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उत्तर प्रदेश

रायबरेली में सत्ताधारी नेताओं की राजनीति ने पत्रकार को ही आरोपी बनवा दिया, देखें वीडियो

मुकदमे का विरोध करती पत्रकार लॉबी

रायबरेली: जनपद के सरेनी क्षेत्र में 6 अप्रैल को हुई अतुल तिवारी की नृशंस हत्या अब सियासी रंग ले चुकी है। इस मामले में जहाँ एक ओर तीन नामजद आरोपियों—करन प्रजापति, अजय वर्मा और बउवा उर्फ शैलेश गुप्ता—की गिरफ्तारी हो चुकी है, वहीं चौथा आरोपी पुनीत सिंह अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुनीत सिंह को बचाने के लिए पूर्व विधायक और भाजपा नेता धीरेंद्र बहादुर सिंह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

पत्रकार आदित्य मिश्रा ने इस मामले में लगातार सच्चाई उजागर करने की कोशिश की। उन्होंने खबरों के जरिए जनता और प्रशासन को पुनीत सिंह की गिरफ्तारी और पूर्व विधायक की संलिप्तता के संकेत दिए। लेकिन इसके बाद आदित्य मिश्रा को लगातार धमकियां मिलने लगीं।

मामला तब और गंभीर हो गया जब 19 अप्रैल को आरोपी करन प्रजापति के पिता धुनारी प्रजापति ने आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना को सियासी रंग देते हुए पूर्व विधायक ने न केवल पीड़ित परिवार का समर्थन खो दिया, बल्कि पत्रकार आदित्य मिश्रा पर भी हत्या का मुकदमा दर्ज करवा दिया।

पत्रकार संगठनों में इस कार्रवाई को लेकर रोष है। रायबरेली के पत्रकारों ने डीएम और एसपी के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें पत्रकारों पर बिना किसी जांच और तथ्यों की पुष्टि के दर्ज हो रहे मुकदमों पर रोक लगाने की मांग की गई है।

सवाल यह है कि जब कोई पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के नाते अपराधियों को बेनकाब करता है, तो उसे ही कठघरे में क्यों खड़ा किया जाता है? क्या सत्ताधारी नेताओं की आलोचना करना अपराध बन चुका है?

रायबरेली में आदित्य मिश्रा पर दर्ज मुकदमा सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा है।

देखें एफआईआर की प्रति और मामले की असलियत का वीडियो…

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