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सुख-दुख

दुनिया का आखिरी दंगा शाकाहारी आस्तिकों और शाकाहारी नास्तिकों के बीच होगा!

रंगनाथ सिंह-

आग आदमी का जाति-धर्म नहीं देखती। पड़ोसी के घर में लगी हो तो कब वह आपके घर को अपनी जद में ले लेगी, कह नहीं सकते। शीर्षक में पत्रकार का नाम होता तो खबर ज्यादा साफ होती लेकिन पत्रकारिता से जुड़े ज्यादातर साथी अब तक नाम जान चुके होंगे। वह साथी भी इस खबर पर गौर करें जिनके घर में पढ़ने-लिखने वाले छोटे बच्चे हैं, बीवी है और उनके अलग-बगल ऐसे लाउडस्पीकर विरोधी धर्मरक्षक रहते हैं जिनसे आप रात के 12 बजे भी उनका लाउडस्पीकर धीमे करने को नहीं कह सकते।

नॉनवेज या/और सोमरस प्रेमी राष्ट्रवादी मित्र भी थोड़ा एहतियात बरतना शुरू कर दें। जिन धर्मपरायण माताओं के बच्चे नानवेज खाते हैं, वह भी देख लें। जिन बहनों के भाई नानवेज खाते हैं, वह भी ध्यान दें। सभी पिता-भाई-पुत्र-प्रेमी-पति भी देख लें कि कहीं उनके घर की कोई स्त्री गलती से कभी खुद न चली जाए लाउडस्पीकर धीरे कराने।

धर्मरक्षकों के बौद्धिक प्रकोष्ठ के जो कारकुन खुद को नास्तिक बताते हैं, वह भी अपनी सुरक्षा का इंतजाम देख लें। जब केवल दंगाई बचेंगे तो आखिरी दंगा शाकाहारी आस्तिकों और शाकाहारी नास्तिकों के बीच ही होगा क्योंकि तब तक दूसरे धर्म के माँसाहारी लोग हिंसा सहने के लिए नहीं बचेंगे। वैसे भी धर्महित में उपयोगी नास्तिकों को आखिर कितनी देर तक बर्दाश्त किया जा सकता है! जिन लड़कियों को जींस पहनने और प्रेम करने का शौक है, वह भी देख लें। इस तरह के तत्व उनके लिए हानिकारक हैं।

बाकी सब लोग भी अपने-अपने हिसाब से इस खबर को देख-सुन लें।

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