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हिंदुस्तान के मीडियाकर्मियों के पदनाम और विभाग में वर्ष 2010 से फेरबदल की खबर !

नोएडा : मजीठिया मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक बार पुनः मुकरने की तैयरारी में दैनिक हिंदुस्तान प्रबंधन इन दिनो अपने यहां के मीडिया कर्मियों के सिर्फ तात्कालिक तौर पर विभाग और पदनाम के साथ खेल नहीं कर रहा, बल्कि कागजों में वर्ष 2010 से ही उन सभी मीडिया कर्मियों के पदनाम परिवर्तित कर रहा है, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार मजीठिया बेजबोर्ड के लाभ के हकदार हो सकते हैं। 

नोएडा : मजीठिया मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक बार पुनः मुकरने की तैयरारी में दैनिक हिंदुस्तान प्रबंधन इन दिनो अपने यहां के मीडिया कर्मियों के सिर्फ तात्कालिक तौर पर विभाग और पदनाम के साथ खेल नहीं कर रहा, बल्कि कागजों में वर्ष 2010 से ही उन सभी मीडिया कर्मियों के पदनाम परिवर्तित कर रहा है, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार मजीठिया बेजबोर्ड के लाभ के हकदार हो सकते हैं। 

सूत्रों के अनुसार हिंदुस्तान प्रबंधन की इन सारी अंदरूनी चालों पर संस्थान के मीडियाकर्मियों की भी नजर है। वे सारी गतिविधियों को बड़े गौर से ध्यान में रखकर चल रहे हैं। अनेक मीडियाकर्मी भी तेजी से अपनी कागजी तैयारियों में जुट गए हैं ताकि मौका आने पर वह चाहे किसी भी कीमत पर मजीठिया वेज बोर्ड और अवमानना के मामले को लेकर इस माह 28 तारीख को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद अपनी भूमिका समय से तय कर सकें। सुगबुगाहट है कि सुप्रीम कोर्ट ने, जैसा कि माननीय न्यायाधीश ने आगाह किया है, उसी दिन मीडिया घरानों के खिलाफ और पत्रकारों के हक में कोई सख्त फैसला सुना देता है तो अपने ही संस्थान के कर्मियों से निपटना हिंदुस्तान प्रबंधन को बहुत भारी पड़ने का अंदेशा बढ़ जाएगा।   

संस्थान के मीडिया कर्मी एक-दूसरे से इस सवाल पर हक्के-बक्के हैं कि सुप्रीम कोर्ट और उसका फैसला बड़ा है या हिंदुस्तान की मैनेजमेंट, जिसने अब तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अपनी मनमानी से बौना कर रखा है। महंगाई के बढ़ते दबाव से पत्रकार क्षुब्ध हैं कि यदि फैसला शीघ्र न हुआ तो उन्हे घर-परिवार चलाना कितना मुश्किल पड़ सकता है। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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