लू लगने से लखनऊ के युवा पत्रकार हिमांशु चौहान का निधन

राजीव तिवारी बाबा-

बेहद दुःखद ख़बर। बहुत ही स्तब्ध करने वाली ख़बर है। हम सबके साथी पत्रकार हिमांशु चौहान हम सबके बीच नहीं रहे। अब से कुछ देर पहले लखनऊ के सिविल अस्पताल में उनका निधन हो गया।

ईश्वर से प्रार्थना है कि हिमांशु चौहान को अपने श्री चरणों में जगह दे व उनके परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे.

हिमांशु चौहान अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गये हैं!

बताया जाता है उन्हें लू लग गई थी। यूरिन इंफेक्शन और लूज मोशन भी हो रहा था। ये सब इतनी कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। इसी साल डेढ़ साल में उनकी दादी और माताजी का भी निधन हो गया था। पिताजी, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं उनके परिवार में अब। बहुत ही मिलनसार और सौम्य स्वभाव था। विश्वास नहीं हो रहा। सब लोग अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें। बाबा सबकी रक्षा करें।

वरिष्ठ पत्रकार सुशील दुबे लिखते हैं-

शहर का एक अति संस्कारी सरल कलमकार हिमांशु चौहान केवल लू लगने से 2 दिन में ही चट पट हो गया… तो फिर मेरे या किसी के भी उन हजारों आशीर्वाद का क्या कि जीते रहो हिमांशु मौज करो हिमांशु… पुष्पांजलिं,,ओम शांति

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह लिखते हैं-

हिमांशु की मौत लखनवी पत्रकारों से लूट ले गई मिलनसारी और सुसंस्कारों का ख़ज़ाना

नहीं पता हिंमाशु सिंह के कौन करीबी दोस्त हों पर ये ज़रूर मालूम है कि उसे करीब सभी वरिष्ठ पत्रकार अपना छोटा भाई मानते थे। आज की मनहूस सुबह सबसे उनका छोटा भाई छीन कर लें गई। और मुझसे भी।

कुछ ही दिन पहले विधानसभा में मुलाकात हुई तो वो बहुत कमज़ोर दिखा, मैंने वजह पूछी। उसने अपनी बीमारी की जो वजह बताई थी उसपर ध्यान दीजिएगा और आगे से इस बात की एहतियात कीजिएगा। मान लीजिएगा कि आपका पत्रकार भाई, साथी या दोस्त जाते-जाते आपको बड़ी बात से आगाह कर गया।

हिंमाशु ने मुझे बताया कि वो पूरी तरह फिट/तंदुरुस्त था। एक छोटी सी लापरवाही या बेएहतियात या वक्ती मज़बूरी ने उसे मुसीबत में डाल दिया था। लखनऊ के दारूशफा से वो गुजर रहे थे, पेशाब लगा। पेशाबघर बहुत गंदा लेकिन और कोई विकल्प नहीं था। वहां पेशाब करने के तुरंत बात उसे परेशानी शुरू हो गई। डाक्टर के पास गए तो उसने पूछा- क्या कहीं गंदी जगह पेशाब किया था। उसने बताया हां, अभी जल्द ही। इलाज शुरू हुआ लेकिन यूरिन इंफेक्शन ने शरीर को घुला दिया और आज मौत से लड़ते-लड़ते हिमांशु हार गए,और ये युवा हिमलनसार पत्रकार अपने परिवार और पत्रकार बिरादरी को छोड़कर चला गया।

नई पीढ़ी मे इतना मिलनसार और सुसंस्कार पत्रकार शायद कोई नहीं। हिमांशु इन्तेहा से ज्यादा मेरा सम्मान करता था। मैं टीवी पर लाइव हूं तो फोटो खींचकर भेज देता था। उम्र में मुझसे बहुत छोटा था लेकिन फिर भी मैं मजाक कर लेता था। संवाददाता समिति के सचिव शिवशरण जी भी हिमांशु को बहुत मानते थे। इस विधानसभा सत्र का पास लेने गया था, हिंमाशु भी पास लेने आए थे, हम लैग पास-पास बैठे थे।

किसी गैर मान्यता प्राप्त पत्रकार को बताया जा रहा था कि संवाददाता समिति के पदाधिकारी से रिकमेंड कराएं तभी पास बन पाएगा। मैंने हिंमाशु को चुटकी ली और कहा तुम ही रिकमेंड कर दो तुम तो शिवशरण जी के अधिकृत नुमाइंदे हो।

हिमांशु मुस्कुराया- नवेद भईया आप मुझसे बहुत खेलते हो।
आखिरी मुलाकात में हिंमाशु का वो मुस्कुराता हुआ चेहरा नज़रों के सामने है। वो मां का परमभक्त था, नवरात्रि में मां की चरणों में चला गया।

  • नवेद शिकोह



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