छोटे व मझोले अखबारों का लंबे समय से उत्पीड़न कर रहा डीएवीपी

न्यायमूर्ति श्री चंद्रमौली कुमार प्रसाद जी

चैयरमैन- भारतीय प्रेस परिषद

सूचना भवन, लोदी रोड, नई दिल्ली ।

विषय : डीएवीपी द्वारा उत्पीड़नात्मक कार्यवाही के सम्बंध में

मान्यवर महोदय,

आपको अवगत कराना है कि भारत सरकार के डीएवीपी द्वारा छोटे व मझौले अखबारों का काफी लंबे समय से उत्पीड़न किया जा रहा है।

अखबारों को विगत वर्षों में नाममात्र को विज्ञापन जारी किए गए हैं। वर्ष 2016 की विज्ञापन नीति में अखबारों की प्रसार संख्या 45000 तक बिना प्रसार जांच कराए निर्धारित की गई थी। इसके बाद वर्ष 2020 में पुनः नई नीति बनाकर 25000 बिना प्रसार जांच कराए निर्धारित की गई है।

जिन अखबारों का प्रसार 25000 से अधिक था उन्हें 25000 तक सीमित करके अनुचित तरीके से विज्ञापन दर घटा दी गई है।

विगत वर्ष से कोरोना महामारी की वजह से अखबारों की विज्ञापन आय काफी घटी है। कागज, स्याही, केमिकल, प्लेट व लेबर की दरों में काफी वृद्धि हुई है।

ऐसी परिस्थितियों में छोटे व मझौले अखबारों के विज्ञापन दरों में बदलाव सही निर्णय नहीं कहा जा सकता है।

डीएवीपी द्वारा प्रसार संख्या 25000 निर्धारित कर दिए जाने से भारतीय प्रेस परिषद को भी लेवी फीस नहीं मिल सकेगी। इससे भारतीय प्रेस परिषद का राजस्व नाम मात्र का रह जायेगा। इस प्रकार से परिषद को वेतन वितरण और कार्य संचालन के लिए भी आर्थिक संकट उत्पन्न होने की पूर्ण संभावना है।

आपको इस परिस्थिति में तत्काल ही स्वतः संज्ञान लेकर आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए।

सादर अभिवादन सहित ।

भवदीय

अशोक कुमार नवरत्न
सदस्त, प्रेस काउंसिल आफ इंडिया

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One comment on “छोटे व मझोले अखबारों का लंबे समय से उत्पीड़न कर रहा डीएवीपी”

  • suresh trivedi says:

    पर छोटे अखबार जानते हैं वे कितना छापते हैं और कितना दिखाते हैं।

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