बदतमीज सांसद को पीड़ित पत्रकार का जवाब- नेताओं का मूड ठीक रखने का ठेका मेरे पास नहीं!

गौरव अग्रवाल

पूरे घटनाक्रम का वीडियो देखिए। सांसद जी मुझे सुअर तक कह रहे हैं। वे इतने नाराज क्यों हो गए? इसलिए कि सवाल पूछ लिया मैंने। आईटी सिटी पर सवाल पूछना गुनाह है क्या? जो आईटी सिटी लगाने वालें है वे आगरा आईटी सिटी लगाने के लिए तैयार हैं। सिर्फ सरकार से जमीन चाहिए। नेशनल चेम्बर आफ कॉमर्स पर उसकी स्वीकृति है। बस सरकार से पैरवी होनी है। उस पर आजतक एक रुपये का पत्राचार नहीं हुआ है क्योंकि हुआ होता तो कोई ना कोई टीम आती। आईटी सिटी से सिर्फ मेरा लगाव यही है कि यहां से नौजवान नौकरी की जुगाड़ में दिल्ली नोएडा जाते हैं और फिर वहीं के होकर राह जाते हैं और उनके बुजुर्ग मां बाप यहां अकेले रह जाते हैं।

यह ध्यान रहे कि यह जो वोट बैंक है पूरा का पूरा भाजपा का है क्योंकि उन्हीं के पास रोजगार नहीं है। कुछ मित्रों का कहना है कि जब सांसद महोदय कहते रहे तो तुम क्यों चुप रहे। तो एक बात स्पष्ट कर दूं मैं कोई योद्धा नहीं हूँ। अचानक हमला हुआ, वह भी अप्रत्याशित, जितना कह सकता था, उतना कहा। तात्कालिक स्थितियों में जितना समझ में आया उतना कहा। इतना जल्दी हर आदमी निर्णय नहीं ले पाता है। जब एक माननीय विधायक ने एक आईपीएस से कुछ कहा था तब वह फूट फूट कर रोया था। जबकि पूरी की पूरी खाकी उसके साथ थी। तब उसकी यह स्थिति थी।

अब विधायक से पांच गुना बड़ा सांसद है, वह भी यकायक हमला बोलता है। अब तक लगभग 100 फोन आ चुके हैं। सबको बात पता करनी है। इसमें सत्ता से जुड़े लोग भी हैं। कुछ का कहना है इस मामले को तूल दो वरना कायरता का संदेश समाज में जा रहा है और जब आप दूसरे की बात उठाते हो और उन्हें न्याय दिलाते हो तो यह नपुंसकता क्यों। जहाँ तक जांच का सवाल है तो सांसद मुझे पिछले दस साल से इसी तरह की पत्रकारिता करते देख रहे हैं जिसमे डिप्टी सीएम, सीएम से लेकर मंत्री तक का मूड खराब कर देता हूँ।

तो यहां स्पष्ट कर दूं कि मैं नाच दिखाने वाली कोई नृतकी या अप्सरा नही हूँ जो मंत्री, डिप्टी सीएम या सीएम के यहां आने पर नाच गाकर उनका मनोरंजन करूं और लखनऊ से उनका मूड आफ भी आये तो उन्हें अच्छा कर दूं। मैंने नेताओं का मूड ठीक रखने-करने का कोई ठेका नहीं लिया हुआ है। मैं एक पत्रकार हूँ, लिहाजा मेरा सवाल पूछना लाजिमी है, जो चुभेंगे भी शत प्रतिशत क्योंकि सत्ता परिवर्तन व्यवस्था परिवर्तन के लिए होता है।

