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(पार्ट टू) मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिंदी अनुवाद पढ़ें

11. इस चरण में मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड के खंड 20जे, जो मौजूदा कार्यवाही में विवाद के मुख्य क्षेत्रों में से एक है, पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा सकता है।

“20जे संशोधित वेतनमानसभी कर्मचारियों पर 1 जुलाई 2010 से लागू होगा। हालांकि यदि कोई कर्मचारी इन अनुशंसाओं के प्रवर्तन के लिए अधिनियम की धारा 12 के तहत सरकारी अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से तीन हफ्तों के भीतर अपने मौजूदा वेतनमान और वर्तमान परिलब्धियों/प्रतिभूतियों को बनाए रखने का विकल्प चुनता है, तो वह अपने मौजूदा वेतनमान तथा ऐसी परिलब्धियों को बनाए रखने का पात्र होगा।”

13. मौजूदा अवमानना याचिकाओं (संख्या 83) में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा विधिवत अनुमोदित और अधिसूचित मजीठिया वेजबोर्ड के अवार्ड/पंचाट के अनुसार वेतन और भत्तों का भुगतान नहीं किया गया है। तीन(3) रिट याचिकाएं यानी रिट पेटिशन नंबर 998 आफ 2016,148 आफ 2017 और 299 आफ 2017 संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह आरोप लगाते हुए दायार की गई हैं कि मामले से जुड़े उन पत्रकारों और कर्मचारियों के तबादले और बर्खास्तगी/छंटनी मनमाने तरीके से की गई है, जो दावा करते हैं कि उन्होंने मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड के उचित क्रियान्वयन की मांग की है। उपरोक्त विषय मौजूदा मामलों के समूह में विचाराधीन विषय वस्तू है।

14. शामिल मुद्दों और रिट याचिकाओं की बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए, जिन्हें इस न्यायालय के समक्ष लाया गया था, इस कोर्ट द्वारा समय-समय पर मुद्दों के प्रभावी समाधान के लिए विभिन्न आदेश सुनाए गए हैं। दिनांक 24.4.2015, 14.4.2016 और  8.11.2016 के आदेश, जिन्हें नीचे दिया गया है को विशिष्ट ध्यान देने और उल्लेख करने की आवश्यकता होगी।

दिनांक 28 अप्रैल 2015 के आदेश

सभी राज्य अपने संबंधित मुख्य सचिवों के माध्यम से, आज से चार सप्ताह के भीतर, श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचारपत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1955 की धारा 17-बी के तहत निरीक्षकों की नियुक्ति करेंगे, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड के तहत पत्रकारों सहित अखबार कर्मचारियों की सभी श्रेणियों के बकाया और अनुदानों/अधिकारों/पात्रता को उनके नियमों के अनुसार कार्यान्वित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा नियुक्त निरीक्षक स्वाभाविक रूप से अधिनियम के तहत प्रदान की गई अपनी शक्तियों का प्रयोग करेंगे और प्रत्येक राज्य के श्रम आयुक्त के माध्यम से ऊपर दर्शाए गए मुद्दे पर सटीक निष्कर्षों के साथ इस न्यायालय को रिपोर्ट सौंपेंगे।  (हमारे द्वारा जोर दिया जाता है)

दिनांक 14 मार्च 2016 को जारी आदेश:

हमने न्यायालय के आदेशानुसार वेजबोर्ड की सिफारिशों के तहत देयताओं/दायित्वों से बचने के लिए गलत तरीके से सेवाओं की बर्खास्तगी और धोखे से लिए गए अधिकारों के आत्मसमर्पण के आरोप लगाकर दाखिल की गई विभिन्न इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन पर भी विचार किया है। चूंकि अब तक प्राप्त की गई शिकायतें संख्या में काफी ज्यादा हैं, यह कोर्ट प्रत्येक मामले में व्यक्तिगत रूप से जांच करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए हम प्रत्येक राज्य के श्रम आयुक्त को निर्देश देते हैं कि इस तरह की सभी शिकायतों पर गौर करके और इनका निर्धारण/व्याख्या करके आवश्यक रिपोर्टें 12 जुलाई, 2016 को या इससे पूर्व, इस न्यायालय के सामने फाइल करेंगे। हम प्रत्येक व्यक्तिगत कर्मचारी जिन्होंने इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दाखिल की हैं और उन कर्मचारियों को भी जो अभी इस कोर्ट को संपर्क कर रहे हैं और जिनकी शिकायतें ऊपर दर्शाए अनुसार ही हैं, को यह स्वतंत्रता देते हैं कि वे इस आदेशानुसार राज्य के श्रम आयुक्त के पास जाएं। (हमारे द्वारा जोर दिया जाता है)

दिनांक 08 नवंबर, 2016 के आदेश

कारणों के चलते हम वर्तमान में विभिन्न राज्यों के श्रम आयुक्तों से मांगी गई रिपोर्टों के आधार पर मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के कार्य को मौजूदा समय में रिकार्ड करना जरूरी नहीं समझते हैं,बाद की तिथि के लिए स्थगित करते हैं। इसके बजाय यह बुद्धिमतापूर्ण और वास्तव में आवश्यक होगा कि कुछ कानून के प्रश्रों को हल किया जाए, जो अब तैयार कर दिए गए हैं और कोर्ट के अनुरोध पर, वरिष्ठ वकील श्री कॉलिन गोन्साल्वेस द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत कर दिए गए हैं। पहले कानूनी प्रारुपण/फार्मूलों को माना और तय किया जाए इसके बाद मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों को लागू करने के तंत्र/मैक्रिज्म के बारे में आदेशों का पालन किया जाएगा। (हमारे द्वारा जोर दिया जाता है)

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