भड़ासी चुटकुला : किसी भी घर में घुस जाओ…

1985 का दौर-
भाई पत्रकार साहब का घर कहां है?
यहां से आगे 2 km दूर है, चलो छोड़ देता हूँ….

1995 का दौर-
भाई पत्रकार साहब का घर कहां है?
आगे जाकर बायीं ओर का दूसरा मकान।

2005 का दौर-
भाई पत्रकार साहब का घर कहां है?
कौन से पत्रकार साहब? इस गली में बहुत सारे पत्रकार साहब है…

2015 का दौर-
भाई पत्रकार साहब का घर कहां है?
आगे जाकर किसी भी घर में घुस जाओ कोई न कोई पत्रकार मिल ही जायेगा।

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कल एक पत्रकार भाई पुराने कागजात देख रहा था.
धर्मपत्नी के 10वीं कक्षा के रिपोर्ट कार्ड पर नजर पड़ी.
नम्बरों के नीचे चरित्र प्रमाणपत्र पढ़कर पत्रकार अभी तक बेहोश है बेचारा.
लिखा था- ”मृदुभाषी एवं शांत चित्त छात्रा।”

 


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This is called …Power of media.. :”-)

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Comments on “भड़ासी चुटकुला : किसी भी घर में घुस जाओ…

  • anil kumar pandey says:

    मीडिया मालिक का मारा एक मीडिया कर्मी बेचारा निर्मल बाबा के दरबार में पहुंचा। बोला- बाबा, बहुत परेशान हूं। एक अखबार में नौकरी करता हूं। चार महीने से वेतन नहीं मिला है। घर में खाने के लाले हो गए हैं। घर पहुंचते ही बीबी वेतन पूछती है। बाबा, आपकी कृपा चाहिए। बताइए, समोसा के साथ लाल चटनी खाऊं या हरी चटनी।
    निर्मल बाबा- बेटा पहले समोसा तो खरीद ले। चटनी का नंबर तो बाद में आएगा।
    Anil Kumar Pandey

    Reply

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