अब आयी फर्जी की बात तो सांसद खुद कह रहे हैं कि वह मुझे दस साल से देख रहे हैं यानी इसका मतलब दस साल से इतनी बड़ी महंगाई के दौर में खुद का पेट्रोल गाड़ी निशुल्क फूंक रहा हूँ और यह भी अब आकर दस साल बाद यह बात याद आ रही है कि मैं फर्जी हूँ। दस साल तक आप कहाँ थे, क्यों नहीं आपने एलआईयू या पुलिस को लिखा, क्यों नहीं मेरी जांच कराई, इन दस सालों में तो ब्लैकमेलिंग करके मैंने करोड़ो और अरबों कमा लिए और उसका भी स्विस बैंक में खाता खोल दिया जिससे अर्थव्यवस्था में भारी मन्दी आ गयी क्योंकि अगर मैं स्विस बैंक में खाता नहीं खोलता तो वह पैसा आगरा में ही निवेश होता और हजारों लोगों को आगरा में ही रोजगार मिलता।

अब जहां तक ब्लैकमेलिंग की बात है तो मेरा सांसद जी से निवेदन है कि मेरी जांच सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर से कराई जाए कि विगत दस सालों में मेरे द्वारा कितनी अचल व चल संपत्ति एकत्रित की गई है, कितने घोड़े गाड़ी बंगले इत्यादि खरीदे गए हैं और कितना धन प्रचुर मात्रा में हवाला के जरिये स्विस बैंक में भेजा गया है।

खैर यकायक हुए घटनाक्रम से स्तब्ध हूँ क्योंकि एक माननीय ने सूअर शब्द तक का प्रयोग किया है, मेरे दिल्ली और लखनऊ के कई मित्रों को इन शब्दों पर घोर आपत्ति है। उनका कहना है कि इस तरह के सांसद से उन्हें मिलवाया जाए वह दिन रात इस तरह के सांसदों को ढूढते हैं। मुझे जेल जाने से तनिक भी भय नहीं है क्योंकि अब मेरे पास पत्रकारिता के अलावा कोई चारा नहीं है तो आगे का जीवन भी येन केन प्रकारेण यहीं बिताना है। फिर सांसद जेल भिजवाएं या फांसी लगवाएं या दिन दहाड़े गोली पड़वा दें या किसी को शह देकर मेरे विरुद्ध गंभीर धाराओं में कोई अभियोग पंजीकृत करा दें।

अगर मेरे भाग्य में ईश्वर ने जेल जाना ही लिखा है तो अवश्य जाऊंगा। होय वही जो राम रचि राखा, हानि मरण लाभ यश अपयश विधि का विधान की तर्ज पर साक्षात श्रष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी भी नहीं रोक सकते। एक और बात। जो महिला की बात आ रही है उसकी जांच स्वयं आगरा के जिलाधिकारी पंजाब केसरी के समाचारों के आधार पर रजिस्ट्रार चिट फंड से करा चुके हैं जिसके बाद से महिला और संस्था दोनों गायब हैं और किसी दूसरी महिला को उसका सचिव बना दिया गया है। अगर मैंने उसे ब्लैकमेल किया है तो प्रमाण उस महिला के पास अवश्य होंगे, मैं विधि से स्नातक हूँ इसलिए पुनः आग्रह करता हूँ कि वह तहरीर दे, जांच हो और उसके बाद मेरे ऊपर जो भी चार्ज लगेंगे वह मुझे स्वीकार होंगे।

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तीखे सवाल पूछने वाले पत्रकार से इस सांसद की क्यों फटी? 😀

Posted by Bhadas4media on Wednesday, October 23, 2019

गौरव अग्रवाल आगरा के बेबाक पत्रकार हैं.

पूरे मामले को समझने के लिए इस मूल खबर को पढ़ें-

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Comments on “बदतमीज सांसद को पीड़ित पत्रकार का जवाब- नेताओं का मूड ठीक रखने का ठेका मेरे पास नहीं!

  • अब्दुल हमीद says:

    गौरव भाई, आप इस प्रकरण में सत्य प्रतिशत सही हो और सांसद की भाषा निश्चित रूप से बेहद निंदनीय है।
    – अब्दुल हमीद जयपुर
    9214388961

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