
अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-
यूपी उनके रहने लायक स्टेट नहीं है, जो नियम कानून से चलने वाले किसी राज्य में बसना चाहते हैं। व्यापार और उद्यमियों के लिए तो कहीं बाहर से आकर यहां निवेश करने की मूर्खता से बड़ा कुछ हो ही नहीं सकता। यहां के भ्रष्ट सरकारी विभाग हों, अपराधियों के बुलंद हौसले हों और लोगों की बढ़ती शिकायतों की लिस्ट के बावजूद पीड़ित की पहुंच से दूर खड़ी सरकार, मीडिया एवं दशकों से लंबित मुकदमों वाली न्यायपालिका हो, यह सब कुछ ऐसा घातक कॉकटेल है, जिसके कारण यहां रहने का फैसला अगर बिना मजबूरी के कोई करेगा तो जीवनभर पछतायेगा।
यूं तो मैं दिल्ली में ही बसने वाला था और वहीं पढ़ाई करने के बाद मीडिया में एक दशक से ज्यादा नौकरी भी की। मगर हालात ने मजबूर किया तो यूपी आ गया। यहां आकर लगभग पंद्रह साल पहले एक बड़ी गलती और कर दी, जो नियम कानून का पालन करते हुए रियल एस्टेट बिजनेस शुरू कर दिया। मेरे साथ दो लोग और थे, उसी कंपनी में डायरेक्टर। उन्हें नियम कानून का पालन करना पसंद तो नहीं था क्योंकि वह टिपिकल यूपी मानसिकता वाले व्यक्ति हैं लेकिन कुछ साल वे मेरे साथ रहे।
उन्होंने सब सीखा, समझा और फिर शुरू किया यूपी स्टाइल में अवैध प्लॉटिंग का बड़ा कारोबार। एक ने सत्ता से संरक्षण लिया तो दूसरे ने अवैध प्लॉटिंग के अन्य कारोबारियों का साथ पकड़ा। यही नहीं, जिस डेवलपमेंट ऑथोरिटी और rera को मेरा साथ देना था या मेरे प्रोजेक्ट्स में रुकावट को हटाकर यहां राज्य में अप्रूव्ड यानी नियम कानून से चलने वाले रियल एस्टेट बिजनेस को बढ़ावा देना था, वही दोनों सरकारी विभाग ही मेरी राह की सबसे बड़ी बाधा बन गए।
वह इसलिए कि अवैध प्लॉटिंग वाले दोनों खिलाड़ियों ने मेरे खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यूपीसीडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी ब्रजेश कश्यप ने आंख मूंद ली उनकी कई अवैध प्लॉटिंग से और उसी के बगल में मौजूद मेरे दो अप्रूव्ड प्रोजेक्ट में नियम विरुद्ध अड़ंगे लगाने लगा।
यूपी rera के तकनीकी अधिकारी संजय तिवारी और विनीत सिंह ने बाकायदा एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी मेरे आगे कि मैं आगे ही न बढ़ सकूं। इन तीनों के खिलाफ पिछले दो तीन साल में कहां नहीं शिकायत की लेकिन सरकार उसी भ्रष्ट अफसर से रिपोर्ट लगवाकर शिकायत का निस्तारण करवाती है, जिसके खिलाफ जनसुनवाई तंत्र आदि में शिकायत की जाती है।
RTI के उल्लंघन के दोनों विभाग के जनसूचना अधिकारी यानी बृजेश कश्यप और विनीत सिंह दोषी पाए गए और बाकायदा आदेश जारी हुए कि जुर्माना लगेगा लेकिन वहां भी यूपी अंदाज में सेटिंग हो गई और दोनों बाइज्जत इकतरफा निस्तारण में बिना जुर्माने के बाहर आ गए।
वर्ष 2015 से ही लगातार मैं भ्रष्ट सिस्टम से जूझ रहा हूं क्योंकि मेरे विरोधी अवैध प्लॉटिंग का साम्राज्य खड़ा करने वालों ने अंधी कमाई करके यहां के भ्रष्ट सिस्टम के महाभ्रष्ट विभाग यूपीसीडा के भ्रष्ट अधिकारी बृजेश कश्यप और यूपी रेरा के संजय तिवारी और विनीत सिंह का इस्तेमाल किया, जो न सिर्फ मेरे अप्रूव्ड प्रोजेक्ट्स की राह में एक के बाद एक रोड़े अटका रहे हैं बल्कि उनके अवैध प्लॉटिंग साम्राज्य को प्रश्रय भी दे रहे हैं। बताइए ऐसे स्टेट में कोई कारोबारी भला क्यों आएगा?
एक होटल कारोबारी को खुलेआम गोलियों से भून दिया गया महज इसलिए क्योंकि वह रंगदारी नहीं दे रहा है। उसका पिता कह रहा कि करोड़ों रुपए का टैक्स दे रहे हैं तो यह हाल है कि जान बचाना मुश्किल है।
एक रियल एस्टेट कारोबारी को गोलियों से भून दिया गया. किसने मारा क्यों मारा वह तो जांच होगी और निष्पक्ष होगी तो शायद पता चले। लेकिन जिनके हौसले इतने बुलंद हैं कि वे हत्याएं कर रहे हैं तो क्या उन्हें यहां के भ्रष्ट अफसर और विभाग हत्या करने के बाद भी कहीं फंसने देंगे?
कुल मिलाकर यह कि यूपी को टका सेर भाजी टका सेर खाजा, अंधेर नगरी चौपट राजा वाली केटेगरी में ही गिनिये। अगर यहां के जिसकी लाठी उसकी भैंस वाले निजाम में रहना है तो नियम कानून को रखिये अपनी गाँव में और भ्रष्ट अफसर और विभागों को चढ़ाइए भरपूर चढ़ावा, करिये खुलेआम चोरी और सीनाजोरी, फिर देखिए नियम कानून की धज्जियां उड़ाकर भी आप दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की उन भ्रष्ट अफसरों के साथ साथ उनकी कृपा से कैसे करते हैं।
कहीं नियम कानून से चलने की गलती की और चढ़ावा नहीं दिया या उसमें कमी की तो मांगते रहिए न्याय, नक्कारखाने में तूती की भला किसी ने सुनी है, जो इस काल में कोई सुन लेगा?



