LIC के शेयर में भारी गिरावट की आशंका!

सुभाष सिंह सुमन-

For LIC IPO investors… US mkt crashed after 40 decades high inflation data. Another Monday mayhem is on it’s way.

Lock-in period for anchor investors are expiring, so massive sell off is expected in LIC Stock. Take GIC, New India Assurance as guide and get ready for -650.


सौमित्र रॉय-

मैं और आप सभी वे खुशनसीब हैं, जो देश को आर्थिक संकट के दलदल में धंसते देख पा रहे हैं।

शेयर बाजार 1000 अंक टूटा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 77.82 पर है। लगातार दूसरे दिन भारत की मुद्रा औंधी पड़ी है।

लेकिन मूर्ख लोगों और देश की गोदी ने शर्म की जुबानी परिभाषा गढ़ी है। चीन का ज़मीन कब्जाना, मुद्रा का अवमूल्यन, बैंकों का डूबना, वैधानिक संस्थाओं की चाटुकारिता से लोगों को शर्म नहीं आती।

भारतीय बनने के लिए बेशर्म होना ही पड़ता है। फिर माथे पर धर्म का तिलक लग जाये तो शर्म और दूर चली जाती है।

उसके बाद सत्ता और सत्ता की दलाली चख ली जाए तो फिर अपने पूरे कपड़े उतारकर व्यक्ति खुद को नंगा खड़ा पाता है। नंगे को कभी शर्म नहीं आती।

प्रधानमंत्री मोदी गुजरात में अवाम के विकास को पहली प्राथमिकता बता रहे हैं। एक डरा हुआ व्यक्ति झूठ बोलता है।

डरी हुई तो अवाम भी है। देश की इकॉनमी नीचे फिसल रही है। महंगाई कमर तोड़ रही है। मोदी सरकार निकम्मी, नालायक है- लोग समझ रहे हैं।

कहीं बगावत हो रही है। राज्यसभा का चुनाव ही सही। भड़ास तो निकले।

भारत 1858 से 1947 तक 89 साल अंग्रेजों का गुलाम रहा। 1857 में हिन्दू और मुस्लिम ने मिलकर देश की आज़ादी की पहली लड़ाई लड़ी थी।

फिर देश बंटता गया। मज़हब, पंथ, जातियों में। फायदे में रहे पुरोहित और ब्राह्मण- जिनकी दक्षिणा, तोंद और दौलत बढ़ती गई।

अंग्रेजों की शिक्षा और नरसिम्हा राव के बाजारू अर्थशास्त्र ने लोगों में गुलामी की जड़ों को और मज़बूत बना दिया।

आज ये भारी-भरकम बेड़ियां जिस्म में गहरे घाव पैदा कर चुकी है।

हम जानते हैं कि सब तबाह हो रहा है। लेकिन कुछ करना नहीं चाहते। वक़्त को बदल नहीं पा रहे हैं।

क्योंकि हम बदलना नहीं चाहते। बरसों पिंजरे में रहे तोते को आज़ादी भी बहुत बड़े पिंजड़े जैसी लगती है।



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