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हिसाम सिद्दीकी का खुला पत्र : समिति पर हर हाल में कब्जा जमाए रखने की चाहत क्यों है?

उत्तर प्रदेश में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संगठन के चुनाव को लेकर सिरफुटव्वल जारी है. हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस जैसे ब्रोकर्स से आम पत्रकारों में जबरदस्त नाराजगी है. लेकिन हेमंत व कलहंस हर हाल में इस संगठन पर फिर काबिज होना चाहते हैं क्योंकि इस संगठन के नेता के बतौर उन्हें सत्ता से गलबहियां-हथबहियां करने के मौके ढेर सारे मिलते रहते हैं. हेमंत और कलहंस की लाख कोशिशों के बावजूद चुनाव की गाड़ी डिरेल नहीं हुई है.

उत्तर प्रदेश में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संगठन के चुनाव को लेकर सिरफुटव्वल जारी है. हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस जैसे ब्रोकर्स से आम पत्रकारों में जबरदस्त नाराजगी है. लेकिन हेमंत व कलहंस हर हाल में इस संगठन पर फिर काबिज होना चाहते हैं क्योंकि इस संगठन के नेता के बतौर उन्हें सत्ता से गलबहियां-हथबहियां करने के मौके ढेर सारे मिलते रहते हैं. हेमंत और कलहंस की लाख कोशिशों के बावजूद चुनाव की गाड़ी डिरेल नहीं हुई है.

इस बीच हेमंत और कलहंस की तरफ से घोषित चुनाव समिति के मुख्य चुनाव अधिकारी वीर विक्रम बहादुर मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इससे हेमंत व कलहंस के मंसूबो को झटका लगा है. इस बारे में लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर अपने एफबी वॉल पर लिखते हैं: ”यूपी मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति पर तीन साल से अवैध कब्ज़ा किये हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस की साजिशों को आज तब जोरदार ठोकर मिली जब खुद उनके ही गुट में मुख्य चुनाव अधिकारी बनाये गए एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपने पद को त्याग दिया। गौरतलब है कि सिर्फ साजिशों के चलते ही हेमंत-कलहंस की जोड़ी ने पत्रकारीय मूल्यों की हत्या करते हुए समिति और चुनाव को माखौल में तब्दील कर दिया था। लेकिन वीर बिक्रम बहादुर मिश्र ने इस गुट की कोशिशों से खुद को अलग कर लिया है।”

सबसे उपर वो पत्र है जो पत्रकार हिसाम सिद्दीकी ने सभी पत्रकारों के नाम लिखा है. पढ़िए और कोशिश करिए कि उत्तर प्रदेश के पत्रकारों का संगठन साफ सुथरे लोगों के हाथों में पहुंचे ताकि पत्रकारों के मर्डर, शोषण, दमन जैसे मसलों पर पत्रकार संगठनों का संघर्ष नेताओं मंत्रियों अफसरों को बैकफुट पर ला सकें और सरोकारी पत्रकारिका के राह को सुगम बनाए रख सकें.

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