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सुख-दुख

जिस पहले पन्ने को बनाते थे, उसी पर खबर बन गए अनूप…

DrPraveen Tiwari :  ‘सर, पेज भेज दिया हूँ, देख लीजिए’… पिछले एक साल से लगातार रात १२ से १ के बीच ये लाइन फोन पर सुनने का आदी हो गया हूँ. हर तारीख की शुरुआत का पहला मैसेज और वाट्सएप भी अनूप का ही होता था. रोज शाम खबरों पर चर्चा फिर रात में पेज प्रिंट पर भेजने से पहले फोन पर चर्चा मेरी और अनूप की जिंदगी का हिस्सा बन गया था. अनूप कई उम्मीदों और सपनों को साथ लिए हमेशा के लिए हमसे दूर हो गए हैं.

DrPraveen Tiwari :  ‘सर, पेज भेज दिया हूँ, देख लीजिए’… पिछले एक साल से लगातार रात १२ से १ के बीच ये लाइन फोन पर सुनने का आदी हो गया हूँ. हर तारीख की शुरुआत का पहला मैसेज और वाट्सएप भी अनूप का ही होता था. रोज शाम खबरों पर चर्चा फिर रात में पेज प्रिंट पर भेजने से पहले फोन पर चर्चा मेरी और अनूप की जिंदगी का हिस्सा बन गया था. अनूप कई उम्मीदों और सपनों को साथ लिए हमेशा के लिए हमसे दूर हो गए हैं.

ये बात मैं इसलिए जानता हूँ क्योंकि उन्होंने चंद दिनों पहले ही अपनी कई बातें और भावी योजनाएँ मुझे बताईं थीं. मुझे सचमुच इस बात का हमेशा गर्व रहेगा कि अनूप झा जैसा जुझारू और कर्मठ पत्रकार मेरी टीम का हिस्सा रहा. लंबे समय से प्रिंट पत्रकारिता का हिस्सा रहे अनूप ने प्रजातंत्र लाइव अखबार को स्थापित करवाने में अहम भूमिका निभाई और वे सतत इसके लिए प्रयासरत थे. पूरा अखबार और मेरी टीम का हर व्यक्ति इस दुखद घटना के बाद सकते में है. कल अस्पताल में उनके परिवार के साथ कुछ देर रहा लेकिन उनके दुःख का अंदाजा लगा कर ही थर्राता रहा. एक बेहतरीन पत्रकार के साथ वे एक सफल पारिवारिक व्यक्ति भी थे. अनूप की शिकायतें, गुस्सा, जुटकर काम करना, अपनी बात पर अड़ जाना, भविष्य की चिंताएँ, वर्तमान की मेहनत कुछ नहीं भूल पाऊंगा. अनूप झा को श्रद्धांजलि.

पत्रकार डा. प्रवीण तिवारी के फेसबुक वॉल से.

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