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हिन्दी अखबारों में भी संदेशखाली को पहले पन्ने पर ले आये प्रधान प्रचारक!

उत्तर प्रदेश में बृजभूषण शरण सिंह के संरक्षक, कर्नाटक में प्रज्वल रेवन्ना के लिए वोट मांगने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल चार रैलियों को संबोधित करने के लिए बंगाल में थे। उस दिन तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को शर्मिंदा करने की कोशिश में एक स्टिंग वीडियो का इस्तेमाल किया। प्रदेश भाजपा ने इसे फर्जी कहा है। लेकिन 46 मिनट सात सेकेंड का यह वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा था। बाद में तृणमूल कांग्रेस ने इसे अपने हैंडल से इतवार को साझा किया। एक अन्य वीडियो में एक महिला यह कहती लग रही है कि भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता ने उससे सादे कागज पर दस्तखत कराये। रविवार को बसीरसत से भाजपा की उम्मीदवार रेखा पात्रा ने थाने के पास और तृणमूल नेता के घर के बाहर प्रदर्शन किया। इसमें कोई 200 महिलाएं थीं। कोलकाता के अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ में स्नेहमय चक्रवर्ती की बाईलाइन वाली यह खबर कलकत्ता डेटलाइन से है। इसमें कहा गया है, “जैसे-जैसे दक्षिण बंगाल में चुनावी गर्मी बढ़ रही है, तृणमूल कांग्रेस प्रतिशोध के साथ संदेशखाली पर पलटवार कर रही है।“ लेकिन अमर उजाला में लीड है, संदेशखाली की बहनों को धमका रहे गुंडे, दोषियों को बचाने में जुटी टीएमसी : मोदी”      

संजय कुमार सिंह

आज लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान है। ज्यादातर अखबारों में यही लीड है। राष्ट्रीय स्तर पर इन दिनों जो खबरें हैं उससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी भाजपा मुश्किल में लग रही है। ऐसे में प्रचारकों की मजबूरी है कि  सत्तारूढ़ दल की छवि बनाने और विपक्षी दल की बिगाड़ने वाली खबरें हों। ऐसे समय में किये जाने वाले उपायों से किसी भी संगठन की योग्यता क्षमता का पता चलता है। और यह उपाय संदेशखली की खबर को जिन्दा रखना है। लेकिन उसमें तथ्य नहीं है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल पार्टी के नेता पर यौन शोषण का आरोप, उसे वापस लिया जाना और यह स्टिंग कि आरोप गलत हैं तब प्रधानमंत्री का यह कहना कि आरोप वापस लेने के लिए दबाव है सरकार (और पार्टी) की कमजोर स्थिति के साथ लचर प्रशासन की हालत बयान करता है। फिर भी खबर लीड है जबकि राजभवन में राज्यपाल द्वारा यौन शोषण की खबर पर शांति है। ममता बनर्जी के आरोप भर में उल्लेख जरूर है। आरोपों की यह राजनीति पार्टी का प्रधान प्रचारक का स्तर और मौजूदा स्थिति बताता है लेकिन इसमें अखबार भी शामिल हैं। शिकायत से पहले की चार प्रमुख खबरें जो चौथे चरण के मतदान को प्रभावित कर सकती हैं और पुरानी हैं।

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1. अरविन्द केजरीवाल का यह आरोप कि अगले साल 75 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री अपने ही बनाये नियम के अनुसार रिटायर हो जायेंगे और अमित शाह को प्रधानमंत्री बना देंगे। ऐसे में भाजपा को वोट देने का मतलब अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाना है और तब मोदी की गारंटी का क्या होगा?

2. भाजपा ने इसका जवाब नहीं दिया है। कुछे नेताओं ने जरूर कहा है पर गारंटी देने वाले मोदी ने यह नहीं कहा है कि अपने मामले में वे अपने ही नियम का पालन करेंगे या नहीं करेंगे। जाहिर है, यह साधारण मुद्दा नहीं है।

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3. भ्रष्टाचार दूर करने के लिए सत्ता में आई सरकार ने इलेक्टोरल बांड पेश किया। वसूली की और विपक्षी नेताओं को जेल भेजा। इसकी जांच तो नहीं हुई प्रधानमंत्री ने खुद कांग्रेस पर अंबानी-अदानी से धन लेने का आरोप लगाया पर उसकी भी जांच नहीं हुई।

4. दो पूर्व जजों और एन राम ने दोनों नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है और प्रधानमंत्री ने उस पत्र का जवाब नहीं दिया है। राहुल गांधी अपनी सहमति दे चुके हैं और यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री तैयार नहीं होंगे। यह बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री की योग्यता क्षमता बताती है।

