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सुख-दुख

जन्मदिन और existential anxiety!

यशवंत सिंह-

existential anxiety (अस्तित्वगत चिंता) क्या है?

Existential Anxiety (अस्तित्वगत चिंता) का मतलब है —
वो बेचैनी, डर या असुरक्षा की भावना, जो इंसान को अपने अस्तित्व, जीवन के अर्थ और मृत्यु की सच्चाई के बारे में सोचते हुए महसूस होती है।

आसान भाषा में समझिए:
• जब हम सोचते हैं कि “मैं क्यों पैदा हुआ हूँ?”
• “मेरे जीवन का असली मक़सद क्या है?”
• “एक दिन मुझे मरना ही है, उसके बाद क्या होगा?”
• “मेरे जीने का क्या अर्थ है अगर सब खत्म होना है?”

तो ये सवाल हमें एक गहरी बेचैनी दे सकते हैं। यही existential anxiety है।

मनोविज्ञान में:
•दार्शनिकों जैसे Søren Kierkegaard, Heidegger, और Jean-Paul Sartre ने इसे बहुत गहराई से समझाया।
•यह चिंता बीमारी नहीं है, बल्कि इंसान के चेतन होने की कीमत है। यानी हम अपने अस्तित्व और अंत (मृत्यु) को जानते हैं, इसलिए यह चिंता स्वाभाविक है।

फर्क समझें:
•Normal Anxiety → किसी practical चीज़ से डर (जैसे नौकरी, परीक्षा, बीमारी)।
•Existential Anxiety → जीवन और मृत्यु के ultimate सवालों से उत्पन्न डर।

अच्छी बात:
•यह चिंता अगर सही दिशा में संभाली जाए तो यह हमें और गहरे, सच्चे और सार्थक जीवन की ओर ले जाती है।
•बहुत से लोग इस anxiety को ध्यान, साधना, दर्शन, सृजनात्मक काम, या सेवा के ज़रिए एक positive transformation में बदलते हैं।

(जन्मदिन पर आप सबकी शुभकामनाओं के लिए आभारी हूँ। लगभग साढ़े पाँच हज़ार संदेशे तस्वीरें वीडियोज विभिन्न माध्यमों से मुझ तक पहुँचे! सबका जवाब दे पाना संभव नहीं इसलिए इकट्ठे थैंक यू बोल रहा हूँ। ये तस्वीर भी एक साथी ने भेजी है। सबका हृदय से आभार!)

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