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शब्दचर्चा 57 : छठ पर सूर्य को क्या देते हैं – अर्घ, अर्घ्य या अर्ध्य?

नीरेंद्र नागर-

आज छठ पूजा का तीसरा दिन है और शाम को डूबते सूरज को जल-फल आदि चढ़ाया जाएगा। इस सामग्री को हिंदी मीडिया में तीन तरह से लिखा जाता है – अर्घ, अर्घ्य और अर्ध्य। हमेशा की तरह सभी मीडिया संस्थानों का एक ही हाल है। उनकी एक ख़बर में अर्घ है, दूसरी में अर्घ्य और तीसरी में अर्ध्य।

आज की शब्दचर्चा 57 में हम जानेंगे कि इन तीनों में सही क्या है।

चूँकि यह शब्द संस्कृत का है इसलिए मैंने आप्टे के संस्कृत कोश में ही इन तीनों शब्द और उनके अर्थ खोजे।

मैंने पाया कि कोश में अर्घ (अर्घः) और अर्घ्य (अर्घ्यम्) का एक ही मतलब दिया हुआ है।

अर्घ का अर्थ है – पूजा की सामग्री, देवताओं या सम्मान्य व्यक्तियों को सादर आहुति या उपहार।

अर्घ्यम् का अर्थ दिया हुआ है – किसी देवता या सम्मान्य व्यक्ति को सादर आहुति या उपहार। इसके बाद यह भी लिखा गया है – देखें अर्घ।

यानी प्राथमिकता अर्घ को दी गई है लेकिन अर्थ दोनों का एक ही है। आप इन दोनों में से किसी का भी प्रयोग कर सकते हैं।

लेकिन अर्ध्य? वह तो बिल्कुल ग़लत है। अर्ध्य बना है अर्ध (आधा) से और संस्कृत में इसके जो भी मतलब हैं, वे सब आधे के अर्थ से जुड़े हुए हैं। उनका पूजा-अर्चना से कोई लेना-देना ही नहीं है।

पिछली शब्दचर्चा…

शब्दचर्चा (56) : किसी अभियुक्त को दूसरे देश को सौंपना प्रत्यर्पण है या प्रत्यार्पण?

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