवरी 2022 की डेली मिरर की खबर है कि प्रधानमंत्री मार्च में श्रीलंका जाएंगे। जयशंकर (विदेश मंत्री) जल्दी ही आने वाले हैं। जनसत्ता ऑनलाइन की 10 जून 2022 की एक खबर के अनुसार, श्रीलंका की संसद में अडानी समूह के गौतम अडानी का विरोध, आमने-सामने आ गए विपक्ष-सरकार; समझें- क्या है पूरा मामला।

इसमें कहा गया है, विपक्ष का आरोप है कि अडानी ग्रुप के सहयोग से उत्तरी तट पर 500 मेगावॉट का पवन बिजली संयंत्र लगाने के लिए सरकार से सरकार के बीच करार 1989 के कानून में संशोधन की अहम वजह है। विपक्ष की ओर से विरोध के बावजूद भी सरकार ने श्रीलंका बिजली अधिनियम में संशोधनों को पारित कर दिया। 225 सांसदों वाली श्रीलंकाई संसद में 120 वोट इस संशोधन के पक्ष में पड़े जबकि 36 वोट इसके विपक्ष में डाले गए और 13 सांसदों ने इस प्रस्ताव को वोट नहीं दिया।

सीईबी की इंजीनियर यूनियन का कहना है कि ये संशोधन अडानी ग्रुप को बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी डील देने के लिए किया जा रहा है। वहीं, एसजेबी का कहना है कि 10 मेगावॉट की क्षमता वाले ऊर्जा प्रोजेक्ट को टेंडर के जरिए ही दिया जाना चाहिए, लेकिन ज्यादातर सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया है। मोदी विरोधियों की जमात के अनुसार मोदी ब्रोकर का काम कर रहे हैं। संबंधित अधिकारी ने यू टर्न ले लिया है इसलिए यह खबर अब शायद गोदी मीडिया के लिए खबर न रहे।

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