चौथी दुनिया प्रबंधन और नोएडा पुलिस के लोग हक के लिए लड़ रहे एक पत्रकार को धमका रहे (सुनिए टेप)

चौथी दुनिया की स्थिति बदतर होती जा रही है। कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं दिया जाता है। किसी भी समय किसी भी पत्रकार को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। बिना किसी नोटिस। दैनिक कर्मचारियों की तरह पत्रकार को एक दिन के भीतर हटा दिया जाता है और उसे उसी दिन तक का वेतन दिया जाता है, जिस दिन उसे हटाया गया है। उस उस महीने का भी पूरा वेतन नहीं दिया जाता जिस महीने में उसे हटाया गया है। कुछ दिनों पहले ऐसा ही एक पत्रकार के साथ किया गया।

इस पत्रकार को लंच के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, वो भी महीने की 12 तारीख को। उसे उस महीने का भी वेतन नहीं दिया गया। केवल 12 दिन के वेतन के साथ उसे चेक थमा दिया गया।  अपना बकाया पैसा मांगने पर करियर खत्म करने की धमकी दी गई। पत्रकार ने अपने अधिकार के लिए लड़ाई जारी रखा। उसने पुलिस में शिकायत कर दी। इससे चौथी दुनिया प्रबंधन बौखला गया। उसे चौथी दुनिया के लोग धमकी देने लगे। नोएडा के जिस थाने में उसने रिपोर्ट दर्ज कराई है, वहीं का पुलिस अधिकारी उसे फोन करके मामला को रफा दफा करने की धमकी देने लगा। एक महीने में पांच बार उसका फोन आ चुका है।

पुलिस अधिकारी ने पहली बार फोन करके उसे कहा कि चौथी दुनिया से कुछ लोग आए हैं जो उसके खिलाफ आफिस में तोड़फोड़ करने की रिपोर्ट लिखाने की बात कह रहे हैं। साथ ही पुलिस को भी धमकी दे रहे हैं। पुलिस वाले ने यहां तक बताया- ”मुझे कहा जा रहा है कि अब अखिलेश सरकार नहीं है… सरकार बदल गई है… कार्रवाई नहीं की तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा।” ये बात उस पुलिस वाले ने चौथी दुनिया से निकाले गए पत्रकार से कही। इसका सबूत यानि आडियो पत्रकार के पास है।

पिछले दिनों उस पुलिस वाले का फिर से फोन आया। उसने चौथी दुनिया के निकाले गए पत्रकार को थाने में बुलाया। धमकी भी दी कि थाने आकर मामला सुलझा लो, अगर ऐसा न किया तो चौथी दुनिया की ओर से आई कंप्लेन पर रिपोर्ट लिख ली जाएगी जिसमें कहा गया है कि तुमने अपने साथियों के साथ मिलकर आफिस में तोड़फोड़ करने की और जान से मारने की धमकी दी।

अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे एक पत्रकार को इस तरह से धमकी दिया जाना सामान्य बात नहीं है। इसके लिए उस पुलिस वाले के साथ साथ चौथी दुनिया के ऊपर भी कार्रवाई होनी चाहिए। एक तरफ तो एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणव राय के खिलाफ सीबीआई के छापे को लेकर बड़े-बड़े पत्रकार प्रेस क्लब में इकट्ठा हो रहे हैं, तो दूसरी ओर एक पत्रकार का इतना शोषण हो रहा है और साथ ही उसे धमकी भी दी जा रही है।

भड़ास के माध्यम से वह अपनी बात लोगों तक पहुंचाना चाहता है। अगर उसे उसका पैसा नहीं मिला और धमकी देना जारी रहा तो फिर उसके पास मुख्यमंत्री के पास शिकायत करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उक्त पत्रकार जिस दिन अपना दो महीने का वेतन लेने गया तो उस दिन संतोष भारतीय के चम्मच और कंपनी के संचालक रामपाल सिंह भदौरिया ने फोन पर पत्रकार को गालियां दीं, जिसकी कॉल रिकॉर्डिंग यहां दी जा रही है, आप भी सुनें। पत्रकार के पास पुलिस द्वारा दिलवाई गई धमकियों की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसे अगली कड़ी में पेश किया जायेगा। नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें…

https://youtu.be/IYFzuc6pS_Y

चौथी दुनिया के पीड़ित पत्रकार की तरफ से भेजे गए पत्र पर आधारित.

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