अमेरिका द्वारा भारतीयों को हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़कर वापस भेजने का मामला गरमाता जा रहा है। कई देशों में अमेरिका के इस कदम की निंदा हो रही है, लेकिन भारत में अपने ही देशों के लोगों को अपराधी की तरह ट्रीट किया जा रहा है। इसी मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में एक बयान दिया, जिसमें बताया कि भारतीयों को 2009 से वापस भेजा जा रहा है। उन्होंने महिलाओं की वापसी पर संसद में जो बातें कहीं उसे सोशल मीडिया यूजर्स झूठ करार दे रहे हैं। साथ ही यह भी कह रहे हैं कि एक फोन में विदेशी धरती पर वॉर रुकवा देने वाले पीएम मोदी गोरी चमड़ी वालों द्वारा अपने देश के लोगों का अपमान कैसे बर्दाश्त कर रहे हैं?
नीचे पढ़ें कुछ प्रतिक्रियाएं…
मंजुल-
ये भारत के विदेशमंत्री हैं या अमरीका के?
अगर भारत के होते तो इनको पता होता कि हमारे प्रधानमंत्री फोन करके वॉर रुकवा देते हैं और अपने लोगों को निकाल लेते हैं। उनको लेने मंत्री जाते हैं। नारेबाजी होती है। 24×7 टीवी पर खबर चलती है। बाद में चुनावी विज्ञापन भी बनता है।
पहले हुआ था ऐसा कभी? अब ऐसे प्रधानमंत्री वाले देश के नागरिकों के साथ भले ही वो अवैध प्रवासी हों, बदसलूकी कैसे बर्दाश्त की जा सकती है।
इसके पहले के प्रधानमंत्रियों के तो अमरीकी राष्ट्रपतियों से तू-ताड़ी के संबंध भी नहीं थे। तो उन लोगों की क्या बात करनी?
और वैसे भी जिन 70 सालों में कुछ नहीं हुआ और लोग सोचा करते थे कि ये कहाँ पैदा हो गए, उनका हिसाब किताब क्यों देना? नीचे सुनिए विदेश मंत्री क्या कह रहे हैं?…
https://twitter.com/MANJULtoons/status/1887527229514727620
डॉ मुकेश कुमार-
अवैध प्रवासियों की अमानवीय ढंग से वापसी जहाँ मोदी सरकार की कमज़ोरी बताता है, वहीं डोनल्ड ट्रम्प का सुपर पॉवर होने का दंभ और तीसरी दुनिया के देशों के बारे में उनका नज़रिया भी बताता है।
वे इन प्रवासियों को क्रिमिनल और एलीएंस शब्दों से संबोधित करते हैं। ठीक है कि इन्होंने अमेरिका जाने के लिए कानून तोड़ा है, मगर उन्होंने लूटपाट, हत्या या बलात्कार नहीं किए और न ही किसी तरह का फ्रॉड किया है।
उन्हें इस तरह से अपराधी करार देना गोरी चमड़ी का गुरूर नहीं हो तो क्या है…..
एक नए तरह का उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद आ रहा है। अगर भारत और तीसरी दुनिया के देश न चेते तो उनके साथ और भी बुरा बर्ताव ट्रम्प-एलोन मस्क की सरकार करने वाली है।
प्रशांत टंडन-

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो कायर नहीं निकले. उन्होंने कभी अपने आपको भगवान का अवतार भी नहीं बताया होगा लेकिन अपने नागरिकों के आत्मसम्मान की रक्षा की, हथकड़ी–बेड़ियों में कोलंबियाई नागरिकों को ला रहे अमेरिकी सेना का जहाज अपनी धरती पर नहीं उतरने दिया.
अपने जहाज भेज कर उन्हें सम्मान के साथ लाए. और अमेरिका के साथ 880 मिलियन डॉलर का ऑयल ड्रिलिंग का सौदा भी रद्द कर दिया.
अपूर्व भारद्वाज-
मैक्सिकन राष्ट्रपति क्लाउडिया चेनबाम ने ट्रम्प को ऐसा जवाब दिया कि सुनने वालों को भी झटका लग गया।
“आपने दीवार बनाने की सोची, पर याद रखिए उस दीवार के उस पार 7 अरब लोग खड़े हैं। ये लोग iPhone छोड़कर सैमसंग या हुआवेई पकड़ लेंगे। Ford और Chevrolet की जगह Toyota, Kia, Honda चला लेंगे। Disney की जगह लैटिन अमेरिकी फिल्में देखेंगे और Nike की जगह मैक्सिकन Panam जूते पहनेंगे।
अगर इन 7 अरब उपभोक्ताओं ने अमेरिकी प्रोडक्ट्स लेना बंद कर दिया, तो आपकी अर्थव्यवस्था दीवार के अंदर ही ढह जाएगी। तब आप खुद आकर कहेंगे—’प्लीज़, ये दीवार हटा दो।’

हम ऐसा नहीं चाहते, लेकिन आपने दीवार मांगी, तो अब दीवार ही मिलेगी। बस याद रखिए, दुनिया बड़ी है और अमेरिका ही सबकुछ नहीं।
डॉ मुकेश कुमार-
ग़ज़ब है। जयशंकर संसद के अंदर ग़लतबयानी कर रहे हैं। कह रहे हैं कि महिलाओं को हथकड़ियां-बेड़ियाँ नहीं लगाई गईं।
लेकिन ये सरासर झूठ है। वहाँ से आई महिलाओं ने बताया कि उन्हें हथकड़ियाँ और बेड़ियाँ लगाई गईं और उनके साथ दुर्दांत अपराधियों की तरह व्यवहार किया गया।
जयशंकर और मोदी सरकार को झूठ बोलने के लिए माफ़ी मांगना चाहिए। और ये भी पूछना चाहिए कि उसने किस दबाव में और किस डर से झूठ बोला।


मोदी सरकार ने क्षमा सावंत को रिजेक्ट लिस्ट में इसलिए डाल रखा है क्योंकि उन्होंने सीएए-एनआरसी का विरोध किया था और जातिगत भेदभाव के विरोध में विधेयक प्रस्तुत किया था।
अब इसी रिजेक्ट लिस्ट को आधार बनाकर उन्हें वीज़ा नहीं दिया जा रहा है। क्षमा को अपनी बीमार माँ को देखने भारत आने से रोका जा रहा है।
आप कल्पना कर सकते हैं कि मोदी सरकार कितनी ज़्यादा प्रतिशोध भावना से ग्रस्त रहती है कि मानवीय आधार पर भी कोई फ़ैसला नहीं लेती।
मूल खबर…
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