अर्नब गोस्वामी माफी मांगने की बजाय फौजियों से ‘भारत माता की जय’ बुलवा रहा है!

विशाल माहेश्वरी-

किसी घटना की सबसे पहले और सबसे अच्छी कवरेज करना हर मीडिया संस्थान की कामयाबी होती है लेकिन टीआरपी के खेल में पत्रकारिता कितनी ओछी हो चुकी है, यह जानने के लिए बातचीत का यह हिस्सा काफी है.

जवानों की मौत पर एक पत्रकार टीआरपी से खुश है. वो भी 40 जवानों की मौत के मात्र 2 घंटे बाद. पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को 40 जवानों की मौत हुई थी. आतंकी हमला करीबन साढ़े 3 बजे और अर्नब की यह बातचीत करीबन साढ़े पांच बजे की है.

टीआरपी के इस खेल में नंगे सब है, बस अर्नब की चैट वायरल हो गयी है. अर्नब को अपनी इस गलती को स्वीकारने की जरूरत है लेकिन ऐसा करने की बजाए वो टेलीविजन पर रिटायर्ड जवानों से ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करवा रहे हैं.

पता नहीं इन जवानों की भी क्या मजबूरी है, जरूरत क्या है इस तरह के ‘बेवजह’ के मुद्दों में अपनी नाक घुसड़ने की. यह मामला टीआरपी से जुड़ा है और आप टीआरपी विशेषज्ञ तो नहीं हैं.

‘राष्ट्रवाद’ का मखौल मत बनाइए, अपने बीच से कीचड़ को साफ कीजिए वरना वामपंथ और राष्ट्रवाद में कोई ख़ास अंतर नहीं बचेगा.

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