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यही नहीं, जब यह मामला सार्वजनिक है तो प्रधानमंत्री के आरोप को महत्व देना मुझे बिल्कुल अनुचित लग रहा है। अब यह लगभग तय है कि प्रधानमंत्री चुनाव जीतने के लिए कुछ भी बोल रहे हैं। इसमें उम्र का असर भी दिख रहा है। चुनाव आयोग लगभग सोया हुआ है और इसमें संदेशखाली का मामला शामिल है। स्टिंग वीडियो से भाजपा की साजिश की पोल खुल गई है पर भाजपा कह रही है कि दबाव डालकर शिकायत वापस करवाई जा रही है। लेकिन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और राजभवन के मामले में पूरी भाजपा लगभग चुप है और सब मिलाकर साफ है कि प्रधानमंत्री और उनके समर्थक अगर झूठे आरोप नहीं लगा रहे हैं तो भी अपने समर्थकों की रक्षा करने, उन्हें सुरक्षा देने में असफल हैं। यह 56 ईंची सीने और अकेला सब पर भारी जैसे दावों के खिलाफ है।

ऐसे में आज जब ज्यादातर अखबारों में मतदान की खबर लीड है तो अमर उजाला की लीड संदेशखाली पर है। मैं पहले भी लिख चुका हूं कि हिन्दी अखबार में बंगाल की खबर को इतना महत्व देना सामान्य नहीं है। इसका लाभ प्रधानमंत्री और भाजपा को हो सकता है। कुल मिलाकर, मुझे लगता है कि यह बंगाल में भाजपा की साजिश है और राजनीति में आप इसे जायज और मुकाबला मानें तो भी भाजपा इसमें हारती हुई लग रही है। आज भी भले ही प्रधानमंत्री के आरोप के जवाब में ममता बनर्जी ने जो कहा है उसे भी छापा गया है पर आज ही द टेलीग्राफ में खबर यह भी है कि महिलाओं को पैसे देकर शिकायत करवाने का एक दूसरा स्टिंग सामने आया है

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ऐसे में कौन सही है, कौन गलत तय करना मुश्किल है। यह तय है कि पीड़ितों को (अगर कोई है) को इंसाफ नहीं मिल रहा है और आरोप झूठे हैं तो सत्ता में होने के कारण कार्रवाई संभव नहीं है। मतदान के मौके पर ऐसे आरोपों की खबरों को इतना महत्व क्यों देना? बंगाल के अखबारों की बात दूसरी है और उनके पास विवरण भी पूरे होंगे। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री के आरोप सही होने की गारंटी नहीं है तो क्यों प्रचार देना? खासकर तब जब प्रधानमंत्री कांग्रेस पर अंबानी अडानी से बोरी में नकद लेने और टेम्पो से ढोने के आरोप लगा चुके हैं। बेहतर होता कि वे जांच करवाते और कार्रवाई करते। पर ऐसा नहीं करके सिर्फ आरोप लगाना खबर भले है लेकिन संपादकीय विवेक उसे महत्व देने से रोकता है। और इसीलिए यह खबर दूसरे अखबारों में नहीं है।

कोलकाता के अखबार द टेलीग्राफ में नये स्टिंग की खबर है। वैसे भी, प्रधानमंत्री के आरोप तब गंभीर होते जब पहली बार लगाये जाते या सही होते। यही नहीं, बंगाल में जो सब हो रहा है वह पार्टी के नेता-कार्यकर्ता करते तो अलग बात थी। ऐसी राजनीति प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए नहीं की जानी चाहिये। पद का दावेदार करे तो अलग बात है। और करने वाले का समर्थन कैसे किया जा सकता है। आम आदमी और कार्यकर्ता की बात अलग है, संपादक तो सब जानता है।  इस लिहाज से मुझे नवोदय टाइम्स की प्रस्तुति बेहतर लगती है। हालांकि, राज्यपाल और राजभवन का मामला पर्याप्त गंभीर है और संदेशखाली अगर मतदान के दिन लीड बन सकती है तो राजभवन की खबर को भी लीड बनना चाहिये था। भले ही वह अलग मुद्दा है।   

