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सियासत

क्या ‘गोदी मीडिया’ की तरह अब ‘गोदी जूडिसिअरी’ भी आकार ले चुकी है?

डॉ मुकेश कुमार-

सुप्रीम कोर्ट में ये चल क्या रहा है….ऐसा लगता है कि फ़ैसलों से लेकर ट्रांसफर और नियुक्तियों तक सरकार की चल रही है। कालेजियम ने घुटने टेक दिए हैं।

दो दिन पहले जस्टिस नागरत्ना ने अपने असहमति नोट से खुलासा किया था कि कैसे उनकी आपत्तियों के बावजूद जस्टिस विपुल मनुभाई पंचाली को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त कर दिया गया।

जस्टिस अभय ओका ने जस्टिस नागरत्ना के डिसेंट नोट को सार्वजनिक करने के लिए कहा है, मगर सुप्रीम कोर्ट में चुप्पी छाई हुई है।

अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस लोकुर ने बताया है कि कैसे सरकार जस्टिस मुरलीधर का ट्रांसफर करने का दबाव डाल रही थी मगर पहले उनके विरोध की वज़ह से फिर जस्टिस सीकरी की वज़ह से उनका ट्रांसफर नहीं हुआ।

बाद में जब वे दोनों रिटायर हो गए तो तुरंत उनका ट्रांसफर कर दिया गया। आख़िर ऐसा क्यों हुआ….उस कलेजियम में कौन-कौन थे जिन्होंने सरकार का साथ दिया।

अभी तीन दिन पहले एक और खबर आई थी कि किस तरह चेन्नई के एक जज ने एक मामले की सुनवाई से खुद को इसलिए बाहर कर लिया था क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के एक जज ने उनसे एक कंपनी के पक्ष में फ़ैसला करने को कहा था.

आख़िर सुप्रीम कोर्ट में सरकार के कौन से दलाल भर गए हैं जो इस तरह के काम कर रहे हैं और करवा रहे हैं….ये सारी ख़बरें सुप्रीम कोर्ट की साख और विश्वसनीयता को ध्वस्त करने वाली हैं।

ध्यान रहे कि वीएचपी की सभा में अनाप-शनाप बोलने वाला जस्टिस शेकर यादव का अभी तक बाल भी बांका नहीं हुआ है। उधर जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलने वाला है।

क्या गोदी मीडिया की तरह अब गोदी जूडिसिअरी भी आकार ले चुकी है और लोकतंत्र के हत्यारों का साथ दे रही है…..

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1 Comment

1 Comment

  1. Punit Shukla

    August 30, 2025 at 10:20 am

    यह इतिहास की पुनरावृत्ति है। जब जिसको मौका मिला।

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