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उत्तर प्रदेश

संक्रमित होने के बाद लखनऊ का ये पत्रकार कोरोना वार्ड से कर रहा ग्राउंड रिपोर्टिंग

लखनऊ के पत्रकार नवल कांत सिन्हा ने केजीएमयू के कोरोना वार्ड में डेरा डाल दिया है. कोरोना संक्रिमित होने के कारण नवल को वहां इलाज के लिए भर्ती कराया गया. इस मुश्किल वक्त में भी नवल ने पत्रकारीय धर्म का निर्वाह करना नहीं छोड़ा. कोरोना वार्ड से नवल इलाज की ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

नवल पूरे अनुशासन के साथ इलाज में सहयोग कर रहे हैं. साथ ही लेटे-लेटे वो अपनी पत्रकारिता के पेशे का फर्ज़ भी निभा रहे हैं.

नवल दुनिया को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बीमारी से डरने-घबराने की कोई ज़रुरत नहीं है. ऑल इज़ वेल. रोजमर्रा के खासी-बुखार जैसी तमाम छोटी या बड़ी बीमारियों में ठीक होने के जितने चांसेस होते हैं उससे कहीं ज्यादा ठीक होने के चांसेज कोरोना के होते हैं. बच्चों-बूढ़ों व दूसरी जटिल बीमारियों से ग्रसित लोगों को अगर हटा दें तो सामान्य उम्र के तंदुरुस्त लोग जब कोरोना संक्रमित होते हैं तो उनमें से 98 फीसद लोग आसानी से ठीक हो जाते हैं. इसलिए इससे डरने-घबराने की ज़रूरत नहीं है. लक्षणों या बीमारी को छिपाने या टेस्ट कराने में कतराना बेहद ग़लत है.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह लिखते हैं- ”दुनिया के पहले पत्रकार हैं नवलकांत जो संक्रमित होने के बाद मौके से रिपोर्टिंग कर रहे हैं. इस बीमारी के प्रति लोगों का डर कम करने के लिए उन्होंने जो रिपोर्टिंग की है वो बेमिसाल है.

देखें अखबार में प्रकाशित नवल की रिपोर्ट-

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