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सुख-दुख

नास्त्रेदमस को पढ़कर इस अफ़सर ने राजीव गांधी के जीते जी लिख दिया था- समुद्र तट किनारे इनकी हत्या होगी!

अशोक कुमार शर्मा-

राजीव गांधी की नृशंस हत्या की भविष्यवाणी की पुस्तक ना छपती तो भारत में कोई नास्त्रेदमस को आज जानता तक नहीं !

श्रद्धांजलि, गुलशन राय (डायमंड पॉकेट बुक्स के पार्टनर) !

गुलशन राय न होते तो भारत में नास्त्रेदमस की चर्चा भी शुरु ना होती!

आज से 32 साल पहले पुस्तक महल दिल्ली ने मुझे “विश्वप्रसिद्ध भविष्यवाणियाँ और भविष्यवेत्ता” नामक पुस्तक लिखने को दी थीI मैंने पुस्तक में संसार के सभी भविष्यवक्ताओं की संक्षिप्त जीवनी के साथ उनकी भविष्यकथन शैली और वे भविष्यवाणियाँ लिखनी शुरू कीं, जिनके कारण उनको जाना जाता हैI

तभी मुझे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में बहादुर शाह जफ़र, झांसी की रानी, ग़दर, सुभाष चन्द्र बोस, जवाहर लाल नेहरु, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गाँधी और राजीव गांधी आदि के चरित्रों के अक्स नज़र आयेI मैंने पुस्तक महल के मालिक राम अवतार गुप्ता जी को बताया तो उन्होंने मुझे 3100 रूपये अग्रिम देकर किताब तैयार करने का निर्देश दियाI

जब किताब तैयार करके मैं उनके पास ले जा रहा था, उन दिनों मेरठ के ज़िलाधिकारी गिरीश चन्द्र चतुर्वेदी आईएएस ने मुझे वह किताब छपवाने से मन कर दिया, क्योंकि मैंने उसमें कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी की एक समुद्र तट के किनारे किसी क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान आतंकी समूह की काली महिला द्वारा बम धमाके से हत्या की भविष्यवाणी लिखी थी और कहा था इस घटना में 18 लोग मारे जायेंगे, ऐसा नास्त्रेदमस ने कहा था!

जिलाधिकारी श्री चतुर्वेदी की राय ना मान कर मैंने अपने कैरियर को दांव पर लगते हुए उस किताब को प्रकाशित करने का निर्णय लिया और पुस्तक महल के मालिक श्री गुप्ता के पास पहुंचा तो वह भी चौंक गए और उन्होंने मुझे एडवांस रख लेने का आदेश देकर कहा कि यह किताब कहीं और से छपवा लीजिये!

तब मैं किताब लेकर दिल्ली में जामा मस्जिद के पास डायमंड पॉकेट बुक्स के दफ्तर गया और वहां बाहरी काउंटर पर एक पतले दुबले सादा इंसान से पूछा कि मैंने अभी पुस्तक महल ऑफिस से फोन किया था और गुलशन जी ने एक किताब के लिए बुलाया हैI इस पर उन सज्जन ने कहा कि मैं ही हूँ!

गुलशन जी ने मेरी किताब “नास्त्रेदमस की सम्पूर्ण भविष्यवाणियाँ” की पांडुलिपि को देखा और मुझसे अनेक नास्त्रेदमस के बारे में अनेक बातें पूछींI फिर कुछ सोच कर मजबूत आवाज़ में बोले, “आप एडवांस लीजिये! हम इसे छाप रहे हैंI राजीव गांधी इलेक्शन दौरों पर निकल रहे हैं, इस दौरान किताब आयी तो नुक्सान कम होगाI उनकी सुरक्षा बढ़ा दी जायेगीI अगर आपके कहे के हिसाब से उनकी हत्या हो गयी तो, किताब को कामयाबी मिलने से कोई नहीं रोक पायेगाI”

गुलशन जी से जब मैंने कहा कि इस मेरे तमन्ना है कि इस किताब में कुछ फोटो भी लगाऊं, तो उन्होंने कहा, “आप फोटो लेकर अगले सप्ताह तक आ जाइए, जब तक किताब का ले आउट तैयार करते हैं!”

एक सप्ताह बाद जब मैं तमाम जगहों से काट-पीट कर फोटो इकट्ठा करके डायमंड पॉकेट बुक्स पहुंचा तब मुझे फर्श पर पैर रखने के बजाय अपनी ही किताब के गठ्ठरों पर पैर रख कर गुलशन जी तक जाना पड़ाI उन्होंने बिना फोटो के ही हज़ारों प्रतियां छाप डालीं थीं और उनकी दुकान के बाहर एक तरह तो रिक्शों से और किताबों के गठ्ठर उतारे जा रहे थे तथा दूसरी तरह मेटाडोर गाडी में उन्हें रखवा कर कहीं भेजा जा रहा थाI गुलशन जी का चेहरा चमक रहा था और वह काफी खुश थेI बोले, “रेलवे स्टेशनों तथा बस अड्डों पर किताब खूब बिक रही है! आप उर्दू और अंग्रेज़ी में भी इसके एडीशन तैयार करवा दीजिये! हम आपको हर किताब पर पांच रूपये रायल्टी देंगे!”

किताब छपने और पूरे देश में वितरित होने के एक सप्ताह बाद राजीव गांधी की एक दुखद घटना में हत्या हो गयी! मेरा विश्लेषण सुपरहिट हो गया !!

भले ही मुझे आज तक दुःख है कि उस किताब की अंधाधुंध बिक्री और रिकार्डतोड़ कमाई के बावजूद मुझे उन्होंने वायदे के मुताबिक़ रायल्टी देने के बजाय अपनी ही हस्तलिपि में कुछ खतरनाक पत्र लिख मारे जिनका आशय ये था कि जो मन में आये वो करो, हम कुछ नहीं देंगेI

बाद में उनके बड़े भाई Narender Kumar Verma उस पुस्तक के अधिकार उनसे ले कर हर वर्ष नया संस्करण निकालना शुरु कियाI आज भी यह किताब देश में निरंतर नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों की सबसे कामयाब और प्रामाणिक
किताब हैI

गुलशन जी से मैं बहुत ज्यादा नाराज़ था, लेकिन आज सोचता हूँ कि अगर 1991 में वह किताब ना छापते तो क्या भारत में नास्त्रेदमस को कोई जान पाता? क्योंकि मेरी किताब आपने के अनेक महीनों बाद लोगों ने मेरी नक़ल में नास्त्रेदमस पर किताबें लिखींI

2021 में इस पुस्तक के नए संस्करण में अगले 50 सालों का घटनाचक्र दिया है मैंने! आप चाहें तो पूरे देश में कहीं से भी, या ऑनलाइन अमेज़न या फ्लिप्कार्ट से इसे खरीद सकते हैं, किताब का फोटो अंत में है!

अशोक शर्मा उत्तराखंड और यूपी में सरकार के वरिष्ठ पदों पर आसीन रहे हैं.

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