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मानहानि का मुकदमा ठोकते ही समझौते के लिए रिरियाने, फिर धमकाने लगा दैनिक जागरण

मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) : अपना गला फंसते देख खुद को देश ही नहीं, पूरी दुनिया का नंबर वन कहने वाला बड़बोला अखबार दैनिक जागरण किस तरह सिंह से सियार बन जाता है, इसकी बानगी भर है ओमवीर सिंह प्रकरण। मानहानि के उस मामले में अपनी गलती से मुंह चुराते हुए जागरण प्रबंधन को आखिरकार ओमवीर के आगे समझौते के लिए रिरियाना पड़ा। 

मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) : अपना गला फंसते देख खुद को देश ही नहीं, पूरी दुनिया का नंबर वन कहने वाला बड़बोला अखबार दैनिक जागरण किस तरह सिंह से सियार बन जाता है, इसकी बानगी भर है ओमवीर सिंह प्रकरण। मानहानि के उस मामले में अपनी गलती से मुंह चुराते हुए जागरण प्रबंधन को आखिरकार ओमवीर के आगे समझौते के लिए रिरियाना पड़ा। 

 

भड़ास4मीडिया को भेजा गया ओमवीर सिंह का पत्र

मुजफ्फरनगर का यह मामला जरा पुराना है लेकिन हाल ही में प्रकाश में आया है। यहां के निवासी ओमवीर सिंह ने बताया कि उनके खिलाफ दैनिक जागरण (मेरठ) में 19, 20, 22 अगस्त 2014 को तथ्यहीन समाचार प्रकाशित किया गया था। उसके बाद उन्होंने जनपद के एसीजेएम प्रथम के न्यायालय में मानहानि का वाद (संख्या-2629/09/2014) दायर कर दिया। जागरण प्रबंधन उन पर मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाने लगा। ऐसा न करने पर सुदूर पूर्वांचल में तबादले की धमकी भी दी जाने लगी। मजबूरन उन्हें दबाव में समझौता करना पड़ा। 

जागरण निदेशकों के लिए जारी समन की फोटो प्रति

ओमवीर सिंह के मुताबिक एसीजेएम न्यायालय प्रथम ने मानहानि संबंधी उनके वाद पर दैनिक जागरण के निदेशक धीरेंद्र मोहन, महेंद्र मोहन, संजय गुप्ता के अलावा दिलीप अवस्थी, क्राइम रिपोर्टर विनय शर्मा को पिछले वर्ष नवंबर में समन जारी कर तलब किया था। उसके बाद से लगातार जागरण प्रबंधन और संबंधित आरोपी उस पर दबाव बनाने लगे। 

जागरण रिपोर्टर विनय शर्मा के लिए जारी समन की फोटो प्रति

ओमवीर सिंह के मुताबिक कुछ माह तक मामला टालमटोल में रहा। उन पर दबाव जारी रहा। आखिरकार उन्हें निजी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ समय बाद एफिडेविड के आधार पर जागरण प्रबंधन से समझौते के लिए मजबूर होना पड़ा।    

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