अनुपम खेर को इतनी चिरौरी और टीटीएम के बाद पद्म भूषण न मिलता तो नाइंसाफी हो जाती

Khushdeep Sehgal : वक्त वक्त की बात है- 26 जनवरी 2010 को अभिनेता अनुपम खेर का ट्वीट- “हमारे देश में अवॉर्ड्स हमारे सिस्टम का मज़ाक बन कर रह गए हैं। इनमें से किसी की भी विश्वसनीयता बाकी नहीं रह गई है। चाहे वे फिल्म, नेशनल अवॉर्ड हों या फिर अब पद्म।”

25 जनवरी 2016 को पद्मभूषण अवॉर्ड मिलने के बाद अनुपम खेर का ट्वीट- “ये शेयर करते हुए खुश, विनम्र और सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि भारत सरकार ने मुझे पद्म भूषण से सम्मानित किया। मेरे जीवन की महानतम ख़बर। ‪जय‬ हिंद”

Vineet Kumar : अनुपम खेर पिछले कुछ महीने से बेहूदगी की हद तक जाकर जिस तरह से सत्ता की चिरौरी और टीटीएम (ताबड़तोड़ तेल मालिश) करते आए हैं, ऐसे में पद्म भूषण न मिलने पर नाइंसाफी हो जाती. वो तो मिलना तय ही था. लेकिन अफसोस सिर्फ इस बात का है कि ये कलाकार बिना इन सबके भी पद्मश्री के काबिल था.

जिस कारण उन्हें ये सम्मान मिला है, हम बहुत उदार होकर भी सोचें तो ये उनकी कला का सम्मान नहीं, अपने सम्मान की चिंता किए बगैर साख की सरेआम टोपी उछाले जाने का मेहताना है.. ये खांटी एक कलाकार का सम्मान तो नहीं ही है. बाकी तो हिन्दी सिनेमा अनुपम खेर जैसे बाप के किरदार के बिना तो अधूरा है ही. काश वो असल जिंदगी में भी राज (डीडीएलजे) के पिता की ही तरह अक्खड़,उदार और बड़ी सोच के होते..

पत्रकार खुशदीप सहगल और विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Comments on “अनुपम खेर को इतनी चिरौरी और टीटीएम के बाद पद्म भूषण न मिलता तो नाइंसाफी हो जाती

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code