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अमर उजाला ने लीड बनाया है तो आप भी देखिये कि प्रधानमंत्री क्या बोल रहे हैं और किस स्तर की राजनीति कर रहे हैं। राहुल गांधी से बात-चीत के लिए समय नहीं है सो अलग। लीड का शीर्षक है, “संदेशखाली की बहनों को धमका रहे गुंडे, दोषियों को बचाने में जुटी टीएमसी : मोदी”। उपशीर्षक है, “पीएम ने कहा –  तृणमूल सरकार बंगाल में लोगों को भगवान राम का नाम तक नहीं लेने देती, भरोसा दिलाया – वंचितों के अधिकार का मोदी चौकीदार”। इसपर ममता बनर्जी ने जो कहा है वह एक कॉलम में छपा है। शीर्षक है, झूठ फैला रही भाजपा राज्यपाल पर लगे आरोपों पर साधी चुप्पीनवोदय टाइम्स का ये वाला शीर्षक है, लगातार झूठ बोल रहे पीएम राज्यपाल पर चुप्पी : ममता। इसके साथ एक खबर का शीर्षक है, ‘राजभवन जाने से डरती हैं महिलाएं’। इससे आप समझ सकते हैं कि खबरों के मामले में संतुलन की क्या स्थिति है।

पूरे मामले को ठीक से समझने के लिए पेश है, द टेलीग्राफ की खबर के अंश का हिन्दी अनुवाद। स्टिंग पर आधारित इस खबर का शीर्षक है, संदेशखाली की 72 महिलाओं को ‘भुगतान’: स्टिंग”स्नेहमय चक्रवर्ती की बाईलाइन वाली यह खबर कलकत्ता डेटलाइन से है। इसमें कहा गया है, “जैसे-जैसे दक्षिण बंगाल में चुनावी गर्मी बढ़ रही है, तृणमूल कांग्रेस प्रतिशोध के साथ संदेशखाली पर पलटवार कर रही है। पार्टी ने इस बार आंकड़ों का हवाला देते हुए अपने दावे को मजबूत करने के लिए एक दूसरा “स्टिंग वीडियो” साझा किया है। इसके अनुसार संदेशखाली बलात्कार और यौन दुर्व्यवहार के आरोप चुनावी मौसम में बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ भाजपा की साजिश थी। एक सप्ताह पहले जारी किए गए पहले स्टिंग में, एक स्थानीय भाजपा नेता यह दावा करता दिख रहा है कि महिलाओं को बलात्कार और यौन शोषण के आरोप लगाने के लिए भुगतान किया गया था।

नवीनतम वीडियो में यह आंकड़ा 72 है। यानी इतनी महिलाओं को आरोप लगाने के लिए पैसे दिये गये हैं। इनमें 50 के नाम भी हैं। नवीनतम वीडियो ने तृणमूल को यह आरोप लगाने के लिए भी प्रेरित किया है कि भाजपा “मुद्दे को बनाये रखने” के लिए संदेशखाली में शराब और आग्नेयास्त्रों का उपयोग कर रही थी। यह अखबार स्वतंत्र रूप से किसी भी वीडियो की प्रामाणिकता स्थापित करने में सक्षम नहीं है, दोनों में भाजपा के संदेशखाली द्वितीय मंडल अध्यक्ष गंगाधर कयाल शामिल हैं। पहले में, कयाल ने कहा कि स्थानीय तृणमूल नेता शेख शाहजहाँ और उनके सहयोगियों के खिलाफ बलात्कार और यौन शोषण की शिकायत करने वाली महिलाओं को राज्य के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के आदेश पर 2,000 रुपये का भुगतान किया गया था। वीडियो में और भी बातें हैं, 5000  तक के भुगतान की भी बात है।  

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दूसरे वीडियो में, उन्होंने कथित तौर पर कहा कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए संदेशखाली में 72 महिलाओं में से प्रत्येक को 2,000 रुपये का भुगतान किया गया था। जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार रैलियों को संबोधित करने के लिए बंगाल में थे, उस दिन तृणमूल ने भाजपा को शर्मिंदा करने की कोशिश में नवीनतम वीडियो का इस्तेमाल किया। अखबार ने लिखा है कि उसने इस संबंध में गंगाधर कयाल से बात करने की कोशिश की लेकिन उनका नंबर पहुंच में नहीं था। प्रदेश भाजपा ने इसे फर्जी कहा है। 46 मिनट सात सेकेंड का यह वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा था। बाद में तृणमूल कांग्रेस ने इसे अपने हैंडल से इतवार को साझा किया। एक वीडियो में एक महिला यह कहती लग रही है कि भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता ने उससे सादे कागज पर दस्तखत कराये। रविवार को बसीरसत से भाजपा की उम्मीदवार रेखा पात्रा ने थाने के पास और तृणमूल नेता के घर के बाहर प्रदर्शन किया। इसमें कोई 200 महिलाएं थीं।       

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